एसपी के निर्देश पर एसडीपीओ की टीम ने 1 सप्ताह के भीतर उठाया पर्दा; हत्या के बाद घर में ताला बंद कर भागा था आरोपी पिता
गढ़वा | न्यूज स्केल लाइव
झारखंड के गढ़वा जिले से एक ऐसी विदारक, रोंगटे खड़े कर देने वाली और सगे रिश्तों को कड़ाई से कलंकित करने वाली ऑनर किलिंग (पारिवारिक रंजिश में हत्या) की वारदात सामने आई है, जिसने पूरे राज्य के सामाजिक और विधिक ढांचे को झकझोर कर रख दिया है। केतार थाना क्षेत्र के परती कुशवानी गांव में एक 17 वर्षीय नाबालिग किशोरी की संदिग्ध मौत के मामले का पुलिस प्रशासन ने पूरी तरह से सनसनीखेज विधिक पर्दाफाश कर दिया है।
पुलिस की गहन और वैज्ञानिक रडार में यह साफ हो गया है कि मृतका की हत्या किसी बाहरी अपराधी ने नहीं, बल्कि उसके सगे कलयुगी पिता ने ही की थी। आरोपी पिता ने अपनी ही लाडली की सिर्फ इसलिए बेरहमी से जान ले ली क्योंकि वह पिता की मर्जी से राजस्थान में तय की गई जबरन शादी के लिए तैयार नहीं थी।
बंद कमरे से आ रही थी तेज दुर्गंध; जमीन पर चित मिला था आकृति का शव
इस जघन्य हत्याकांड का विधिक सिंडिकेट और घटनाक्रम बेहद खौफनाक रहा है। गत 19 मई को केतार थाना पुलिस को ग्रामीणों के माध्यम से सूचना मिली थी कि परती कुशवानी गांव स्थित निर्मल सिंह के पक्के मकान से बेहद कड़क और तेज दुर्गंध आ रही है। सूचना मिलते ही स्थानीय थाना पुलिस वरीय अधिकारियों की मौजूदगी में घटनास्थल पर पहुंची।
घर के मुख्य दरवाजे पर बाहर से कड़ा ताला लटका हुआ था। पुलिस ने मृतका के सगे भाई अविनाश कुमार सिंह को मौके पर बुलाकर उसकी उपस्थिति में ताला खुलवाया। जैसे ही पुलिस टीम कमरे के भीतर दाखिल हुई, वहां का विजुअल देखकर अधिकारियों के होश उड़ गए। कमरे के फर्श पर निर्मल सिंह की 17 वर्षीया पुत्री आकृति कुमारी का शव चित अवस्था में सड़ रहा था। शव की स्थिति इतनी बदतर हो चुकी थी कि फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स ने हत्या दो से तीन दिन पूर्व किए जाने की विधिक आशंका जताई थी। घटना के बाद मृतका के भाई अविनाश के लिखित बयान पर केतार थाने में कांड संख्या 28/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 103(1) के अंतर्गत हत्या का कड़ा विधिक मामला दर्ज किया गया था।
जबरन राजस्थान में शादी कराने की जिद; सोते समय रस्सी से घोंट दिया गला
गढ़वा पुलिस की तकनीकी विंग और अनुसंधानकर्ताओं की कड़ाई से की गई जांच में हत्या की जो कड़वी पटकथा सामने आई, उसने इंसानियत को शर्मसार कर दिया:
शादी का दबाव: आरोपी पिता निर्मल सिंह राजस्थान में मजदूरी का काम करता था। उसने अपनी नाबालिग बेटी आकृति की शादी राजस्थान के ही एक अज्ञात युवक से उसकी मर्जी के खिलाफ तय कर दी थी।
बेटी का इनकार: 17 वर्षीय आकृति राजस्थान जाकर शादी करने के विधिक रूप से पूरी तरह खिलाफ थी। वह अपने पैतृक गांव और झारखंड में अपने परिवार के बीच ही रहना चाहती थी। इसी बात को लेकर घर के भीतर पिता और बेटी के बीच अक्सर कड़ा मानसिक विवाद होता रहता था।
साजिश और कत्ल: विवाद जब बर्दाश्त से बाहर हो गया, तो पिता ने अपनी ही बेटी को रास्ते से हटाने का खूनी ब्लूप्रिंट तैयार किया। घटना वाले दिन जब आकृति कमरे में गहरी नींद में सो रही थी, तभी कलयुगी पिता निर्मल सिंह ने एक कड़क रस्सी से उसका गला घोंटकर उसे मौत की नींद सुला दिया। विधिक साक्ष्य मिटाने और पुलिस को भटकाने के उद्देश्य से उसने कमरे का दरवाजा बंद किया, बाहर से ताला लगाया और सीधे राजस्थान भाग गया ताकि उस पर कोई शक न कर सके।
यूपी के रास्ते खरौंधी मार्ग से लौट रहा था हत्यारा; पुलिस ने खदेड़कर दबोचा
गढ़वा पुलिस अधीक्षक (SP) आशुतोष शेखर के कड़े निर्देश पर श्री बंशीधर नगर अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (SDPO) सत्येंद्र नारायण सिंह के कुशल नेतृत्व में एक विशेष छापामारी टास्क फोर्स का गठन किया गया था। तकनीकी अनुसंधान और मोबाइल सर्विलांस के जरिए पुलिस लगातार आरोपी के मूवमेंट को रडार पर रखे हुए थी। 27 मई को पुलिस को सटीक खुफिया इनपुट मिला कि आरोपी निर्मल सिंह राजस्थान से भागकर उत्तर प्रदेश के कोन इलाके से होकर खरौंधी मार्ग के रास्ते नगर ऊंटारी की ओर आ रहा है।
सूचना मिलते ही पुलिस टीम ने जाल बिछाया: बजरमरवा गांव के पास कड़ा चेकिंग अभियान: विशेष टीम ने बजरमरवा गांव के मुख्य मार्ग पर कड़ाई से विधिक घेराबंदी की। इसी दौरान पुलिस के सरकारी वाहन को सामने देखकर आरोपी निर्मल सिंह (51 वर्ष, पिता: स्वर्गीय हरीहर सिंह) जंगलों की तरफ भागने लगा। लेकिन मौके पर मुस्तैद जांबाज सशस्त्र जवानों ने पीछा कर उसे खदेड़कर दबोच लिया। पुलिसिया रिमांड में उसने अपना विधिक जुर्म पूरी तरह स्वीकार कर लिया है।
इस बेहद संवेदनशील और गंभीर अंधे हत्याकांड का महज 1 सप्ताह के भीतर मुकम्मल भंडाफोड़ करने पर चतरा और गढ़वा की जनता द्वारा पुलिस टीम की भारी सराहना की जा रही है। इस सफल विधिक ऐक्शन में एसडीपीओ सत्येंद्र नारायण सिंह, भवनाथपुर अंचल पुलिस निरीक्षक, केतार थाना प्रभारी अरुण कुमार रवानी, केस के मुख्य अनुसंधानकर्ता पुलिस अवर निरीक्षक आदित्य ठाकुर, बदल कुमार साहू और केतार थाने के सशस्त्र बल के जवान मुख्य रूप से शामिल रहे। फिलहाल आरोपी पिता को विधिक कस्टडी के तहत कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया गया है।






















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