असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने जताया नैतिक समर्थन; बोले— सरकार की अनदेखी से संकट में पड़ा युवाओं का भविष्य
रांची, विशेष संवाददाता: झारखंड की राजधानी रांची में JPSC और JSSC भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों और अनियमितताओं को लेकर छात्र-युवाओं का आक्रोश चरम पर है। नई दिल्ली में NEET पेपर लीक के विरोध में कांग्रेस पार्टी के आक्रामक प्रदर्शनों और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग के बाद देश भर में बने माहौल से स्थानीय आंदोलनकारियों का मनोबल भी काफी बढ़ा हुआ है। हालांकि, रांची में चल रहे इस आंदोलन को लेकर राज्य में एक अलग ही राजनीतिक तस्वीर देखने को मिल रही है।
स्थानीय राजनीति का दोहरा रुख रांची में JPSC-JSSC भर्ती परीक्षाओं में हुई धांधली के खिलाफ सड़कों पर उतरे छात्रों को उन राजनीतिक दलों का प्रत्यक्ष समर्थन नहीं मिल पा रहा है, जो दिल्ली में कांग्रेस के आंदोलन को खुलकर हवा दे रहे हैं। वहीं दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) शुरू से ही इस आंदोलन के पक्ष में खड़ी नजर आ रही है और लगातार छात्रों की मांगों की पैरवी कर रही है।
हिमंत बिस्व सरमा का मिला नैतिक साथ इसी बीच, असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने भी झारखंड के छात्र-युवाओं के इस आंदोलन का खुला समर्थन किया है। झारखंड की राजनीति में लगातार रुचि बनाए रखने वाले सरमा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर एक विस्तृत पोस्ट साझा कर राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए।
असम सीएम हिमंत बिस्व सरमा ने लिखा:
“झारखंड विधानसभा चुनाव के दौरान मुझे JSSC-CGL अभ्यर्थियों की पीड़ा, आक्रोश और भर्ती प्रक्रिया को लेकर उनकी चिंता को करीब से देखने का मौका मिला था। आज जो छात्र अपने भविष्य और न्याय की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं, उनकी भावनाओं को मैं भली-भांति समझ सकता हूं।”
“यदि झामुमो-कांग्रेस-राजद की झारखंड सरकार समय रहते छात्रों की शिकायतों पर संवेदनशीलता और पारदर्शिता के साथ कार्रवाई करती, तो स्थिति यहां तक नहीं पहुंचती। दुर्भाग्य से, अनियमितताओं और पेपर लीक के आरोप लगातार बढ़ते गए और आज लाखों युवाओं का भविष्य संकट में है।”
“मैं झारखंड के छात्र-युवाओं के इस न्यायपूर्ण आंदोलन के प्रति अपना नैतिक समर्थन व्यक्त करता हूं और राज्य सरकार से आग्रह करता हूं कि छात्रों की जायज मांगों को अविलंब स्वीकार कर उनके साथ न्याय करे। युवाओं के भविष्य के साथ अन्याय किसी भी कीमत पर स्वीकार्य नहीं हो सकता।”
भविष्य पर मंडराता संकट झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता को लेकर उठ रहे सवाल अब महज प्रशासनिक मुद्दा न रहकर बड़ा राजनीतिक विषय बन चुके हैं। असम के मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद राज्य सरकार पर अभ्यर्थियों की मांगों पर त्वरित कार्रवाई करने और पारदर्शी जांच सुनिश्चित करने का दबाव और बढ़ गया है।





















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