स्थानीय पौधों को उखाड़कर लगाए जा रहे बाहरी प्रजाति के पौधे, ग्रामीणों में आक्रोश
गिद्धौर (चतरा)। गिद्धौर प्रखंड मुख्यालय अंतर्गत पंचायत क्षेत्र में वन विभाग के कार्यों को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि पर्यावरण संरक्षण के नाम पर उल्टा पर्यावरण को नुकसान पहुंचाया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि वन विभाग द्वारा ऐसे पौधे लगाए जा रहे हैं, जो यहां के स्थानीय जलवायु के अनुकूल नहीं हैं। इसके कारण न तो इन पौधों का सही विकास हो पा रहा है और न ही इसका लाभ स्थानीय लोगों या पशु-पक्षियों को मिल रहा है। स्थानीय लोगों के अनुसार क्षेत्र में पहले से मौजूद महुआ, करम, खैर, सिमर, नीम, करंज, बेल, पिरोंजी और पलाश जैसे पौधे यहां के वातावरण के अनुकूल हैं, लेकिन इन्हें नजरअंदाज कर बाहरी प्रजातियों जैसे शीशम और चौकोंधी बांस लगाए जा रहे हैं, जो यहां की जलवायु में टिक नहीं पाते। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि वन विभाग द्वारा बड़े-बड़े फलदार पेड़ जैसे बरगद और जामुन, जो फल देने की स्थिति में थे, उन्हें भी जेसीबी से उखाड़ दिया जा रहा है। इससे न केवल पर्यावरण को नुकसान हो रहा है, बल्कि ग्रामीणों को मिलने वाले संभावित लाभ और रोजगार के अवसर भी खत्म हो रहे हैं। ग्रामीणों ने कहा कि पौधारोपण कार्य में मशीनों का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे स्थानीय मजदूरों को रोजगार नहीं मिल पा रहा है। वहीं सड़क किनारे पेड़ों को हटाने के लिए जहां एनओसी की आवश्यकता होती है, वहीं वन विभाग बिना किसी अनुमति के पेड़ों को उखाड़ रहा है। इस संबंध में वन सिपाही रूपलाल यादव ने बताया कि ट्रेंच खोदने के दौरान मशीन के बीच आने वाले पौधों को हटाया जाता है। हालांकि ग्रामीणों का सवाल है कि जब अन्य जगहों पर पेड़ हटाने के लिए नियमों का पालन किया जाता है, तो यहां ऐसा क्यों नहीं किया जा रहा। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि इस मामले की जांच कर उचित कार्रवाई की जाए और स्थानीय जलवायु के अनुरूप पौधारोपण सुनिश्चित किया जाए, ताकि पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ ग्रामीणों को भी लाभ मिल सके।




















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