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वार्ड नंबर-4 में कीचड़युक्त सड़क से बढ़ी परेशानी, पाइपलाइन बिछाने के नाम पर सड़क तोड़े जाने से लोग नाराज

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*वार्ड नंबर-4 में कीचड़युक्त सड़क से बढ़ी परेशानी, पाइपलाइन बिछाने के नाम पर सड़क तोड़े जाने से लोग नाराज*

लोहरदगा। नगर क्षेत्र के वार्ड नंबर-4 में पेयजलापूर्ति के लिए पाइपलाइन बिछाने का कार्य लोगों के लिए परेशानी का सबब बन गया है। पक्की सड़क को बीच से तोड़कर पाइपलाइन बिछाए जाने के बाद सड़क की स्थिति बदहाल हो गई है। बारिश के कारण सड़क पर कीचड़ जमा हो गया है, जिससे छात्र-छात्राओं सहित स्थानीय लोगों का पैदल चलना भी मुश्किल हो गया है। कई जगहों पर वाहनों का आवागमन पूरी तरह प्रभावित है।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि निर्माण कार्य के दौरान निर्धारित नियमों और गाइडलाइन का पालन होता नजर नहीं आ रहा है। लोगों के अनुसार, मौके पर न तो विभागीय इंजीनियर नियमित रूप से मौजूद रहते हैं और न ही नगर पालिका के कर्मचारी या जनप्रतिनिधि। उनका कहना है कि इतना बड़ा कार्य एक मुंशी के भरोसे संचालित किया जा रहा है। सड़क तोड़ने के बाद उसकी मरम्मत अथवा आवागमन सुचारू करने के लिए पर्याप्त व्यवस्था भी नहीं की गई है।

 

स्थानीय लोगों का कहना है कि अच्छी-खासी पक्की सड़कों को तोड़कर उन्हें पूरी तरह बर्बाद किया जा रहा है। बरसात के मौसम में सड़क की स्थिति और खराब हो गई है। लोगों का आरोप है कि सड़क तोड़ने के बाद कम से कम डस्ट या अन्य सामग्री डालकर आवागमन योग्य बनाया जा सकता था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। परिणामस्वरूप पूरे वार्ड में कीचड़ और गड्ढों के कारण लोगों को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है।

 

बताया गया कि शहरी क्षेत्र में पेयजलापूर्ति से संबंधित पाइपलाइन बिछाने का कार्य जुटको (JUTCO) कंपनी को मिला है। स्थानीय लोगों के अनुसार कंपनी के इंजीनियर नीरज कुमार के नियमित रूप से फील्ड में मौजूद नहीं रहने के कारण कार्य की निगरानी को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित कंपनी एवं अधिकारियों का पक्ष सामने नहीं आ सका है।

सड़क की बदहाली का असर केवल आम लोगों पर ही नहीं, बल्कि नगर पालिका की कचरा प्रबंधन व्यवस्था पर भी पड़ा है। स्थानीय लोगों के अनुसार, कचरा उठाने वाली गाड़ी सड़क के गड्ढे में फंस जाने के बाद कई दिनों से वार्ड में कचरा उठाने नहीं पहुंच पा रही है। वहीं, घरों तक गैस सिलेंडर और पेयजल पहुंचाना भी मुश्किल हो गया है।

 

लोगों का कहना है कि सड़क तोड़े जाने के बाद कार्य पूरा होने तक वैकल्पिक व्यवस्था अथवा सड़क को चलने लायक बनाने की जिम्मेदारी संबंधित एजेंसी की होनी चाहिए। इस संबंध में स्थानीय लोगों ने जुटको कंपनी के ठेकेदार और नगर प्रशासन से कई बार शिकायत कर समस्या का समाधान कराने की मांग की, लेकिन अब तक स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ है।

स्थानीय लोगों में इस बात को लेकर भी नाराजगी है कि जनप्रतिनिधियों और नगर प्रशासन की ओर से उनकी समस्या पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया जा रहा है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते सड़क की मरम्मत और आवागमन की व्यवस्था नहीं की गई तो बरसात के दिनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है।

स्थानीय नागरिकों ने नगर प्रशासन से मांग की है कि पाइपलाइन बिछाने के कार्य की गुणवत्ता एवं नियमों की जांच कराई जाए, मौके पर विभागीय अधिकारियों की नियमित निगरानी सुनिश्चित की जाए तथा तोड़ी गई सड़कों को तत्काल आवागमन योग्य बनाया जाए, ताकि वार्डवासियों को राहत मिल सके।

 

*बरसात में काम नहीं करने की लगातार मांग, फिर भी नहीं रुका सड़क तोड़ने का काम*

 

स्थानीय लोगों का कहना है कि बरसात के मौसम में सड़क तोड़कर पाइपलाइन बिछाने का कार्य नहीं करने की लगातार गुहार लगाई जा रही है। लोगों ने संबंधित ठेकेदार, कंपनी के अधिकारियों और नगर प्रशासन से कई बार आग्रह किया कि बारिश के मौसम में कार्य रोककर पहले से बनी सड़कों को बर्बाद होने से बचाया जाए। बावजूद इसके लोगों की शिकायतों और परेशानियों को नजरअंदाज करते हुए कार्य जारी रखा गया।

 

लोगों का आरोप है कि जब बरसात में सड़क की हालत पहले से ही खराब है, ऐसे समय में सड़क को बीच से काटकर छोड़ देना आम जनता की परेशानी बढ़ाने के अलावा कुछ नहीं है। न तो सड़क को तत्काल समतल किया जा रहा है और न ही कीचड़ से राहत दिलाने के लिए पर्याप्त मात्रा में डस्ट या अन्य सामग्री डाली जा रही है। इसका खामियाजा स्कूली छात्र-छात्राओं, बुजुर्गों, मरीजों, दुकानदारों और आम राहगीरों को भुगतना पड़ रहा है।

 

स्थानीय लोगों में इस बात को लेकर खासा आक्रोश है कि जनता की बार-बार की गुहार आखिर किसके कानों तक नहीं पहुंच रही है? क्या किसी बड़ी दुर्घटना या गंभीर घटना के बाद ही नगर प्रशासन और संबंधित एजेंसी की नींद खुलेगी? लोगों का कहना है कि विकास के नाम पर सड़क बनाना जरूरी है, लेकिन विकास कार्य की आड़ में जनता के लिए बनी अच्छी सड़कों को बिना समुचित वैकल्पिक व्यवस्था के तोड़ देना किसी भी स्थिति में उचित नहीं है।

 

लोगों ने स्पष्ट कहा कि यदि संबंधित एजेंसी और नगर प्रशासन को पाइपलाइन बिछाने का कार्य करना ही है तो कार्य के साथ सड़क को तत्काल दुरुस्त करने की जिम्मेदारी भी तय की जाए। जनता को परेशानी में छोड़कर केवल पाइपलाइन बिछाने का काम पूरा कर देना विकास नहीं, बल्कि व्यवस्था की लापरवाही का उदाहरण है।

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