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पंचायत भवन, स्कूल और मंदिर के निकट नियमों को ताक पर रख चल रहा खनन, करोड़ों की रॉयल्टी जालसाजी की जांच की मांग

On: June 19, 2026 9:59 PM
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माइंस व क्रेशरों के खिलाफ सामाजिक कार्यकर्ता श्रीराम पाण्डेय ने खोला मोर्चा! मुख्य सचिव से लेकर एसीबी तक को पत्र भेज उच्चस्तरीय जांच की गुहार

न्यूज स्केल लाइव

चतरा (हंटरगंज)। चतरा जिले के हंटरगंज प्रखंड अंतर्गत डुमरी कला पंचायत में वर्षों से संचालित स्टोन क्रेशरों और पत्थर खदानों (माइंस) के कारण स्थानीय ग्रामीण नारकीय जीवन जीने को विवश हैं। नियमों को ताक पर रखकर आबादी के बेहद करीब किए जा रहे इस खनन के खिलाफ क्षेत्र के जाने-माने सामाजिक कार्यकर्ता श्रीराम पाण्डेय ने आर-पार की लड़ाई का बिगुल फूंक दिया है।

श्री पाण्डेय ने झारखंड सरकार के मुख्य सचिव सहित मुख्यमंत्री, उपायुक्त चतरा, पुलिस अधीक्षक चतरा, खान एवं भूतत्व विभाग, भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB), सतर्कता विभाग तथा जिला खनन पदाधिकारी चतरा को एक विस्तृत व साक्ष्यों से लैस आवेदन भेजकर पूरे सिंडिकेट की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष तकनीकी जांच कराने की जोरदार मांग की है।

RTI और दर्जनों शिकायतों के बाद भी प्रशासन मौन, बढ़ता गया संकट

श्रीराम पाण्डेय ने अपने आवेदन में तीखा आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा है कि उनके द्वारा पिछले कई वर्षों से लगातार विभिन्न विभागों एवं प्रशासनिक अधिकारियों को लिखित आवेदन, शिकायत पत्र, ईमेल तथा सूचना का अधिकार अधिनियम (RTI) के अंतर्गत आवेदन भेजे जाते रहे हैं। परंतु, जिला खनन कार्यालय और प्रखंड प्रशासन द्वारा या तो कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई अथवा केवल औपचारिक व लीपापोती वाला जवाब देकर मामले को ठंडे बस्ते में डालने का प्रयास किया गया। इसके परिणामस्वरूप खनन माफियाओं के हौसले बुलंद हैं और ग्रामीणों की समस्याएं कम होने के बजाय लगातार विकराल होती चली गई हैं।

भारी ब्लास्टिंग से कांप रहे मकान, सामाजिक कार्यकर्ता का घर हुआ क्षतिग्रस्त

ग्रामीणों के अनुसार, डुमरी कला पंचायत के आस-पास संचालित खनन क्षेत्रों में रोजाना नियमों के विरुद्ध जाकर की जाने वाली हैवी (भारी) ब्लास्टिंग के कारण दर्जनों गरीब ग्रामीणों के मकानों में गहरी दरारें आ चुकी हैं।

श्रीराम पाण्डेय ने विशेष रूप से उल्लेख किया है कि: “उनका लगभग 30 से 35 वर्ष पुराना पक्का मकान इस बेतरतीब ब्लास्टिंग के कारण गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो चुका है। घर की दीवारों एवं छतों में बड़ी-बड़ी खतरनाक दरारें पड़ गई हैं। प्रत्येक ब्लास्टिंग के समय पूरा मकान भूकंप की तरह कांप उठता है, जिससे परिवार के मासूम बच्चे और सदस्य लगातार भय, मानसिक तनाव और मौत के साए में जीवन व्यतीत करने को विवश हैं।”

धूल-धुएं के गुबार से घुट रहा दम, 13 वर्षीय भतीजी और बुजुर्ग पिता बीमार

खनन एवं स्टोन क्रेशर गतिविधियों से निकलने वाली धूल, जहरीले धुएं एवं पीएम-10 कणों के प्रदूषण ने पूरे क्षेत्र के पर्यावरण को तबाह कर दिया है। धूल के महीन कण ग्रामीणों के घरों, पीने के पानी के स्रोतों और उपजाऊ खेतों तक पहुंच रहे हैं, जिससे फसलें बर्बाद हो रही हैं।

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के नियमों की सरेआम धज्जियां उड़ाए जाने के कारण क्षेत्र में सांस संबंधी गंभीर बीमारियों की शिकायतें तेजी से बढ़ी हैं। श्री पाण्डेय ने आवेदन में बताया कि उनकी लगभग 13 वर्षीय भतीजी शुभ्रा पाण्डेय को हवा में फैले इस डस्ट के कारण सांस लेने में गंभीर कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है, जिसके चलते कई बार उसका ऑक्सीजन स्तर असामान्य रूप से कम हो जाता है। इसके अलावा, उनके बुजुर्ग पिता रामप्रवेश पाण्डेय भी लगातार गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे हैं।

नियमों का सरेआम उल्लंघन: आबादी और स्कूल के बिल्कुल करीब माइनिंग

शिकायतकर्ता ने दूरी संबंधी वैधानिक नियमों के उल्लंघन को लेकर जिला प्रशासन के समक्ष गंभीर तकनीकी सवाल उठाए हैं:

