शिक्षा शास्त्र विभाग में हुआ आयोजन; वक्ता बोले- समाज की प्रगति महिलाओं की स्थिति और अवसरों से आंकी जा सकती है
चतरा। चतरा कॉलेज के शिक्षा शास्त्र विभाग में गुरुवार को “भारतीय संस्कृति में नारी का अतीत और भविष्य” विषय पर सेमिनार का आयोजन किया गया। सत्र 2026-28 के प्रशिक्षुओं ने भारतीय समाज में नारी की भूमिका, उसकी बदलती स्थिति और महिला सशक्तीकरण की जरूरत पर अपने विचार रखे।
प्रशिक्षुओं ने कहा कि भारतीय सभ्यता और संस्कृति के निर्माण में महिलाओं की भूमिका हमेशा अहम रही है। ज्ञान, शिक्षा, साहित्य, कला, दर्शन और सामाजिक जीवन से लेकर राष्ट्र निर्माण तक नारी ने प्रतिभा, त्याग, साहस और नेतृत्व क्षमता का परिचय दिया है। साथ ही वर्तमान परिस्थितियों में महिलाओं के सामने मौजूद चुनौतियों और उनके उज्ज्वल भविष्य की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई।

कार्यक्रम में विभागाध्यक्ष डॉ. नंद किशोर सिंह, प्रो. प्रेम बसंत बाखला, डॉ. ग्लोरिया ग्रेस होरो, डॉ. मुमताज अंसारी, डॉ. कंचन सोय मुरूम, प्रो. अमित कुमार सिंह और प्रो. शोभा कुजूर उपस्थित रहे। शिक्षकों ने विषय की प्रासंगिकता पर विचार रखते हुए प्रशिक्षुओं का मार्गदर्शन किया। उन्होंने भारतीय संस्कृति में नारी के अतीत, वर्तमान और भविष्य के संबंध को समझने तथा सामाजिक परिवर्तन में महिलाओं की भूमिका का गंभीर विश्लेषण करने पर बल दिया।
सेमिनार में यह बात प्रमुखता से उभरी कि किसी भी समाज की प्रगति का आकलन वहां की महिलाओं की स्थिति, अधिकारों और उन्हें मिले अवसरों से किया जा सकता है। महिलाओं को शिक्षा, समानता, सम्मान और आत्मनिर्भरता के अवसर देना सामाजिक जरूरत के साथ-साथ सशक्त और विकसित राष्ट्र के निर्माण की अनिवार्य शर्त भी है। आयोजन का संदेश रहा कि नारी के गौरवशाली अतीत से प्रेरणा लेकर, वर्तमान की चुनौतियों का सामना करते हुए समानता, सम्मान और सशक्तीकरण पर आधारित भविष्य बनाया जाना चाहिए।
















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