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डीसी के जनता दरबार में पहुंचे ग्रामीण, पूर्व LRDC पर लगाया 4 लाख की घूस मांगने का गंभीर आरोप

On: June 17, 2026 12:08 AM
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भू-माफिया और अधिकारियों के गठजोड़ का बड़ा खुलासा! पोते को बना दिया दादा, फर्जी वंशावली के खेल में घिरे पूर्व भूमि सुधार उपसमाहर्ता

न्यूज स्केल लाइव

चतरा (कान्हाचट्टी)। चतरा जिला अंतर्गत कान्हाचट्टी प्रखंड की तुलबुल पंचायत में जमीन हेराफेरी और प्रशासनिक भ्रष्टाचार का एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। तुलबुल पंचायत के पीड़ित ग्रामीणों ने मंगलवार को चतरा उपायुक्त (DC) के जनता दरबार में पहुंचकर पूर्व भूमि सुधार उपसमाहर्ता (LRDC), चतरा के खिलाफ एक लिखित आवेदन देकर न्याय की गुहार लगाई है।

ग्रामीणों का सीधा और गंभीर आरोप है कि पूर्व एलआरडीसी ने असली रैयतों (भूस्वामियों) के संवैधानिक अधिकारों का हनन करते हुए, अपने पद का दुरुपयोग किया और भू-माफियाओं से मिलकर जमीन मालिकों को उनकी पैतृक भूमि से बेदखल करने का एकपक्षीय फैसला सुना दिया।

अजब-गजब फर्जीवाड़ा: पोते को ही बना दिया आवेदक का दादा!

इस पूरे मामले में सूचना के अधिकार (RTI) और सरकारी दस्तावेजों में की गई जालसाजी का एक हास्यास्पद लेकिन गंभीर नमूना सामने आया है।

कागजी हेराफेरी का खेल: आरटीआई से प्राप्त दस्तावेजों के अनुसार, भूस्वामी बूटा ठाकुर के पिता का नाम ‘केदार ठाकुर’ दर्शा दिया गया है। जबकि हकीकत यह है कि केदार ठाकुर, बूटा ठाकुर के सबसे छोटे बेटे (यानी आवेदक के छोटे भाई) हैं! खतियान और रैयत के रिकॉर्ड को आपस में मिसमैच (गलत) करने के उद्देश्य से पोते को ही दादा बना दिया गया, जिसका खुलासा खुद अंचल अधिकारी (CO) की जांच में भी हुआ था।

इस साजिश में तुलबुल पंचायत के पूर्व मुखिया के नाम पर एक फर्जी वंशावली भी तैयार कराई गई थी। जब इस संबंध में पूर्व मुखिया से पूछताछ की गई, तो उन्होंने साफ किया कि यह वंशावली पूरी तरह फर्जी है और उन्होंने इस जालसाजी के खिलाफ पहले ही अंचल कार्यालय को लिखित शिकायत भेजी थी।

क्या है जमीन का पूरा इतिहास और खतियानी रिकॉर्ड?

पीड़ित भूस्वामी लालधारी ठाकुर और उनके वंशजों के अनुसार, यह पूरा विवाद कान्हाचट्टी अंचल के ग्राम तुलबुल (खाता संख्या 33, मौजा तुलबुल, थाना नंबर 26) के अंतर्गत आने वाली कुल 2.10 और 1/2 एकड़ की कीमती जमीन से जुड़ा है।

  • मूल रैयत: सर्वे के अनुसार इस जमीन के रैयत नुनु ठाकुर (पुत्र जगन ठाकुर) और दूसरे कैलु उर्फ कैल ठाकुर थे (जगन ठाकुर की कोई संतान नहीं थी)।

  • वंशज: कैलु ठाकुर के एकमात्र पुत्र बूटा ठाकुर हुए और वर्तमान आवेदक इन्हीं बूटा ठाकुर के सीधे वंशज हैं।

  • ऐतिहासिक दस्तावेज: आवेदकों के पास अपने पूर्वजों के पक्ष में वर्ष 1916 से लेकर 2015 तक लगातार निर्गत हुए लगान रसीद मौजूद हैं। इसके अलावा हजारीबाग मजिस्ट्रेट का 1966 का आदेश पत्र, बिहार सरकार की रसीदें, बूटा ठाकुर के नाम का बैंक पासबुक, ऋण बाकी नोटिस, ऋण समझौता पत्र और 1962 की पंजी-2 जैसे अकाट्य राजस्व दस्तावेज मौजूद हैं।

कर्मचारी ने पंजी-2 में की थी छेड़छाड़, CO की जांच में हुआ था खुलासा

आवेदकों का आरोप है कि पूर्व राजस्व कर्मचारी अर्जुन पासवान ने पद पर रहते हुए सरकारी दस्तावेजों और पंजी-2 (Register 2) के साथ गंभीर छेड़छाड़ की थी। कर्मचारी ने नियमों को ताक पर रखकर हेमराज ठाकुर वगैरह (पिता स्वर्गीय बढन ठाकुर, साकिन तुलबुल) के पिता और दादा का नाम अवैध रूप से पंजी-2 में चढ़ा दिया था।

इस जालसाजी के खिलाफ पूर्व में भी उपायुक्त और एलआरडीसी को आवेदन दिए गए थे, जिसके बाद वर्तमान अंचलाधिकारी (CO) ने मामले को संज्ञान में लेते हुए गहन जांच की थी। अंचलाधिकारी ने दोनों पक्षों के कागजात देखने के बाद इस महा-फर्जीवाड़े का पर्दाफाश किया था और लालधारी ठाकुर व उनके वंशजों को ही जमीन का असली और वैध मालिक घोषित किया था।

“4 लाख रुपये नहीं दिए, इसलिए भू-माफियाओं के पक्ष में सुनाया फैसला”

जनता दरबार में पहुंचे भूस्वामियों ने पूर्व एलआरडीसी पर सीधे भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए कहा कि:

“अंचल अधिकारी की स्पष्ट जांच रिपोर्ट और हमारे पक्ष में 110 साल पुराने पुख्ता राजस्व दस्तावेज होने के बावजूद पूर्व भूमि सुधार उपसमाहर्ता ने मनमानी की। उन्होंने बिना किसी एनसीआर (NCR) रिपोर्ट और राजस्व फाइलों का सही अवलोकन किए, सीधे भू-माफियाओं से हाथ मिला लिया। फैसला हमारे पक्ष में देने के एवज में 4 लाख रुपये की डिमांड की गई थी। जब हमने घूस देने से साफ इनकार कर दिया, तो उन्होंने भू-माफियाओं का मनोबल बढ़ाते हुए एकपक्षीय आदेश पारित कर दिया।”

उच्च स्तरीय जांच और संवेदकों पर कार्रवाई की मांग

ग्रामीणों ने उपायुक्त रवि आनंद से मांग की है कि इस पूरे सिंडिकेट (जिसमें पूर्व अधिकारी, भू-माफिया और जालसाज शामिल हैं) की एक उच्च स्तरीय और निष्पक्ष तकनीकी जांच कराई जाए। साथ ही सरकारी दस्तावेजों के साथ छेड़छाड़ करने वाले पूर्व राजस्व कर्मी और गलत फैसला सुनाने वाले अधिकारी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए, ताकि न्याय मिल सके। उपायुक्त ने आवेदन को गंभीरता से लेते हुए मामले की जांच का भरोसा दिया है।

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