लोहरदगा। ग्रामीण विकास विभाग, झारखंड सरकार के अंतर्गत संचालित जेएसएलपीएस की जिला टीम द्वारा ‘विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस’ के अवसर पर यूनिसेफ (UNICEF) झारखंड के तकनीकी सहयोग से जिले भर में विशेष जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। “विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस की इस वर्ष की थीम ‘जीने के अनुभवों को सुना जाएः वास्तविक आवाजें, वास्तविक बदलाव’ से प्रेरित होकर, इस अभियान का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में किशोर-किशोरियों और महिलाओं के मानसिक स्वास्थ्य के प्रति संवेदनशीलता बढ़ाना तथा मानसिक तनाव से जुड़े सामाजिक संकोच को समाप्त करना रहा। “इस महत्वपूर्ण अभियान के तहत जेंडर कम्युनिटी रिसोर्स पर्सन्स के सहयोग से जिले के विभिन्न पंचायतों और संकुल स्तरीय संगठनों में व्यापक स्तर पर संवादात्मक एवं शैक्षणिक गतिविधियों का संपादन किया गया।
पंचायत और संकुल (CLF) स्तर पर आयोजित मुख्य गतिविधियाँ:॥ संवेदीकरण कार्यशालाः
मानसिक दृढ़ता और भावनात्मक खुशहाली की ओर कदमः जेएसएलपीएस और यूनिसेफ झारखंड की संयुक्त गाइडलाइन्स के तहत संकुल स्तर पर सखी मंडल की दीदियों, किशोरियों और स्थानीय समुदायों के साथ कार्यशालाओं का आयोजन किया गया। इन कार्यशालाओं में मानसिक तनाव और अवसाद पर खुलकर चर्चा करते हुए समाज में व्याप्त मानसिक स्वास्थ्य संबंधी रूढ़ियों और संकोच को समाप्त करने पर बल दिया गया। साथ ही, दैनिक जीवन में भावनात्मक कल्याण (emotional wellbeing) को अपनाने और मानसिक स्वास्थ्य को बिना किसी हिचकिचाहट के प्राथमिकता देने के लिए प्रेरित किया गया।

किशोर-किशोरियों के लिए विशेष सत्रः यूनिसेफ के बाल संरक्षण और मानसिक कल्याण मॉड्यूल के तहत पंचायतों में किशोर-किशोरियों के साथ विशेष संवाद सत्र आयोजित किए गए। जिसमें परीक्षा के तनाव, मोबाइल की लत, और किशोरावस्था में होने वाले व्यवहारिक बदलावों को संभालने के तरीकों पर परामर्श दिया गया।
नुक्कड़ नाटक और सांस्कृतिक प्रस्तुतियांः मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी रूढ़िवादिता और अंधविश्वास को दूर करने के लिए पंचायत स्तर पर नुक्कड़ नाटकों का आयोजन किया गया। “नाटकों के जरिए इस रूढ़िवादी सोच पर प्रहार किया गया कि मानसिक अस्वस्थता पागलपन या जादू-टोने है। इसके विपरीत, यह संदेश प्रसारित किया गया कि मानसिक समस्याओं का समाधान सबसे पहले उचित परामर्श (Counseling) प्राप्त करने और फिर आवश्यकतानुसार इलाज कराने में निहित है।”
‘हरा रिबन प्रतिज्ञा’ और जागरूकता मार्चः कार्यक्रम की शुरुआत में सखी मंडल की दीदियों, किशोर-किशोरियों और ग्रामीणों को मानसिक कल्याण और भावनात्मक जुड़ाव के प्रतीक के रूप में हरा रिबन बांधा गया। सभी उपस्थित सदस्यों ने सामूहिक रूप से मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहने, मानसिक तनाव या अवसाद की स्थिति में अपनों का साथ देने और खुलकर बात करने के लिए ‘हरा रिबन प्रतिज्ञा’ ली।

सरकारी हेल्पलाइनों का प्रचार और जागरूकताः ग्रामीण क्षेत्रों में मानसिक स्वास्थ्य सहायता को सुलभबनाने के लिए राष्ट्रीय टेली मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम (Tele MANAS) के टोल-फ्री नंबरों (14416 / 1800 891 4416) का व्यापक प्रचार-प्रसार किया गया। ग्रामीणों, विशेषकर महिलाओं और किशोरियों को प्रेरित किया गया कि वे इस नंबर को अपने मोबाइल में सुरक्षित रखें, ताकि किसी भी समय मानसिक तनाव या अवसाद की स्थिति में वे बिना किसी झिझक के मुफ़्त और गोपनीय परामर्श (Counseling) प्राप्त कर सकें। इसके साथ-साथ, विपरीत परिस्थितियों में महिलाओं एवं बच्चों के त्वरित सहायता के लिए महिला हेल्पलाइन (181) और चाइल्ड हेल्पलाइन (1098) की भी विस्तृत जानकारी दी गई।
साझा प्रयास से ग्रामीण समाज में आ रहा है बदलाव
आयोजन के महत्व पर प्रकाश डालते हुए जेएसएलपीएस के जिला कार्यक्रम प्रबंधक (DPM) ने कहा, “शारीरिक स्वास्थ्य की तरह मानसिक स्वास्थ्य भी हमारे जीवन का एक अनिवार्य हिस्सा है। जेएसएलपीएस का यूनिसेफ झारखंड के साथ यह साझा प्रयास ग्रामीण क्षेत्रों में मानसिक स्वास्थ्य के प्रति एक सकारात्मक माहौल बनाने में बेहद मददगार साबित हो रहा है। हमारी दीदियां धरातल पर इस संदेश को घर-घर तक पहुंचा रही हैं।” इस जिला स्तरीय अभियान में हजारों की संख्या में स्वयं सहायता समूहों (SHG) की महिलाओं, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, जेएसएलपीएस की ब्लॉक व जिला टीम ने सक्रिय भागीदारी निभाकर कार्यक्रम को सफल बनाया।

















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