जनजातीय सुरक्षा मंच की समीक्षा बैठक: ‘धर्मांतरण करने वालों पर बने स्पष्ट कानून’; लाल किला के ‘जनजाति समागम’ की सफलता पर प्रांत संयोजक ने जताई खुशी
न्यूज स्केल लाइव
चतरा (सिमरिया)। जनजातीय सुरक्षा मंच, जिला इकाई चतरा की एक अत्यंत महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक शनिवार को सिमरिया प्रखंड मुख्यालय में आयोजित की गई. इस बैठक में मुख्य रूप से नई दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किला मैदान में हाल ही में संपन्न हुए राष्ट्रव्यापी महाकुंभ ‘जनजाति समागम-2026’ की अभूतपूर्व सफलता और चतरा जिले के प्रतिनिधियों की भागीदारी पर विस्तार से चर्चा की गई : बैठक में नई दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किला मैदान में आयोजित ‘जनजाति समागम-2026’ की सफलता पर विस्तार से चर्चा की गई।].
500 से अधिक जनजातीय समुदायों का लाल किले पर जुटा महाकुंभ: हिंदुवा उरांव
बैठक को मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित करते हुए मंच के प्रांत संयोजक हिंदुवा उरांव ने समागम की सफलता के आंकड़ों को साझा किया. उन्होंने बताया कि धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती वर्ष के पावन अवसर पर आयोजित इस ऐतिहासिक समागम में देश के कोने-कोने से 500 से अधिक जनजातीय समुदायों के लाखों लोगों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई : भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती वर्ष के अवसर पर आयोजित इस महाकुंभ में देशभर के 500 से अधिक जनजातीय समुदायों के लाखों लोगों ने भाग लिया।]. यह महासमागम पूरे भारत के जनजातीय समाज की अटूट एकता, गौरवशाली इतिहास और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का जीवंत प्रतीक बना है.
उन्होंने आगे जानकारी दी कि दिल्ली के इस समागम में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए थे. अपने संबोधन में गृह मंत्री ने देश के विकास में आदिवासियों के योगदान को रेखांकित किया और उनकी संस्कृति, परंपरा तथा ‘जल, जंगल और जमीन’ से जुड़ी अनूठी जीवन शैली की सराहना करते हुए इसे भारतवर्ष की वास्तविक ‘सांस्कृतिक आत्मा’ बताया.
धर्मांतरण और एसटी परिभाषा को लेकर केंद्र सरकार से बड़ी मांग
समीक्षा बैठक के दौरान मंच के पदाधिकारियों ने कड़ा रुख अख्तियार करते हुए कहा कि दिल्ली का यह समागम केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि यह जनजातीय अस्मिता, पारंपरिक आस्था, रूढ़िवादी परंपरा और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए फूंका गया एक राष्ट्रीय जनआंदोलन है : बैठक में मंच के पदाधिकारियों ने कहा कि यह समागम केवल सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि जनजातीय अस्मिता, पारंपरिक आस्था और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए एक राष्ट्रीय जनआंदोलन है।
संगठन ने बैठक के माध्यम से केंद्र सरकार के समक्ष अपनी प्रमुख मांगें दोहराईं:
एसटी की स्पष्ट परिभाषा: अनुसूचित जनजाति (ST) की एक स्पष्ट और सटीक वैधानिक परिभाषा तय की जाए : संगठन ने अनुसूचित जनजाति (एसटी) की स्पष्ट वैधानिक परिभाषा तय करने तथा लोकुर समिति के मानदंडों को कड़ाई से लागू करने की मांग दोहराई।
लोकुर समिति के मानदंड: आदिवासियों की पहचान सुनिश्चित करने के लिए लोकुर समिति के कड़े मानदंडों को पूरे देश में सख्ती से लागू किया जाए.
