रांची: राज्य के 48 नगर निकायों में हुए चुनाव के परिणाम सामने आ चुके हैं। नौ नगर निगम, 20 नगर परिषद और 19 नगर पंचायतों में महापौर/अध्यक्ष पद के लिए हुए मुकाबले में इस बार चौंकाने वाला रुझान देखने को मिला। लगभग आधी सीटों पर गैर-दलीय समर्थित प्रत्याशियों ने जीत दर्ज कर राजनीतिक दलों को स्पष्ट संदेश दिया है। हालांकि चुनाव गैर-दलीय आधार पर हुए, लेकिन विभिन्न दलों ने अपने-अपने समर्थित उम्मीदवारों को खुला समर्थन दिया था। इसके बावजूद 48 में से 23 सीटों पर गैर-दलीय समर्थित उम्मीदवारों की जीत ने पारंपरिक दलों की रणनीति पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
किसे कितनी सीटें?
गैर-दलीय समर्थित: 23 सीटें भाजपा समर्थित: 12 सीटें (2018 में 21 सीटें) झामुमो समर्थित: 12 सीटें कांग्रेस समर्थित: 3 प्रमुख सीटें माले समर्थित: 1 सीट
भाजपा को इस बार पिछली तुलना में उल्लेखनीय नुकसान हुआ है। गिरिडीह जैसी महत्वपूर्ण सीट भी उसके हाथ से निकल गई।
नगर निगम (महापौर) – प्रमुख परिणाम
रांची: रोशनी खलखो ने 14,363 मतों से जीत दर्ज की। हजारीबाग: अरविंद कुमार राणा 5,189 मतों से विजयी। गिरिडीह: प्रमिला मेहरा 14,599 मतों से जीतीं। मानगो: सुधा गुप्ता ने रिकॉर्ड 18,601 मतों से जीत दर्ज की। देवघर: रवि राउत 5,148 मतों से विजयी। चास: भोलू पासवान 2,969 मतों से आगे। मेदिनीनगर: अरुणा शंकर 3,122 मतों से विजयी। धनबाद: संजीव सिंह बढ़त पर (मतगणना जारी)।
नगर परिषद (अध्यक्ष) – अहम जीत
चतरा: अताउर रहमान 1,492 मतों से विजयी। गुमला: शकुंतला उरांव टोप्पो 3,168 मतों से जीतीं। लोहरदगा: अनिल उरांव 786 मतों से विजयी। मधुपुर: दरक्शां परवीन 9,641 मतों के बड़े अंतर से जीतीं। विश्रामपुर: गीता देवी ने महज 85 मतों से जीत दर्ज की।
नगर पंचायत – सबसे कड़ा मुकाबला
हुसैनाबाद: अजय भारती ने सिर्फ 60 मतों से जीत हासिल की – सबसे कम अंतर। छत्तरपुर: अरविंद कुमार गुप्ता 4,054 मतों से विजयी। खूंटी: रानी टूटी 3,879 मतों से जीतीं। धनवार: विनय संथालिया 1,498 मतों से आगे।
सबसे बड़ी और सबसे छोटी जीत
सबसे बड़ी जीत: मानगो नगर निगम में सुधा गुप्ता (18,601 मत)। सबसे कम अंतर: हुसैनाबाद नगर पंचायत में अजय भारती (60 मत)।
इस बार के निकाय चुनाव में मतदाताओं ने स्थानीय मुद्दों और व्यक्तिगत छवि को प्राथमिकता दी। गैर-दलीय समर्थित उम्मीदवारों की बड़ी संख्या में जीत ने यह संकेत दिया है कि शहरी निकायों में दलगत पहचान से अधिक विकास और स्थानीय नेतृत्व को महत्व दिया गया। अब सभी निकायों में उप महापौर और उपाध्यक्ष पदों के चुनाव की प्रक्रिया शुरू होने की संभावना है, जिस पर राजनीतिक गतिविधियाँ और तेज होंगी।























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