बदहाल सरकारी स्कूल: मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहा खराटी मध्य विद्यालय; अध्यक्ष बोले— ‘प्रशासन को आवेदन दिया, पर नहीं हुई पहल’
न्यूज स्केल लाइव
चतरा (हंटरगंज)। सरकार भले ही ‘सब पढ़ें, सब बढ़ें’ का नारा बुलंद कर रही हो, लेकिन जमीनी स्तर पर सरकारी स्कूल आज भी उपेक्षा के शिकार हैं। ऐसा ही एक जीता-जागता उदाहरण हंटरगंज प्रखंड अंतर्गत गेंजना पंचायत स्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय, खराटी में देखने को मिल रहा है। यह विद्यालय वर्तमान में बुनियादी और मूलभूत सुविधाओं के घोर अभाव से जूझ रहा है।
इस विद्यालय में वर्तमान में लगभग 360 छात्र-छात्राएं नामांकित हैं। आवश्यक संसाधनों और बुनियादी ढांचे की भारी कमी के कारण न सिर्फ बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है, बल्कि दैनिक विद्यालय संचालन में भी भारी बाधा आ रही है।
शौचालय में पानी नहीं, पेयजल की समुचित व्यवस्था का अभाव
विद्यालय प्रबंधन समिति (VMC) के अध्यक्ष राजेश यादव ने स्कूल की बदहाली पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए बताया कि विद्यालय में बच्चों के लिए शुद्ध पेयजल (पीने के पानी) की कोई समुचित व्यवस्था नहीं है। सबसे बड़ी विडंबना यह है कि स्कूल में बनाए गए शौचालयों में ‘रनिंग वाटर’ (नल से पानी की आपूर्ति) की सुविधा उपलब्ध नहीं है। इसके कारण विशेषकर छात्राओं को स्कूल अवधि के दौरान बेहद नारकीय स्थिति और भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
बाउंड्री वॉल नहीं होने से मवेशियों का तबेला बना स्कूल परिसर
अध्यक्ष राजेश यादव के अनुसार, स्कूल के पास अपनी बाउंड्री वॉल (चारदीवारी) और बच्चों के लिए खेल का मैदान तक नहीं है। बाउंड्री वॉल नहीं होने के कारण:
मवेशियों का आतंक: गांव के लावारिस और पालतू मवेशी चौबीसों घंटे विद्यालय परिसर में स्वच्छंद विचरण करते रहते हैं।
स्वच्छता और पर्यावरण को नुकसान: मवेशियों के प्रवेश के कारण स्कूल परिसर में गंदगी पसरी रहती है और स्वच्छता बनाए रखना एक बड़ी चुनौती बन गया है। बाउंड्री न होने से स्कूल में चाहकर भी पौधारोपण या हरियाली का विकास नहीं किया जा पा रहा है, क्योंकि पौधे मवेशी चर जाते हैं।
कमरों की कमी: स्कूल में छात्र संख्या के अनुपात में अतिरिक्त भवनों और कमरों का भी घोर अभाव है, जिससे बच्चों को ठंसकर बैठना पड़ता है।
प्रशासन मौन, प्रबंधन समिति और शिक्षकों ने की शीघ्र पहल की मांग
राजेश यादव ने तीखा रुख अपनाते हुए बताया कि विद्यालय की इन गंभीर समस्याओं को लेकर प्रखंड प्रशासन (बीईईओ/बीडीओ) से लेकर जिला स्तरीय शिक्षा अधिकारियों (डीएसई/डीईओ) तक को लिखित आवेदन देकर कई बार अवगत कराया जा चुका है। परंतु, प्रशासनिक उदासीनता का आलम यह है कि अब तक इस दिशा में कोई ठोस या सकारात्मक पहल नहीं की गई है।
अब विद्यालय प्रबंधन समिति के पदाधिकारियों, स्थानीय ग्रामीणों और विद्यालय के शिक्षकों ने सामूहिक रूप से चतरा जिला प्रशासन से पुरजोर मांग की है कि:
बच्चों के लिए अविलंब शुद्ध पेयजल और रनिंग वाटर शौचालय की व्यवस्था की जाए।
सुरक्षा के लिहाज से बाउंड्री वॉल और अतिरिक्त स्कूल भवन का निर्माण कराया जाए।
छात्रों के शारीरिक विकास के लिए खेल मैदान को दुरुस्त किया जाए।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि इन बुनियादी सुविधाओं को शीघ्र उपलब्ध नहीं कराया गया, तो ग्रामीण और बच्चे आंदोलन के लिए बाध्य होंगे, क्योंकि इन असुविधाओं के बीच बच्चों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण देना असंभव साबित हो रहा है।























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