लोहरदगा। 16 जनवरी 2005 को आतंकवादियों द्वारा की गई हत्या को याद करते हुए काॅ. महेन्द्र सिंह का 21वां शहादत दिवस लोहरदगा जिला भाकपा(माले) लिब्रेशन द्वारा संकल्प दिवस के रूप में मनाया गया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जिला प्रभारी काॅ. महेश कुमार सिंह ने कहा कि आतंकवादियों की घृणित कोशिश के बावजूद कॉ. महेन्द्र सिंह की आवाज को दबाया नहीं जा सका। आज उनकी आवाज झारखंड–बिहार ही नहीं, बल्कि पूरे देश और संसद तक गूंज रही है।
उन्होंने कहा कि कॉ. महेन्द्र सिंह के जीवन का कोई भी दिन ऐसा नहीं था, जब उन्होंने गरीबों, मजदूरों, किसानों, छात्रों, नौजवानों और महिलाओं की बात न की हो। उनका एकमात्र कर्म और धर्म आम जनता की भलाई था। वे हमेशा खुद को जनता के बीच पाते थे और इसी कारण उनकी शहादत भी जनता के बीच हुई। उनका लक्ष्य जुल्म, शोषण-दोहन, अन्याय और अलोकतांत्रिक कार्यों का विरोध करते हुए संवैधानिक मूल्यों की रक्षा करना था।
कार्यक्रम की अध्यक्षता काॅ. विश्वनाथ गुप्ता ने की। उन्होंने कॉ. महेन्द्र सिंह के व्यक्तित्व और कृतित्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। इस अवसर पर काॅ. भरत गोप, बच्चू नारायण सिंह, गोपाल महतो, अगनू उरांव, किसुन दास, मोहन मिंज, फूलदेव कुजूर, बंधु पन्ना और मंजू उरांव सहित अन्य नेताओं ने भी अपने विचार रखे। इससे पूर्व कार्यक्रम की शुरुआत कॉ. महेन्द्र सिंह के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर और दो मिनट का मौन रखकर विनम्र श्रद्धांजलि देने के साथ की गई। वक्ताओं ने उनके संघर्षों को आगे बढ़ाने और जनता के अधिकारों की लड़ाई को मजबूत करने का संकल्प दोहराया।




















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