टीसीबी योजना का बिल पास करने के नाम पर लाभुक से मांगी थी रिश्वत; ₹2,000 पहले ही डकार चुका था घूसखोर जेई; केमिकल वाले पानी में हाथ धुलवाते ही लाल हुआ रंग
न्यूज स्केल लाइव
देवघर: झारखंड में भ्रष्ट लोक सेवकों और घूसखोरों के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) का महा-अभियान लगातार जारी है। इसी कड़ी में बुधवार को एसीबी दुमका की विशेष टीम ने देवघर जिले के करौं प्रखंड कार्यालय में एक बड़ी और ऐतिहासिक दंडात्मक कार्रवाई को अंजाम दिया है। भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत जाल बिछाते हुए एसीबी की टीम ने करौं प्रखंड में पदस्थापित मनरेगा के जूनियर इंजीनियर (JE) संतोष कुमार को ₹5,000 की रिश्वत लेते हुए उनके सरकारी आवास (क्वार्टर) से रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया है।
प्रखंड मुख्यालय परिसर के भीतर दिनदहाड़े हुई इस बड़ी विधिक कार्रवाई के बाद से करौं अंचल के तमाम अधिकारी, बिचौलियों और विकास योजनाओं में कमीशनखोरी करने वाले कर्मियों के बीच हड़कंप और भारी दहशत का माहौल व्याप्त हो गया है।
लकरछरा गांव के लाभुक की टीसीबी योजना का बिल पास करने के नाम पर मांगा था घूस
आधिकारिक तौर पर प्राप्त विस्तृत जानकारी के अनुसार करौं प्रखंड की डिंडाकोली पंचायत अंतर्गत लकरछरा गांव निवासी एक सीधे-साधे ग्रामीण लाभुक भीम राणा के नाम पर सरकार की महत्वाकांक्षी टीसीबी (ट्रेंच कम बंडिंग) योजना स्वीकृत हुई थी। लाभुक ने धरातल पर पूरी ईमानदारी से कार्य को पूर्ण कर लिया था, लेकिन इस कार्य का अंतिम सरकारी विपत्र (कच्चा-पक्का बिल) बनाने और फाइल को आगे बढ़ाने के एवज में मनरेगा जेई संतोष कुमार लाभुक से लगातार ₹7,000 की मोटी घूस मांग रहा था।
भुक्तभोगी लाभुक भीम राणा ने बताया कि काम बंद होने और अफसरशाही के डर से उसने ₹2,000 की रकम पहले ही जेई को एडवांस के तौर पर दे दी थी। इसके बावजूद घूसखोर जेई का पेट नहीं भरा और वह शेष बचे ₹5,000 की अंतिम किस्त के लिए लगातार दबाव बना रहा था। गरीब लाभुक के पास पैसे का जुगाड़ न होने के कारण वह मानसिक रूप से बेहद परेशान हो चुका था।
पीड़ित ने दुमका एसीबी मुख्यालय में दर्ज कराई थी शिकायत, गुप्त सत्यापन में सच पाया गया मामला
भ्रष्ट व्यवस्था के आगे घुटने टेकने के बजाय पीड़ित लाभुक भीम राणा ने करीब दो सप्ताह पहले इस पूरे मामले की एक लिखित और साक्ष्य युक्त शिकायत सीधे दुमका स्थित एसीबी कार्यालय (भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो मुख्यालय) में दर्ज कराई। भ्रष्टाचार की इस संवेदनशील शिकायत को गंभीरता से लेते हुए एसीबी के वरीय पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर एक गुप्तचर टीम बनाकर मामले की धरातलीय और तकनीकी जांच (सत्यापन) कराई गई। विभागीय सत्यापन में जब जूनियर इंजीनियर द्वारा घूस मांगे जाने की बात अक्षरसः और पूरी तरह सही पाई गई, तब एसीबी ने आरोपी को रंगे हाथों दबोचने के लिए एक विशेष विंग का गठन किया।
सरकारी क्वार्टर में घुसकर एसीबी की 20 सदस्यीय टीम ने दबोचा, केमिकल वाले पानी ने खोला राज
इधर, बेखौफ हो चुके जेई संतोष कुमार ने बुधवार को लाभुक भीम राणा को घूस के बचे हुए पैसे लेकर अपने प्रखंड कार्यालय परिसर स्थित सरकारी क्वार्टर में ही बुला लिया। लाभुक ने इसकी त्वरित सूचना पहले से देवघर में मुस्तैद एसीबी की टीम को दी। सूचना मिलते ही एसीबी की 20 सदस्यीय भारी टीम सादे लिबास में आम ग्रामीणों और राहगीरों का रूप धरकर करौं प्रखंड मुख्यालय में दाखिल हो गई।
रणनीति के अनुसार, एसीबी की टीम ने लाभुक को फेनोल्फथैलिन केमिकल (विशेष पाउडर) लगे हुए ₹5,000 के नोट थमाए। जैसे ही लाभुक भीम राणा ने जेई के सरकारी क्वार्टर के भीतर जाकर संतोष कुमार को वह घूस की रकम थमाई, वैसे ही आस-पास घात लगाकर बैठी एसीबी की छापेमारी टीम ने कमरे के भीतर त्वरित घेराबंदी करते हुए कड़ा धावा बोला और कनीय अभियंता को ऑन-स्पॉट रंगे हाथों धर दबोचा।
गिरफ्तारी के तुरंत बाद जब एसीबी के अनुसंधान अधिकारियों ने जेई संतोष कुमार के दोनों हाथों को सोडियम कार्बोनेट के केमिकल युक्त पानी से धुलवाया, तो पारदर्शी पानी का रंग रासायनिक प्रतिक्रिया के कारण तुरंत गहरा लाल (गुलाबी) हो गया। यह विधिक रूप से अदालत में घूसखोरी प्रमाणित करने का सबसे पुख्ता और अकाट्य वैज्ञानिक प्रमाण है।
कस्टडी में लेकर दुमका रवाना हुई टीम, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत होगी जेल
सफल और ऐतिहासिक ट्रैप की कागजी प्रक्रिया पूरी करने के बाद एसीबी की टीम गिरफ्तार आरोपी जूनियर इंजीनियर संतोष कुमार को कड़े पहरे में अपने साथ लेकर सीधे दुमका मुख्यालय के लिए रवाना हो गई।
एसीबी ब्यूरो के आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि आरोपी सरकारी सेवक के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Anti-Corruption Act) की सुसंगत और गैर-जमानती धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। दुमका स्थित एसीबी कार्यालय में विशेष पूछताछ और विधिक लिखापढ़ी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद गुरुवार को आरोपी जूनियर इंजीनियर को दुमका में अवस्थित विशेष निगरानी अदालत (स्पेशल विजिलेंस कोर्ट) के समक्ष प्रस्तुत कर जेल भेजा जाएगा। करौं में हुई इस त्वरित कार्रवाई की चतरा और देवघर के प्रबुद्ध नागरिकों ने जमकर सराहना की है।





















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