  • सचिवालय से दूरी: डुमरी कला पंचायत भवन खनन क्षेत्र से महज 100 से 150 मीटर की दूरी पर स्थित है।

  • विद्यालय से दूरी: स्थानीय स्कूल महज 100 से 200 मीटर की परिधि में मौजूद है, जहां प्रतिदिन सैकड़ों मासूम बच्चे आते-जाते हैं।

  • बड़ा सवाल: ग्रामीणों ने सवाल उठाया है कि यदि डीजीएमएस (DGMS) और खनन विभाग के सुरक्षा मानकों एवं दूरी संबंधी नियमों का पालन किया जा रहा है, तो आबादी क्षेत्र, मंदिर और स्कूल के इतने निकट ब्लास्टिंग की अनुमति कैसे और किसने दी?

जल निकासी मार्ग बंद होने से बाढ़ का खतरा, नो-एंट्री में भी दौड़ रहे हाइवा

आवेदन के अनुसार, गांव के देवी मंडप के समीप स्थित पारंपरिक आहर (जलस्रोत) के ओवरफ्लो जल निकासी मार्ग को खनन संचालकों द्वारा मलबे से बंद कर दिया गया है। इसके परिणामस्वरूप वर्षा ऋतु में पूरे गांव में जलजमाव की गंभीर स्थिति उत्पन्न हो जाती है, जिससे किसानों की कृषि भूमि जलमग्न हो जाती है और बाढ़ का पानी लोगों के घरों तक पहुंच जाता है।

इसके अलावा, हंटरगंज क्षेत्र में सड़क दुर्घटनाओं पर रोक लगाने के लिए प्रशासन द्वारा सुबह 07 बजे से रात्रि 08 बजे तक भारी वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध (नो-एंट्री) लगाया गया था। इसके बावजूद, लोहसिंगना क्षेत्र से पत्थर लदे ओवरलोडेड हाइवा एवं भारी वाहन पुलिस की नाक के नीचे नियमित रूप से नो-एंट्री का उल्लंघन कर दौड़ रहे हैं। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि भविष्य में कोई बड़ी सड़क दुर्घटना होती है, तो इसकी सीधी जिम्मेदारी संबंधित अधिकारियों पर होगी।

₹17.29 करोड़ का माइनिंग रॉयल्टी चालान घोटाला भी जांच के दायरे में

इस पूरे प्रकरण में सबसे सनसनीखेज मोड़ जिला खनन पदाधिकारी (DMO), चतरा से जुड़ा कथित ₹17.29 करोड़ की माइनिंग रॉयल्टी चालान जालसाजी का मामला है। विभिन्न मीडिया रिपोर्टों में प्रकाशित समाचारों के आलोक में, शिकायतकर्ता ने मांग की है कि यदि संबंधित चालान वास्तव में फर्जी पाए गए हैं, तो इसकी गहन जांच हो कि वर्षों तक यह अवैध खेल कैसे चलता रहा?

उन्होंने अंजनी माइन्स, डुमरी एवं रन्नो मौजा क्षेत्र में पर्यावरणीय नियमों के उल्लंघन की जांच की मांग करते हुए कहा कि यदि 500 मीटर की परिधि में कुल खनन क्षेत्र 12 एकड़ से अधिक है, तो नियमों के तहत अनिवार्य जनसुनवाई (Public Hearing) आयोजित की गई थी अथवा नहीं? यदि नहीं हुई, तो एनवायर्नमेंटल क्लीयरेंस (EC) की वैधता की निष्पक्ष जांच कराई जाए।

स्वतंत्र एजेंसी (ACB या CID) से जांच कराने और मुआवजे की मांग

ग्रामीणों एवं सामाजिक कार्यकर्ता श्रीराम पाण्डेय ने मुख्य सचिव से निम्नलिखित मुख्य मांगें की हैं:

  1. स्वतंत्र जांच: डुमरी कला पंचायत में संचालित सभी माइंस एवं स्टोन क्रेशरों की वैधानिकता और सुरक्षा मानकों की स्वतंत्र एजेंसी (ACB या CID) से जांच कराई जाए।

  2. क्षति का आकलन: ब्लास्टिंग से प्रभावित मकानों का तकनीकी सर्वे कराकर वास्तविक क्षति का आकलन किया जाए और पीड़ितों को उचित मुआवजा दिया जाए।

  3. खदानों को शिफ्ट करना: स्कूल, आबादी और पंचायत भवन के निकट संचालित खनन गतिविधियों को तत्काल बंद कराया जाए।

  4. अधिकारियों पर कार्रवाई: ₹17.29 करोड़ के रॉयल्टी जालसाजी प्रकरण में पिछले दो वर्षों के भुगतान व प्रमाणन अभिलेखों की समीक्षा कर दोषी अधिकारियों व क्रेशर संचालकों को जेल भेजा जाए।

अंत में श्रीराम पाण्डेय ने स्पष्ट किया है कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष को लक्ष्य बनाना नहीं, बल्कि जनहित, पारदर्शिता, पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीणों के जीवन व स्वास्थ्य की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। उन्होंने सरकार से शिकायतकर्ताओं और गवाहों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का भी आग्रह किया है।

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