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जर्जर भवन में पढ़ने को मजबूर छात्र, दो शिक्षकों के भरोसे चल रहा हाई स्कूल

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छत से गिरती है गिट्टी, बारिश में टपकता है पानी; अभिभावकों ने दी स्कूल बंद करने की चेतावनी

कुंदा (चतरा)। कुंदा प्रखंड के बौधाडीह उच्च विद्यालय की बदहाल स्थिति सरकारी शिक्षा व्यवस्था के दावों पर सवाल खड़े कर रही है। जर्जर भवन में छात्र-छात्राएं जान जोखिम में डालकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं। वहीं विद्यालय में शिक्षकों की भारी कमी के कारण गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का दावा भी धरातल पर खोखला नजर आ रहा है।

अभिभावकों और विद्यार्थियों ने बताया कि कक्षाओं के दौरान भवन की छत से लगातार गिट्टी गिरती रहती है। बारिश होने पर कमरों की छत से पानी टपकने लगता है, जिससे बच्चों को भय के माहौल में पढ़ाई करनी पड़ती है। उनका कहना है कि विद्यालय में कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है।

विद्यालय में नौवीं और दसवीं कक्षा तक की पढ़ाई होती है, लेकिन यहां केवल दो शिक्षक पदस्थापित हैं। ऐसे में सभी विषयों की नियमित पढ़ाई प्रभावित हो रही है। ग्रामीणों का कहना है कि शिक्षकों की कमी का असर इस वर्ष मैट्रिक परीक्षा के परिणाम पर भी पड़ा, जहां 18 विद्यार्थी असफल हो गए।

अभिभावकों ने नाराजगी जताते हुए कहा कि बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही भवन की मरम्मत और शिक्षकों की नियुक्ति नहीं की गई तो वे अपने बच्चों को इस विद्यालय में नहीं भेजेंगे और विद्यालय को बंद कराने के लिए आंदोलन करेंगे।

पंचायत प्रतिनिधि अर्जुन पासवान ने भी विद्यालय की स्थिति पर चिंता व्यक्त की। वहीं प्रमुख प्रतिनिधि जयराम भारती ने कहा कि जिस विद्यालय में अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति एवं पिछड़े वर्ग के अधिकांश बच्चे पढ़ते हैं, वहां मूलभूत सुविधाओं का अभाव बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने आरोप लगाया कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के नाम पर गरीब बच्चों के साथ अन्याय हो रहा है। उन्होंने कहा कि कई बार जिला प्रशासन से शिकायत की गई, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई।

विद्यालय के प्रधानाचार्य राजेश कुमार झा ने बताया कि आसपास कोई बेहतर शैक्षणिक विकल्प नहीं होने के कारण बच्चों को मजबूरी में इसी जर्जर भवन में पढ़ाना पड़ रहा है, जो पूरी तरह जोखिम भरा है। उन्होंने भी विद्यालय भवन के निर्माण और पर्याप्त शिक्षकों की नियुक्ति की आवश्यकता पर बल दिया। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन एवं शिक्षा विभाग से विद्यालय की स्थिति में शीघ्र सुधार, नए भवन के निर्माण और पर्याप्त शिक्षकों की नियुक्ति की मांग की है।

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