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झारखंड राज्य सूचना आयोग 5 वर्षों से ठप, 25 हजार अपीलें लंबित; हमर अधिकार मंच ने नेता प्रतिपक्ष को सौंपा ज्ञापन

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झारखंड राज्य सूचना आयोग 5 वर्षों से ठप, 25 हजार अपीलें लंबित; हमर अधिकार मंच ने नेता प्रतिपक्ष को सौंपा ज्ञापन

गैर-नौकरशाहों की नियुक्ति की मांग: पूर्व प्रशासनिक अधिकारियों के स्थान पर समाजसेवियों और विशेषज्ञों को जगह देने की वकालत

 

लोहरदगा: झारखंड राज्य सूचना आयोग को पुनर्जीवित करने और इसमें गैर-नौकरशाहों की नियुक्ति सुनिश्चित करने की मांग अब तेज हो गई है। ‘हमर अधिकार मंच’ की प्रदेश कमिटी ने इस संबंध में माननीय नेता प्रतिपक्ष को एक हस्ताक्षरयुक्त आवेदन सौंपकर हस्तक्षेप की मांग की है। मंच ने स्पष्ट किया है कि आयोग की निष्क्रियता से आम नागरिकों का संवैधानिक अधिकार छीना जा रहा है। आवेदन में कहा गया है कि झारखंड राज्य सूचना आयोग पिछले पांच वर्षों से मुख्य सूचना आयुक्त और सूचना आयुक्तों के बिना पूरी तरह निष्क्रिय (डिफंग) पड़ा है। 8 मई 2020 को अंतिम सूचना आयुक्त की सेवानिवृत्ति के बाद से आयोग में कोई नई नियुक्ति नहीं हुई है। वर्तमान में स्थिति यह है कि 25 हजार से अधिक द्वितीय अपील एवं शिकायत वाद लंबित हैं, जिससे सूचना का अधिकार (RTI) कानून बेअसर साबित हो रहा है। हमर अधिकार मंच ने एक महत्वपूर्ण सैद्धांतिक मांग उठाते हुए कहा कि आयोग में भूतपूर्व प्रशासनिक अधिकारियों (IAS/IPS) के बजाय विधि, विज्ञान, समाज सेवा, प्रबंधन और पत्रकारिता के क्षेत्र से जुड़े प्रख्यात गैर-नौकरशाहों की नियुक्ति की जानी चाहिए। पूर्व नौकरशाह अक्सर उन्हीं अधिकारियों के साथ काम कर चुके होते हैं, जो वर्तमान में विभागों में जन सूचना पदाधिकारी (PIO) हैं, जिससे निष्पक्षता प्रभावित होने की आशंका रहती है। गैर-नौकरशाह अधिक स्वतंत्र और निर्भीक तरीके से सूचना दिलाने का कार्य कर सकते हैं। आवेदन में उल्लेख किया गया कि सरकार ने तीन बार विज्ञापन निकाले, लेकिन प्रक्रिया अधूरी रही। वर्ष 2024 और 2025 के विज्ञापनों के बावजूद अब तक नियुक्ति नहीं हो सकी है। मंच ने याद दिलाया कि नियुक्ति के लिए गठित सिफारिश समिति के सभी सदस्य, जिनमें नेता प्रतिपक्ष भी शामिल हैं, वर्तमान में पदस्थ हैं, फिर भी देरी समझ से परे है। मंच के प्रदेश सचिव शकील अख्तर एवं उपाध्यक्ष प्रदीप राणा ने संयुक्त रूप से कहा कि सूचना आयोग की निष्क्रियता लोकतंत्र की आत्मा पर प्रहार है। यदि जल्द सुनवाई शुरू नहीं हुई, तो कानून से जनता का भरोसा उठ जाएगा। उन्होंने नेता प्रतिपक्ष से सरकार पर दबाव बनाकर तत्काल पारदर्शी नियुक्ति प्रक्रिया शुरू कराने का आग्रह किया है।

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