गौ-सम्मान आह्वान अभियान: झारखंड में देशी गौ-वंश को ‘राज्य माता’ का दर्जा देने की मांग, मुख्यमंत्री के नाम सौंपा गया स्मरण पत्र
लोहरदगा (झारखंड): राज्य में देशी गौ-वंश के संरक्षण, संवर्धन और सुरक्षा को लेकर चलाए जा रहे ‘गौ सम्मान आह्वान अभियान’ के तहत सोमवार को लोहरदगा जिला कलेक्टर कार्यालय के माध्यम से झारखंड के मुख्यमंत्री को एक महत्वपूर्ण स्मरण पत्र सौंपा गया। इस ज्ञापन के ज़रिए राज्य सरकार से देशी गौ-वंश की सुरक्षा के लिए त्वरित विधिक व प्रशासनिक कार्यवाही करने की मांग की गई है।
अभियान के प्रतिनिधियों ने बताया कि इससे पूर्व 27 अप्रैल 2026 को भी राज्य की विभिन्न तहसीलों से हस्ताक्षरित विस्तृत प्रार्थना पत्र भेजा गया था। किंतु, इस संवेदनशील विषय पर अब तक कोई ठोस कदम न उठाए जाने के कारण पुनः ध्यान आकर्षित कराने हेतु यह स्मरण पत्र सौंपा गया है।
11.66 लाख से अधिक गौ-भक्तों का डिजिटल समर्थन
अभियान के जिला प्रभारी विकास कुमार यादव ने जानकारी दी कि पर्यावरण संरक्षण और कागज़ की बचत को ध्यान में रखते हुए देश व प्रदेश भर से जुटाए गए 11,66,161 समर्थकों के हस्ताक्षर और 4,668 पृष्ठों के दस्तावेज़ डिजिटल माध्यम (पेनड्राइव/सीडी) में संलग्न कर प्रशासन को सौंपे गए हैं। आवश्यकता पड़ने पर इनकी मूल हार्डकॉपी भी साक्ष्य स्वरूप प्रस्तुत की जाएगी।
ज्ञापन में शामिल प्रमुख 8-सूत्री मांगे:
’राज्य माता’ का दर्जा: देशी गौ-वंश को झारखंड में ‘राज्य माता’ (राज्य-आराध्या) घोषित किया जाए। साथ ही, केंद्र सरकार को संविधान के अनुच्छेद 48 में संशोधन कर ‘केंद्रीय गौ सेवा एवं संरक्षण अधिनियम’ लागू करने व पृथक ‘गौ-पालन मंत्रालय’ के गठन हेतु राज्य स्तर से अनुशंसा भेजी जाए।
कठोर दंडात्मक प्रावधान: गौ-तस्करी और गौ-वध को गैर-जमानती अपराध बनाते हुए दोषियों के लिए आजीवन कारावास और संपत्ति कुर्क करने का कड़ा कानूनी प्रावधान किया जाए। राज्य की समस्त वधशालाओं के लाइसेंस निरस्त हों।
गौ-गव्य आधारित अर्थव्यवस्था: पंचगव्य (गौ-मूत्र व गौ-मय) उत्पादों को सरकारी खरीद तंत्र से जोड़ा जाए। स्कूलों के ‘मिड-डे मील’ और मंदिरों के ‘प्रसाद’ में केवल देशी गौ-घृत एवं गौ-दुग्ध का उपयोग अनिवार्य किया जाए।
पंचायत व जिला स्तर पर बुनियादी ढांचा: प्रत्येक ग्राम पंचायत में ‘नंदीशाला’ और जिला स्तर पर न्यूनतम एक ‘आदर्श गौ अभ्यारण्य’ या ‘वृहद गौ-शाला’ स्थापित की जाए।
राजमार्ग सुरक्षा व ट्रॉमा सेंटर: राजमार्गों पर दुर्घटनाग्रस्त गौ-वंश के इलाज हेतु हर 50-100 किमी पर ‘गौ-वाहिनी एम्बुलेंस’ और 150-200 किमी पर आधुनिक ट्रॉमा सेंटरों की स्थापना हो।
शिक्षा में समावेश: स्कूली पाठ्यक्रमों में ‘गौ-विज्ञान’ को अनिवार्य विषय के रूप में शामिल किया जाए।
गौ-चर भूमि का संरक्षण: ‘चारा सुरक्षा कानून’ बनाकर चारे के औद्योगिक उपयोग पर रोक लगे तथा सभी गौ-चर व ओरण भूमियों को अतिक्रमण मुक्त कराकर ‘गौ-चर विकास बोर्ड’ के अधीन लाया जाए।
अवैध बूचड़खानों पर रोक: राज्य स्तर पर सभी अवैध वधशालाओं के लाइसेंस रद्द कर कड़े प्रतिबंध लगाए जाएं।
”गौ-संवर्धन से ही समृद्ध होगा झारखंड”

कार्यक्रम में उपस्थित वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि बाबा बैद्यनाथ और धरती आबा बिरसा मुंडा की यह पावन भूमि सदैव प्रकृति प्रेम और जीव-दया की संवाहक रही है। गौ-वंश केवल जन-आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि राज्य की कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है।
इस अवसर पर मुख्य रूप से गौ सम्मान अभियान के जिला प्रभारी विकास कुमार यादव, योगी सेना के जिला अध्यक्ष प्रवीण ठाकुर, विश्व हिंदू परिषद के जिला अध्यक्ष रितेश कुमार, कृष्ण चैतन्य ब्रह्मचारी, प्रद्युमन पाठक, तपेश्वर गोस्वामी, पवन प्रजापति, नीरज साहू, शैलेंद्र प्रजापति, आचार्य शरतचंद्र जी आर्य, आशीष कुमार आर्य, मुकेश दास गोस्वामी, सोनू कुमार साहू और विश्वनाथ वाचस्पति सहित अनेक गौ-सेवक व प्रबुद्ध नागरिक उपस्थित रहे।
























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