कॉलेज में जुटे प्रबुद्ध जन, पूर्व प्रमुख समेत दिग्गजों ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि
न्यूज स्केल लाइव
चतरा (हंटरगंज)। हंटरगंज प्रखंड क्षेत्र के अंतर्गत डुमरी स्थित रामनारायण स्मारक महाविद्यालय (आरएनएस कॉलेज) परिसर में बुधवार को महान स्वतंत्रता सेनानी, प्रखर जननेता और माटी के लाल बाबू रामनारायण सिंह की 62वीं पुण्यतिथि पूरे राजकीय गौरव, श्रद्धा और अपार सम्मान के साथ मनाई गई। इस पावन स्मृति दिवस कार्यक्रम की अध्यक्षता क्षत्रिय महासभा के चतरा जिला अध्यक्ष अमरेंद्र कुमार केशरी उर्फ कुरकुर सिंह ने की।
इस गरिमामयी श्रद्धांजलि सभा में मुख्य अतिथि के रूप में हंटरगंज के पूर्व प्रमुख कमल कुमार केशरी तथा विशिष्ट अतिथि के रूप में प्रख्यात चिकित्सक डॉ. फहीम अहमद और वरिष्ठ समाजसेवी सरदार प्रताप सिंह मुख्य रूप से उपस्थित रहे। कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ अतिथियों द्वारा कॉलेज परिसर में स्थापित स्वतंत्रता सेनानी बाबू रामनारायण सिंह की आदमकद प्रतिमा पर माल्यार्पण, पुष्प अर्पित करने एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। इसके बाद उपस्थित सैकड़ों लोगों ने मौन रखकर उन्हें अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
महात्मा गांधी की टोली के मुख्य सिपहसालार थे बाबू साहब, खादी के थे पुरोधा
श्रद्धांजलि सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने बाबू रामनारायण सिंह के संघर्षपूर्ण और प्रेरणादायक जीवन तथा भारत के स्वतंत्रता संग्राम में उनके अतुलनीय योगदान को अत्यंत गर्व के साथ याद किया। मुख्य वक्ताओं ने ऐतिहासिक तथ्यों को रेखांकित करते हुए बताया कि:

“बाबू रामनारायण सिंह का जन्म 19 दिसंबर 1885 को हुआ था। वे कट्टर गांधीवादी विचारधारा के महान समर्थक थे। उन्होंने सामाजिक सुधार के साथ-साथ छोटानागपुर के सुदूरवर्ती जंगलों और गांवों में खादी व स्वदेशी के प्रचार-प्रसार में एक ऐतिहासिक भूमिका निभाई थी।”
वक्ताओं ने गौरवशाली इतिहास साझा करते हुए बताया कि वर्ष 1920-21 में जब राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की ऐतिहासिक बिहार यात्रा हुई थी, तब बाबू रामनारायण सिंह ने देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद, लोकनायक जयप्रकाश नारायण, बिहार विभूति अनुग्रह नारायण सिन्हा, बिहार के प्रथम मुख्यमंत्री श्रीकृष्ण सिंह और कृष्ण बल्लभ सहाय जैसे महान स्वतंत्रता सेनानियों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर सामाजिक जागरूकता व ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ स्वदेशी आंदोलन को अभूतपूर्व मजबूती दी थी।
जयपाल सिंह मुंडा के साथ मिलकर उठाई थी जनहित की आवाज

मंच से जानकारी दी गई कि बाबू साहब का विजन बहुत व्यापक था। उन्होंने आदिवासी नेता जयपाल सिंह मुंडा और ओपान मांझी जैसे प्रखर संथाल नायकों के साथ मिलकर जल-जंगल-जमीन और जनहित के बुनियादी मुद्दों पर भी लगातार धरातलीय कार्य किया।
वर्ष 1921 में महात्मा गांधी के एक आह्वान और विशेष आग्रह पर उन्होंने अपनी जमी-जमाई वकालत और सुख-सुविधाओं को त्याग कर पूरी तरह स्वतंत्रता आंदोलन में खुद को झोंक दिया। ब्रिटिश हुकूमत उनकी क्रांतिकारी और सामाजिक गतिविधियों से इस कदर खौफ खाती थी कि खुफिया तंत्र के जरिए उनकी हर हलचल पर चौबीसों घंटे विशेष नजर रखी जाती थी। उनके इसी अदम्य साहस, निरंतर संघर्ष और बेजोड़ जननेतृत्व के कारण उन्हें समूचे राष्ट्र में “छोटा नागपुर केसरी” और “छोटा नागपुर का शेर” की ऐतिहासिक उपाधि से नवाजा गया था।
'छोटा नागपुर केसरी' बाबू रामनारायण सिंह: जीवन वृत्त
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│ जन्म तिथि │ 19 दिसंबर 1885 │
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│ ऐतिहासिक उपाधियां │ छोटा नागपुर केसरी, छोटा नागपुर का शेर│
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│ प्रमुख सहयोगी दल व नेता │ महात्मा गांधी, डॉ. राजेंद्र प्रसाद, JP│
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│ मुख्य वैचारिक योगदान │ स्वदेशी आंदोलन, खादी प्रचार, सामाजिक न्याय│
└───────────────────────────────┴────────────────────────────────┘बाबू साहब की पुण्यतिथि के इस पावन और देशभक्तिपूर्ण अवसर पर मुख्य रूप से सरदार मनोहर सिंह, कौशलेंद्र कुमार, मो. रेयाज, डुमरीकला के मुखिया प्रतिनिधि समरेश कुमार उर्फ पिंटू सिंह, पूर्व जिला परिषद सदस्य जय हिंद पासवान, आरएनएस कॉलेज के पूर्व प्राचार्य अरविंद कुमार सिंह, प्रोफेसर ओम प्रकाश नीलेंदु, विधायक प्रतिनिधि जगरनाथ पासवान, खूंटीकेवाल खुर्द के मुखिया बृजकिशोर सिंह समेत हंटरगंज और चतरा के सैकड़ों बुद्धिजीवी, शिक्षक, छात्र-छात्राएं और प्रबुद्ध नागरिक उपस्थित होकर देश के इस अमर वीर सपूत के प्रति अपनी कृतज्ञता प्रकट की।























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