बायोमैट्रिक के कथित दुरुपयोग से राशि निकासी का आरोप, विरोध करने पर मारपीट और धमकी देने की शिकायत; पुलिस ने दर्ज की प्राथमिकी
राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी अबुआ आवास योजना में कथित अनियमितता का मामला जामताड़ा जिले में सामने आया है। एक लाभुक ने योजना की राशि बायोमैट्रिक प्रणाली के कथित दुरुपयोग से निकालने, विरोध करने पर मारपीट करने तथा जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगाते हुए पंचायत की मुखिया समेत पांच लोगों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कराई है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
बिन्दापाथर थाना क्षेत्र के जीवनपुर गांव निवासी बुधन मिर्धा 38 की शिकायत पर बिन्दापाथर थाना कांड संख्या 43/2026 दर्ज किया गया है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि अबुआ आवास योजना के तहत मिलने वाली राशि उनकी जानकारी और सहमति के बिना कथित रूप से बायोमैट्रिक प्रणाली का उपयोग कर निकाल ली गई।
पीड़ित का आरोप है कि जब उन्होंने योजना की राशि के संबंध में जानकारी मांगी और इसका विरोध किया, तो उनके साथ कथित रूप से मारपीट की गई। साथ ही जान से मारने की धमकी देकर घर से भगा देने का भी आरोप लगाया गया है।
प्राथमिकी में चकनयापाड़ा पंचायत की मुखिया दुखी मुर्मू, कथित बिचौलिया बनमाली मिर्धा, शंखचुड़ मंडल, गया प्रसाद मिर्धा और विश्वनाथ मिर्धा को नामजद आरोपी बनाया गया है। इसके अलावा अन्य अज्ञात लोगों को भी अभियुक्त बनाया गया है।
पुलिस के अनुसार शिकायत में लगाए गए सभी आरोपों की निष्पक्ष जांच की जाएगी। जांच के दौरान उपलब्ध दस्तावेजों, तकनीकी साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। पुलिस यह भी पता लगा रही है कि योजना की राशि किस खाते में स्थानांतरित हुई, निकासी की प्रक्रिया कैसे पूरी हुई और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही।
मामले की जांच पुलिस अवर निरीक्षक अनुज कुमार को सौंपी गई है। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि फिलहाल किसी भी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई है। पर्याप्त साक्ष्य मिलने और जांच पूरी होने के बाद विधिसम्मत कार्रवाई की जाएगी।
अबुआ आवास योजना आर्थिक रूप से कमजोर और जरूरतमंद परिवारों को आवास उपलब्ध कराने के उद्देश्य से संचालित की जा रही है। ऐसे में योजना की राशि में कथित अनियमितता के आरोपों को गंभीरता से लेते हुए पुलिस पूरे मामले की गहन जांच कर रही है। पुलिस का कहना है कि जांच में यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो दोषियों के विरुद्ध कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी, जबकि आरोप निराधार पाए जाने पर उसी अनुरूप जांच रिपोर्ट प्रस्तुत की जाएगी।


















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