गंभीर रूप से घायल ट्रॉमा सेंटर रेफर, थाना प्रभारी ने की घटना की पुष्टि
उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले के अंतर्गत आने वाले लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे पर रफ्तार के जानलेवा कहर और लंबी दूरी की थकावट ने एक बार फिर छह (6) हंसते-खेलते परिवारों को हमेशा के लिए तबाह कर दिया है। दिल्ली से चलकर बिहार के सीवान जिला की ओर जा रही यात्रियों से खचाखच भरी एक निजी स्लीपर बस अचानक पूरी तरह बेकाबू होकर एक्सप्रेसवे के बीचों-बीच पलट गई।
इस भीषण और विदारक सड़क हादसे में अब तक छह (6) लोगों की मौके पर ही तड़प-तड़पकर दर्दनाक मौत हो गई है, जबकि उन्नीस (19) लोग गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। चीख-पुकार के बीच मौके पर मुस्तैद स्थानीय ग्रामीणों और राहगीरों ने बिना एक पल का वक्त गंवाए राहत और बचाव कार्य शुरू कर सभी घायलों को नजदीक के अस्पतालों में भर्ती कराया।
मृतकों में सीवान के सब-ईस्पेक्टर और कैदी भी शामिल; दिल्ली से लौट रहे थे वापस
औरास थाना पुलिस से प्राप्त आधिकारिक जानकारी के अनुसार, यह बेहद दर्दनाक हादसा औरास थाना क्षेत्र में आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे के किलोमीटर नंबर 262 पर घटित हुआ। बस दिल्ली से बिहार के सीवान के लिए रवाना हुई थी, जिसमें सवार अधिकांश यात्री अपने वतन बिहार लौट रहे थे।
इस हादसे की सबसे सनसनीखेज और दुःखद बानगी यह है कि मरने वालों में बिहार पुलिस के एक सब-इंस्पेक्टर (SI) रामचंद्र और उनके साथ विधिक कस्टडी में चल रहा कुख्यात कैदी छत्रपाल शामिल हैं। बताया जा रहा है कि सब-इंस्पेक्टर रामचंद्र विधिक कार्य और कोर्ट की तफ्तीश के सिलसिले में कैदी छत्रपाल को लेकर बिहार के सीवान जिला से दिल्ली आए थे और दिल्ली से वापस सीवान लौटने के लिए इसी अभागे बस में सवार हुए थे, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था।
गंभीर रूप से झुलसे घायल लखनऊ ट्रॉमा सेंटर रेफर; अस्पतालों में मची चीख-पुकार
हादसे की भयावहता को देखते हुए औरास थाना प्रभारी संजीव कुशवाहा भारी पुलिस बल और एक्सप्रेसवे की रेस्क्यू विंग के साथ तुरंत मौके पर पहुंचे। पुलिस ने क्रेन की मदद से पलटी हुई बस को सीधा कराया और उसके भीतर फंसे यात्रियों को बाहर निकाला।
दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हुए 19 लोगों में से जिनकी स्थिति अत्यंत चिंताजनक, नाजुक और क्रिटिकल बनी हुई थी, उन्हें डॉक्टरों ने बेहतर न्यूरो व लाइफ-सपोर्ट इलाज के लिए तत्काल लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) ट्रॉमा सेंटर रेफर कर दिया है। बाकी सामान्य रूप से चोटिल यात्रियों का इलाज उन्नाव के स्थानीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और जिला अस्पताल में पूरी मुस्तैदी के साथ चल रहा है।
हादसे के असली कारणों की जांच शुरू; तेज रफ्तार और ‘स्लीप एपेनिया’ का शक
थाना प्रभारी संजीव कुशवाहा ने हादसे की आधिकारिक पुष्टि करते हुए बताया कि बस अचानक तेज रफ्तार में होने के कारण बेकाबू हुई और डिवाइडर से रगड़ खाते हुए पलट गई। हालांकि, हादसे का असली कारण (तकनीकी खराबी, टायर बस्ट या चालक को झपकी आना) अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो पाया है।
पुलिस ने सभी छह शवों को अपने विधिक कब्जे में लेकर पंचनामा तैयार करने के बाद पोस्टमार्टम (अंत्यपरीक्षण) के लिए भेज दिया है और बिहार के सीवान जिला प्रशासन को मृतकों के विधिक शिनाख्त की आधिकारिक सूचना प्रेषित कर दी है।
विदित हो कि लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे पर वाहनों की बेलगाम तेज रफ्तार और लंबी दूरी के सफर के कारण चालकों को नींद आने (स्लीप एपेनिया) की वजह से ऐसे भयावह हादसे अक्सर होते रहते हैं। फिलहाल, उत्तर प्रदेश परिवहन विभाग और पुलिस प्रशासन ने बस चालक की कड़क लापरवाही या वाहन में आई किसी बड़ी तकनीकी विफलता की विधिक जांच शुरू कर रिपोर्ट तैयार करने के कड़े निर्देश दिए हैं। इस भीषण हादसे के बाद मृतकों के परिवारों में कोहराम मच गया है और घायलों के रोते-बिलखते परिजन अस्पतालों में पहुंच रहे हैं।




















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