ग्रामीणों ने बृंदा मंडप के पास लगाया टेंट; बड़की नदी और सिमरिया-टंडवा लाइफलाइन पुल के अस्तित्व पर संकट, आरटीआई से हुआ बिना स्वीकृति के काम का खुलासा
न्यूज स्केल लाइव
टंडवा (चतरा): टंडवा प्रखंड के कबरा पंचायत वासियों के पुरजोर विरोध के बावजूद एनटीपीसी चट्टीबारियातू परियोजना से शिवपुर साइडिंग तक कोल ट्रांसपोर्टिंग सड़क का निर्माण कराए जाने का चारों ओर तीखा विरोध शुरू हो गया है। जेएआरएल (JARL) नामक कंपनी द्वारा बिना किसी सरकारी अधिसूचना एवं वैधानिक स्वीकृति के किसानों की उपजाऊ जमीन और प्राकृतिक संसाधनों को रौंदते हुए कराए जा रहे सड़क निर्माण के खिलाफ ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा है।
प्रशासनिक चुप्पी से नाराज ग्रामीणों ने मंगलवार से बृंदा मंडप के समीप टेंट गाड़कर अनिश्चितकालीन शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन और बड़े जन आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है।
बड़की नदी और लाइफलाइन पुल के अस्तित्व पर मंडराया काल
चतरा उपायुक्त को सौंपे गए ज्ञापन में ग्रामीणों ने इस प्रस्तावित सड़क से होने वाले बड़े नुकसानों को रेखांकित किया है:
नदी और पर्यावरण को खतरा: यह विवादित सड़क सिमरिया-टंडवा मुख्य पथ में खधैया के बड़की नदी के समीप से गुजरती है। इससे नदी के अस्तित्व, स्थानीय पर्यावरण, कृषि भूमि तथा पशुधन पर गंभीर खतरा उत्पन्न हो जाएगा।
हादसों को न्योता: सिमरिया-टंडवा मुख्य मार्ग को जोड़ने वाले महत्वपूर्ण लाइफलाइन पुल के बिल्कुल निकट और तीव्र मोड़ (ब्लाइंड कर्व) वाले क्षेत्र में भारी कोयला वाहनों (हाइवा) का परिचालन भविष्य में बड़े और भीषण सड़क हादसों का कारण बनेगा। इससे पुल की सुरक्षा भी खतरे में है।
आरटीआई और अंचल की जांच में हुआ बड़ा खुलासा: सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा
योजना में हो रही गड़बड़ी का खुलासा तब हुआ जब ग्रामीणों ने सूचना के अधिकार (RTI) के तहत जानकारी मांगी। आरटीआई से प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार, इस सड़क निर्माण से जुड़ी कोई भी आधिकारिक सूचना या प्रशासनिक स्वीकृति टंडवा अंचल कार्यालय के पास उपलब्ध ही नहीं है।
अंचल की रिपोर्ट को भी ठेंगे पर रखा: ग्रामीणों के पूर्व के आवेदन पर चतरा उपायुक्त के निर्देश के बाद टंडवा अंचल ने मामले की जांच की थी। जांच में आधिकारिक तौर पर पाया गया था कि खाता संख्या 29, प्लॉट नंबर 333 एवं 329 गैरमजरूआ सरकारी भूमि है, जिस पर जेएआरएल कंपनी द्वारा निर्माण के लिए विभाग से किसी भी प्रकार की अनुमति प्राप्त नहीं की गई है। इसके बाद टंडवा थाना को पत्र प्रेषित कर कार्य को अविलंब बंद कराने का लिखित आदेश दिया गया था।
नेताओं और कंपनी के गठजोड़ का आरोप, आखिर किसके दबाव में चुप है पुलिस?
कबरा पंचायत के आंदोलनकारी ग्रामीणों ने सीधे तौर पर आरोप लगाया है कि यह पूरा अवैध निर्माण स्थानीय रसूखदार जनप्रतिनिधियों और कंपनी प्रबंधकों की कथित मिलीभगत व शह पर कराया जा रहा है। ग्रामीणों ने तीखा सवाल उठाया है कि जब टंडवा अंचल कार्यालय द्वारा काम रोकने का आदेश जारी किया जा चुका है, तो आखिर किसके राजनीतिक या प्रशासनिक दबाव में स्थानीय पुलिस-प्रशासनिक व्यवस्था चुप्पी साधे बैठी है और जेआरएल कंपनी धड़ल्ले से निर्माण गतिविधि जारी रखे हुए है?
‘नदी, जमीन और जनसुरक्षा बचाने की है आर-पार की लड़ाई’
धरना स्थल पर जुटे ग्रामीणों ने दो टूक शब्दों में कहा कि यह लड़ाई केवल सड़क निर्माण के खिलाफ नहीं, बल्कि क्षेत्र की नदी, पर्यावरण, किसानों की पुश्तैनी जमीन और आम जनता की जनसुरक्षा को बचाने की आर-पार की लड़ाई है।
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से पुरजोर मांग की है कि:
जब तक सरकार द्वारा इस सड़क को लेकर विधिवत अधिसूचना जारी नहीं की जाती और ग्रामसभा की वैधानिक सहमति प्राप्त नहीं होती, तब तक निर्माण कार्य को तत्काल प्रभाव से बंद कराया जाए।
पूरे मामले की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच कराकर नियमों की धज्जियां उड़ाने वाले कंपनी के अधिकारियों और दोषी कर्मियों के विरुद्ध सुसंगत धाराओं के तहत कानूनी कार्रवाई की जाए।


















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