उपवास के बाद महिलाओं ने करम डाल की पूजा की, रातभर झूमर और पारंपरिक गीतों से गुलजार रहे अखाड़े
चतरा/पत्थलगड़ा, झारखंड | न्यूज स्केल संवाददाता
चतरा जिले में मंगलवार को करमा महापर्व पारंपरिक आस्था, उमंग और उत्साह के साथ मनाया गया। जिले के शहरी और ग्रामीण इलाकों में दिनभर पूजा की तैयारियां चलती रहीं, जबकि शाम होते ही विभिन्न अखाड़ों और पूजा स्थलों पर करम डाल स्थापित कर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई। करमा गीतों और पारंपरिक नृत्य से देर रात तक जिले का माहौल उत्सवमय बना रहा।
करमा पर्व को लेकर सुबह से ही चतरा के बाजारों में काफी चहल-पहल रही। पूजा सामग्री, श्रृंगार प्रसाधन, कपड़े और फलों की दुकानों पर लोगों की भीड़ देखने को मिली। महिलाओं ने पूजा के लिए आवश्यक सामग्री के साथ पर्व से जुड़े अन्य सामानों की भी खरीदारी की।
उपवास के बाद करम डाल की पूजा, भाई-बहन के सुख की कामना
करमा पर्व के अवसर पर महिलाओं ने दिनभर उपवास रखा और शाम को करमा देवता के रूप में करम डाल की पूजा की। इस दौरान परिवार की सुख-समृद्धि, खुशहाली और भाइयों की दीर्घायु की कामना की गई। कई पुरुषों ने भी दिनभर उपवास रखकर व्रत किया।
पर्व की एक प्रमुख परंपरा के तहत भाइयों ने सुबह जंगल से करम की डाली लाकर पूजा स्थल तक पहुंचाई। शाम को विभिन्न अखाड़ों में गड्ढा खोदकर करम डाल को स्थापित किया गया। पूजा स्थलों को आकर्षक ढंग से सजाया गया था। कई स्थानों पर रोशनी और ध्वनि की भी व्यवस्था की गई थी।
पूजा संपन्न होने के बाद महिलाओं और युवतियों ने करम डाल के आसपास पारंपरिक झूमर और करमा गीत प्रस्तुत किए। कई स्थानों पर देर रात तक गीत-संगीत और नृत्य का दौर चलता रहा। बच्चों और युवाओं में भी पर्व को लेकर खास उत्साह देखने को मिला।
चतरा के सभी प्रखंडों में दिखा पर्व का उल्लास
जिला मुख्यालय चतरा के अलावा सिमरिया, पत्थलगड़ा, गिद्धौर, प्रतापपुर, कुंदा, टंडवा और कान्हाचट्टी समेत जिले के विभिन्न प्रखंडों में करमा पर्व धूमधाम से मनाया गया। बड़ी संख्या में बहनें अपने मायके पहुंचीं और परिवार के सदस्यों के साथ पर्व की खुशियां साझा कीं। पूरे जिले में दिन के समय पूजा-अर्चना और शाम से रात तक लोकगीत एवं पारंपरिक नृत्य का दौर चलता रहा। करमा पर्व ने ग्रामीण क्षेत्रों में सामुदायिक मेल-जोल और पारंपरिक लोक संस्कृति की झलक भी दिखाई।
नावाडीह में भी श्रद्धा और उल्लास के साथ हुई करमा पूजा
पत्थलगड़ा प्रखंड के नावाडीह गांव में भी करमा पूजा पूरे उत्साह के साथ मनाई गई। ग्रामीणों ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार करम डाल की पूजा-अर्चना की। इस दौरान परिवार और गांव की सुख-समृद्धि, खुशहाली तथा अच्छी फसल के लिए प्रार्थना की गई।
पूजा में बड़ी संख्या में महिलाएं और युवतियां पारंपरिक परिधान में शामिल हुईं। देर रात तक पूजा स्थल पर श्रद्धा और उत्सव का माहौल बना रहा। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक ग्रामीणों ने कार्यक्रम में भाग लिया। ग्रामीणों के अनुसार, करमा पर्व झारखंड की लोक-संस्कृति और पारंपरिक आस्था से जुड़ा महत्वपूर्ण पर्व है। यह पर्व भाई-बहन के स्नेह, प्रकृति के प्रति सम्मान और सामुदायिक एकता की भावना को मजबूत करता है।
News Scale Live | भरोसे की पहचान























Total Users : 1194810
Total views : 3032707