जमीन विवाद के केस से नाम हटाने के एवज में मांगी थी ₹12,000 की रिश्वत; परिवादी की शिकायत पर डीएसपी की टीम ने बिछाया जाल
न्यूज स्केल लाइव
गया (बिहार): बिहार में भ्रष्टाचार और घूसखोरी के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत निगरानी अन्वेषण ब्यूरो (विजिलेंस डिपार्टमेंट) ने गयाजी जिले के बेलागंज थाना क्षेत्र में एक बड़ी और प्रभावी कार्रवाई को अंजाम दिया है। निगरानी की विशेष टीम ने योजनाबद्ध तरीके से जाल बिछाकर बेलागंज थाने के एक सरकारी चौकीदार को ₹9,000 की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों दबोच लिया है।
इस हाईप्रोफाइल गिरफ्तारी के बाद से बेलागंज थाना परिसर सहित पूरे जिले के पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है। गिरफ्तार आरोपी चौकीदार की पहचान मनीष कुमार के रूप में की गई है।
थाना कांड संख्या 689/23 से जुड़ा है मामला, विजिलेंस ने पहले कराया सत्यापन
प्राप्त आधिकारिक जानकारी के अनुसार बेलागंज थाना कांड संख्या-689/23 से जुड़े एक गंभीर मामले में आरोपी का नाम हटाने और मदद करने के नाम पर अवैध रूप से पैसों की मांग और लेन-देन की पुख्ता शिकायत निगरानी विभाग को मिली थी। भ्रष्टाचार की इस गुप्त शिकायत को गंभीरता से लेते हुए निगरानी विभाग के वरीय अधिकारियों ने सबसे पहले एक गोपनीय टीम भेजकर पूरे मामले का जमीनी और तकनीकी सत्यापन (वेरिफिकेशन) कराया।
जांच में जब रिश्वत मांगे जाने का आरोप अक्षरसः सही पाया गया, तब निगरानी ब्यूरो ने आरोपी को रंगे हाथों दबोचने के लिए एक विशेष और हाईटेक टीम का गठन कर योजनाबद्ध तरीके से जाल बिछाया।
अस्पताल परिसर में हुई त्वरित घेराबंदी, जैसे ही हाथ में आए पैसे निगरानी ने दबोचा
मंगलवार को तय रणनीति के तहत निगरानी विभाग की टीम बेलागंज थाना के बिल्कुल समीप स्थित स्थानीय अस्पताल परिसर के आस-पास सादे लिबास में तैनात हो गई। जैसे ही परिवादी और चौकीदार मनीष कुमार के बीच अस्पताल परिसर में तय की गई ₹9,000 रिश्वत की रकम का लेन-देन हुआ, पहले से घात लगाकर बैठी निगरानी की टीम ने त्वरित घेराबंदी करते हुए आरोपी चौकीदार को रंगे हाथों पकड़ लिया।
निगरानी के जवानों ने तुरंत उसके हाथ धुलवाए, तो केमिकल के कारण उसके हाथ गुलाबी हो गए, जिससे घूसखोरी का अकाट्य साक्ष्य प्रमाणित हो गया। टीम ने बिना समय गंवाए तत्काल आरोपी को अपनी कस्टडी में लेकर गिरफ्तार कर लिया।
अनुसंधानकर्ता एएसआई अशोक कुमार के इशारे पर हो रहा था खेल: डीएसपी समीर चंद्र झा
इस बड़ी छापेमारी और ट्रैप के संबंध में विस्तृत आधिकारिक जानकारी देते हुए निगरानी विभाग के डीएसपी (DSP) समीर चंद्र झा ने बताया कि पूरा मामला बेलागंज थाना कांड संख्या-689/23 से जुड़ा है, जो मूल रूप से एक गंभीर जमीन विवाद से संबंधित है।
डीएसपी का आधिकारिक बयान: “इस दर्ज मामले में परिवादी रविंद्र यादव के पुत्र का नाम केस के डायरी से हटाने और क्लीन चिट देने के एवज में कुल ₹12,000 की रिश्वत मांगी गई थी। जांच में यह बात सामने आई है कि ₹3,000 की रकम आरोपी द्वारा पहले ही घूस के तौर पर ली जा चुकी थी, जबकि शेष बचे ₹9,000 की अंतिम किस्त के लिए लगातार दबाव बनाया जा रहा था। निगरानी की जांच में यह सबसे चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि इस मामले के मुख्य अनुसंधानकर्ता (IO) सह बेलागंज थाने के एएसआई (ASI) अशोक कुमार के सीधे निर्देश और कहने पर ही चौकीदार मनीष कुमार यह पैसे वसूल रहा था।”
आरोपी को लेकर पटना रवाना हुई टीम, एएसआई समेत अन्य दोषियों पर गिरेगी गाज
कार्रवाई की भनक लगते ही बेलागंज थाना परिसर और आस-पास के अस्पताल रोड इलाके में स्थानीय ग्रामीणों और राहगीरों की भारी भीड़ जुट गई। सरकारी महकमे में सरेआम हुई इस विजिलेंस रेड को लेकर स्थानीय लोगों के बीच तरह-तरह की कड़े प्रशासनिक सवाल और चर्चाएं होने लगीं। इस औचक कार्रवाई से बेलागंज अंचल और थाने के अन्य सरकारी कर्मियों व बिचौलियों में भी भारी हलचल और दहशत देखी गई।
गिरफ्तारी के बाद कानूनी प्रक्रिया पूरी करते हुए निगरानी विभाग की टीम आरोपी चौकीदार मनीष कुमार को कड़े पहरे में अपने साथ लेकर सीधे पटना स्थित विशेष न्यायालय और ब्यूरो मुख्यालय के लिए रवाना हो गई है। विभागीय जांच अधिकारियों का कहना है कि आरोपी चौकीदार को रिमांड पर लेकर पूछताछ की जा रही है ताकि इस सिंडिकेट के अन्य पहलुओं की जांच की जा सके। डीएसपी ने साफ किया है कि इस रिश्वतखोरी के खेल में शामिल मुख्य अनुसंधानकर्ता एएसआई अशोक कुमार सहित अन्य जो भी पुलिस अधिकारी या कर्मी दोषी पाए जाएंगे, उन सभी पर एफआईआर दर्ज कर सख्त कानूनी व दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।























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