लोहरदगा। जिले में इस वर्ष मानसून की धीमी रफ्तार ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। सामान्यतः 15 जून तक अच्छी बारिश की उम्मीद में खेती की तैयारी शुरू करने वाले किसान इस बार जुलाई में धान का बिचड़ा (नर्सरी) लगाने को मजबूर हुए हैं। समय पर पर्याप्त वर्षा नहीं होने से खरीफ फसलों की बुआई प्रभावित हो रही है और किसानों के सामने फसल के नुकसान की आशंका बनी हुई है।
किसानों का कहना है कि पिछले वर्ष की तुलना में इस बार अब तक काफी कम बारिश हुई है। अच्छी वर्षा की उम्मीद में तैयार बैठे किसान अब आसमान की ओर टकटकी लगाए हुए हैं। बारिश में लगातार हो रही देरी के कारण धान की खेती पिछड़ रही है, जबकि बिचड़ा तैयार करने के बाद भी किसानों को इस बात की चिंता सता रही है कि यदि जल्द पर्याप्त बारिश नहीं हुई तो उनकी मेहनत पर पानी फिर सकता है।
जिला कृषि विभाग के अनुसार जून माह में सामान्य वर्षा की तुलना में केवल 55 प्रतिशत बारिश दर्ज की गई है। इसके बावजूद किसान धान की खेती के साथ-साथ मक्का और मूंगफली जैसी वैकल्पिक फसलों की खेती भी शुरू कर चुके हैं।
जिला कृषि पदाधिकारी कालेन खलखो ने बताया कि विभाग लगातार किसानों के बीच जागरूकता अभियान चला रहा है और बदलते मौसम के अनुरूप खेती के लिए आवश्यक सलाह दी जा रही है। उन्होंने कहा कि किसी भी संभावित परिस्थिति से निपटने के लिए कृषि विभाग पूरी तरह तैयार है तथा किसानों को हर संभव तकनीकी सहयोग उपलब्ध कराया जा रहा है।
फिलहाल लोहरदगा के किसानों की निगाहें आसमान पर टिकी हैं। समय पर अच्छी बारिश होने पर ही खरीफ सीजन की फसल बेहतर होने की उम्मीद है। अब देखना होगा कि आने वाले दिनों में मानसून कितना मेहरबान होता है और किसानों की उम्मीदों पर कितना खरा उतरता है।























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