प्रतिमा निर्माण कार्य उनका पुश्तैनी धंधा, पिछले 20 वर्षो से विभिन्न देवी देवताओं की प्रतिमा का निर्माण करते हैं
मयूरहंड (चतरा)। 23 जनवरी को होने वाले सरस्वती पूजा को लेकर मयूरहंड प्रखंड के करमा क्षेत्र में माता सरस्वती की प्रतिमाओं को कलाकारों द्वारा अंतिम रूप दिया जा रहा है। प्रखंड के विभिन्न स्थानों पर प्रतिमा निर्माण का कार्य जोरों पर है। खर और पुआल के ढांचे पर मिट्टी का लेप चढ़ाकर मूर्तिकार रंग-रोगन में जुटे हुए हैं। कारीगर मिट्टी की जीवंत मूर्तियां गढ़ने में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहते, वहीं समय कम होने के कारण पूजा से पूर्व सभी प्रतिमाओं को तैयार करने में दिन-रात मेहनत की जा रही है।
कारीगरों का कहना है कि सरस्वती पूजा गांव-गांव और गली-गली बड़े उत्साह के साथ मनाई जाती है, जिसमें बच्चे और युवा बढ़-चढ़कर भाग लेते हैं। इसी कारण मूर्तियों की मांग बनी रहती है और मूर्तिकार भी अधिक संख्या में प्रतिमाओं का निर्माण करते हैं।
महंगाई के बावजूद बरकरार है प्रतिमाओं की मांग
बढ़ती महंगाई का असर प्रतिमा निर्माण पर भी पड़ा है, जिससे इस वर्ष प्रतिमाओं के दाम में वृद्धि हुई है। इसके बावजूद मांग में कोई कमी नहीं देखी जा रही है। अधिकांश प्रतिमाओं की एडवांस बुकिंग पहले ही हो चुकी है। करमा में प्रतिमा निर्माण कर रहे कारीगर ने बताया कि यह उनका पुश्तैनी धंधा है और वे पिछले 20 वर्षों से विभिन्न देवी-देवताओं की प्रतिमाएं बनाते आ रहे हैं।
उन्होंने बताया कि इस बार 800 रुपये से लेकर 6000 रुपये तक की प्रतिमाएं तैयार की गई हैं। अब तक 100 से अधिक प्रतिमाओं का निर्माण किया जा चुका है और सभी की अग्रिम बुकिंग हो चुकी है। इससे साफ है कि महंगाई के बावजूद सरस्वती पूजा को लेकर श्रद्धालुओं का उत्साह और मूर्तियों की मांग दोनों कायम हैं।
























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