धर्मांतरण पर वैधानिक रोक: मंच का स्पष्ट रूप से कहना है कि जो लोग अपने मूल आदिवासी धर्म और संस्कृति को छोड़कर धर्मांतरण कर चुके हैं, उनकी जनजातीय पहचान और उससे जुड़े आरक्षण व अन्य संवैधानिक अधिकारों के संबंध में केंद्र सरकार को एक स्पष्ट व कड़ा कानूनी ढांचा बनाना चाहिए.
पदाधिकारियों ने बताया कि इन मांगों को लेकर संगठन पिछले कई वर्षों से लगातार राष्ट्रव्यापी हस्ताक्षर अभियान, सघन जनसंपर्क कार्यक्रम और विभिन्न सांसदों के माध्यम से देश के नीति-निर्माताओं को ज्ञापन सौंपता आ रहा है.
चतरा के 18 गांवों के प्रतिनिधियों ने अपने खर्च पर तय किया दिल्ली का सफर
बैठक में चतरा जिला इकाई की रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए गर्व के साथ जानकारी दी गई कि इस राष्ट्रीय समागम में चतरा जिले के विभिन्न प्रखंडों के अंतर्गत आने वाले 18 गांवों से 54 जनजातीय प्रतिनिधि शामिल होने के लिए गए थे: बैठक में जानकारी दी गई कि चतरा जिले के विभिन्न प्रखंडों के 18 गांवों से 54 जनजातीय प्रतिनिधि अपने निजी खर्च पर रेल मार्ग से दिल्ली पहुंचे थे।]. खास बात यह रही कि ये सभी प्रतिनिधि किसी सरकारी या संगठन के खर्च पर नहीं, बल्कि अपने निजी खर्च पर रेल मार्ग से दिल्ली पहुंचे थे: बैठक में जानकारी दी गई कि चतरा जिले के विभिन्न प्रखंडों के 18 गांवों से 54 जनजातीय प्रतिनिधि अपने निजी खर्च पर रेल मार्ग से दिल्ली पहुंचे थे।
समागम की पूर्व तैयारी को लेकर चतरा जिले के गांवों में व्यापक जनजागरण अभियान चलाया गया था: समागम की तैयारी के लिए जिले के विभिन्न गांवों में व्यापक जनजागरण अभियान चलाया गया था तथा कई स्थानों पर इसकी सफलता के लिए पारंपरिक देवपूजा भी की गई थी।]. यही नहीं, दिल्ली रवानगी से पूर्व समागम की अभूतपूर्व सफलता के लिए ग्रामीणों द्वारा पवित्र देवस्थलों पर पारंपरिक रीति-रिवाज से विशेष ‘देवपूजा’ भी अर्चना की गई थी : समागम की तैयारी के लिए जिले के विभिन्न गांवों में व्यापक जनजागरण अभियान चलाया गया था तथा कई स्थानों पर इसकी सफलता के लिए पारंपरिक देवपूजा भी की गई थी।
अधिकारों की रक्षा के लिए निरंतर जारी रहेगा अभियान: जय प्रकाश उरांव
जिला संयोजक जय प्रकाश उरांव सहित अन्य प्रबुद्ध पदाधिकारियों ने दृढ़ संकल्प दोहराते हुए कहा कि जनजातीय समाज की विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान, जल-जंगल-जमीन के पारंपरिक हक और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए सुरक्षा मंच का यह जन-अभियान आगे भी गांव-गांव में निरंतर और उग्र रूप से जारी रहेगा : जिला संयोजक जय प्रकाश उरांव सहित अन्य पदाधिकारियों ने कहा कि जनजातीय समाज की सांस्कृतिक पहचान और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए यह अभियान आगे भी निरंतर जारी रहेगा।
इस महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक में मुख्य रूप से कृष्ण चंद्र सिंह, सुरेश पाठक, बजरंगी मल्होर, अंबिका सिंह भोक्ता, मंटू उरांव सहित संगठन के दर्जनों सक्रिय कार्यकर्ता, ग्रामीण और जनजातीय समाज के प्रबुद्ध लोग उपस्थित थे।























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