अस्पताल में डॉक्टरों ने घोषित किया था मृत, फिर भी चमत्कार की आस में तांत्रिक को बुलाकर रातभर गड्ढे में रखा शव; वायरल हुआ वीडियो
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हजारीबाग (चौपारण)। रविवार की रात चौपारण प्रखंड के डेबो पंचायत स्थित रैंबो करमा गांव में किसी के घर चूल्हा नहीं जला। सैकड़ों आंखें बस एक ही घर की ओर टकटकी लगाए लगी थीं। कोई मौन प्रार्थना कर रहा था, कोई चमत्कार की आस लगाए बैठा था, तो कोई डबडबाई आंखों से कह रहा था— “धैर्य रखो, अभी बच्चे की सांस लौट आएगी।” लेकिन सोमवार की सुबह होते-होते उम्मीद पूरी तरह हार गई और एक मासूम जिंदगी हमेशा-हमेशा के लिए बुझ गई।
यह सिर्फ एक किशोर की मौत की खबर भर नहीं है, बल्कि यह उस ग्रामीण बेबसी और सामाजिक संघर्ष की जीती-जागती कहानी है, जहां संकट के समय एक लाचार परिवार आधुनिक विज्ञान, पारंपरिक झाड़-फूंक, खोखले भरोसे और घोर अंधविश्वास के बीच लगातार झूलता रहा।
शनिवार तड़के नींद में सांप ने डंसा, सुबह तक बढ़ता गया जहर
प्राप्त जानकारी के अनुसार, रैंबो करमा गांव निवासी अरविंद रविदास का 14 वर्षीय पुत्र ऋषि कुमार दास शनिवार तड़के करीब 3:30 बजे अपनी मां के साथ घर के भीतर जमीन पर सो रहा था। इसी दौरान रात की गहरी नींद अचानक एक अनदेखे और खौफनाक खतरे में बदल गई। किसी जहरीले सांप (करैत) ने सोते समय ऋषि को डंस लिया।
शुरुआत में परिवार और बच्चे को स्थिति की गंभीरता का बिल्कुल भी अंदाजा नहीं हुआ। कुछ देर बाद जब घर में रेंगता हुआ सांप दिखाई दिया, तो परिजनों ने उसे मार डाला। सांप को मरते देख परिवार के होश उड़ गए और उन्हें एहसास हुआ कि ऋषि की जान खतरे में है।
अस्पताल से बरही और फिर तांत्रिक का ‘गोबर-गोमूत्र’ वाला खौफनाक अंधविश्वास
ग्रामीणों के अनुसार, सांप काटने के बाद पहले स्थानीय स्तर पर कुछ पारंपरिक और घरेलू उपाय किए गए, जिससे कीमती समय बर्बाद हो गया। धीरे-धीरे ऋषि के शरीर में विष का असर बढ़ने लगा और उसकी हालत बिगड़ती गई। रविवार की सुबह करीब आठ बजे परिजन उसे लेकर आनन-फानन में कोडरमा सदर अस्पताल पहुंचे, जहां जांच के बाद चिकित्सकों ने उसे ‘मृत’ घोषित कर दिया।
लेकिन ममता और पितृत्व का दिल इस कड़वी सच्चाई को स्वीकार करने को तैयार नहीं था। हार मानने के बजाय परिजन उसे लेकर तुरंत बरही के एक निजी अस्पताल पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने भी हाथ खड़े कर दिए। बरही से निराश होकर लौटते वक्त लराही गांव में किसी राहगीर ने उन्हें कोडरमा के एक तथाकथित ‘चमत्कारी तांत्रिक’ (बाबा) की जानकारी दे दी।
दावा किया गया कि वह बाबा गोमूत्र, गोबर, जड़ी-बूटी और तंत्र-मंत्र की शक्ति से मरे हुए इंसान को भी जिंदा कर सकता है। डूबते को तिनके का सहारा ढूंढ रहे परिजनों ने विज्ञान को दरकिनार कर उस तांत्रिक को तुरंत गांव बुला लिया।
ऋषि कुमार सर्पदंश कांड: घटनाक्रम का सफर
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│ पीड़ित किशोर │ ऋषि कुमार दास (अरविंद रविदास का पुत्र) │
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│ मुख्य घटनास्थल │ ग्राम: रैंबो करमा, पंचायत: डेबो, चौपारण │
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│ चिकित्सा प्रयास │ कोडरमा सदर अस्पताल एवं बरही अस्पताल (मृत घोषित)│
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│ तांत्रिक का अमानवीय कृत्य │ गोबर-गोमूत्र के गड्ढे में सिर छोड़कर पूरे शरीर को गाड़ा│
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│ दुखद परिणाम │ अंधविश्वास के फेर में आखिरकार टूटा दम │
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रातभर गड्ढे में दफन रहा किशोर का शरीर, सुबह टूटी उम्मीदें; सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल
ग्रामीणों ने बताया कि तांत्रिक ने इलाज के नाम पर कोई शुल्क नहीं लिया और अपनी रूढ़िवादी मान्यता के अनुसार अमानवीय प्रयास शुरू किया। घर के पास जमीन में एक गहरा गड्ढा खोदा गया। उसमें भारी मात्रा में गोबर और गोमूत्र डाला गया। इसके बाद मृत किशोर के शरीर को उस गड्ढे में खड़ा कर पूरे गड्ढे को पानी से भर दिया गया। केवल बच्चे का सिर जमीन से बाहर खुला रखा गया। इसके बाद रविवार की दोपहर से लेकर सोमवार की तड़के सुबह तक तांत्रिक ऊंचे स्वर में झाड़-फूंक और तंत्र-मंत्र करता रहा।
इस खौफनाक मंजर को देखने के लिए समूचे गांव और आसपास के सैकड़ों लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा। कोई मंत्र सुन रहा था, कोई दुआएं मांग रहा था, तो कोई इस आस में खड़ा था कि अभी बच्चे की आंखें खुलेंगी। सोमवार की सुबह जब शरीर पूरी तरह ठंडा पड़ गया, तब जाकर परिजनों ने भारी मन से अंधविश्वास की उम्मीद को त्यागा और रोते-बिलखते हुए अपने लाडले को अंतिम विदाई दी। इस पूरे घटनाक्रम का रोंगटे खड़े कर देने वाला वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
‘एंटी स्नेक वेनम’ ही है एकमात्र इलाज, झाड़-फूंक में न गंवाएं कीमती समय
यह दुखद घटना केवल अंधविश्वास पर बहस करने का विषय नहीं है, बल्कि यह उस कड़वी ग्रामीण वास्तविकता का आईना है, जहां जागरूकता के अभाव में लोग जिंदगी और मौत के बीच का अंतर भूल जाते हैं। चिकित्सा विशेषज्ञों और डॉक्टरों का कहना है कि सांप के डंसने के मामलों में एक-एक मिनट और ‘गोल्डन ऑवर’ कीमती होता है। सांप काटने पर झाड़-फूंक या तांत्रिकों के चक्कर में पड़ने के बजाय मरीज को तुरंत नजदीकी सरकारी अस्पताल ले जाना चाहिए, जहां एंटी स्नेक वेनम (Anti Snake Venom) का टीका देकर मरीज की जान बचाई जा सकती है। इलाज और अंधविश्वास के इंतजार के बीच का यही फासला ऋषि के लिए मौत का कारण बन गया।
























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