भीषण गर्मी में दम तोड़ रहे उपायुक्त के वादे; पंचायत के शास्त्री चौक पर महीनों से खराब पड़ी है पानी की टंकी; प्यास बुझाने के लिए मीलों का सफर तय करने को मजबूर हैं लोग, जिला प्रशासन से गुहार
न्यूज स्केल लाइव
गिद्धौर (चतरा): चतरा जिले के गिद्धौर प्रखंड क्षेत्र में इन दिनों आसमान से बरसती आग और रिकॉर्डतोड़ भीषण गर्मी के बीच ग्रामीण जनता के सामने पानी का एक बहुत बड़ा संकट खड़ा हो गया है। सुदूर ग्रामीण इलाकों में पेयजल (पीने के पानी) की घोर किल्लत से आम नागरिकों का जीना मुहाल हो गया है।
इस संकट को देखते हुए चतरा के उपायुक्त रवि आनंद ने जिले के सभी प्रखंडों में भीषण गर्मी के दौरान पेयजल की सुचारू व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए हर खराब पड़े जल मीनार (सोलर वाटर टैंक) और चापाकल को युद्धस्तर पर मरम्मत करने का सार्वजनिक वादा किया था। लेकिन जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट है, जो स्थानीय अधिकारियों की घोर लापरवाही को उजागर करती है।
बीडीओ की अनदेखी से ठप पड़ा मरम्मत कार्य, प्यासी मर रही है जनता
उपायुक्त के सख्त और जनहितैषी निर्देशों के बावजूद गिद्धौर प्रखंड में धरातल पर कोई काम होता नहीं दिख रहा है। स्थानीय ग्रामीणों ने तीखा आरोप लगाते हुए कहा है कि प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) द्वारा डीसी के आदेशों को पूरी तरह से अनदेखा कर दिया गया है।
प्रखंड स्तर पर लापरवाही का आलम यह है कि अभी तक क्षेत्र के किसी भी बंद या जर्जर पड़े जलमीनार की मरम्मत का कार्य शुरू नहीं कराया गया है। प्रशासनिक सुस्ती और बीडीओ की इस भारी अनदेखी के कारण भीषण उमस और चिलचिलाती धूप में भी ग्रामीणों को शुद्ध पेयजल की बुनियादी व्यवस्था तक नसीब नहीं हो पा रही है।
दुवारी पंचायत के शास्त्री चौक का जलमीनार महीनों से खराब, कहीं पानी की हो रही है चोरी
पेयजल संकट की सबसे भयावह तस्वीर गिद्धौर की दुवारी पंचायत अंतर्गत शास्त्री चौक पर देखने को मिल रही है। यहाँ लाखों रुपये की सरकारी लागत से बना मुख्य जलमीनार पिछले कई महीनों से पूरी तरह से खराब और सफेद हाथी बनकर खड़ा है। शास्त्री चौक के अलावा प्रखंड के कई अन्य गांवों और चौराहों पर भी यही बदहाल स्थिति बनी हुई है।
इस ग्राउंड रिपोर्ट के दौरान एक बेहद चौंकाने वाला और गंभीर मामला भी प्रकाश में आया है। ग्रामीणों ने बताया कि जहाँ एक तरफ आम जनता पीने के पानी के लिए एक-एक बूंद को तरस रही है और मीलों दूर जाकर कुओं से पानी लाने को मजबूर है, वहीं दूसरी तरफ क्षेत्र में कई जगह ऐसे रसूखदार लोग हैं, जिन्होंने सरकारी जल मीनारों पर अवैध रूप से कब्जा कर रखा है और पाइप जोड़कर अपने खेतों में धड़ल्ले से व्यावसायिक खेती (सिंचाई) कर रहे हैं। पेयजल योजना का यह घोर दुरुपयोग पीएचईडी (PHED) विभाग और प्रखंड प्रशासन की साठगांठ की ओर साफ इशारा करता है।
डीसी रवि आनंद से सीधी गुहार— ‘साहब! बीडीओ पर करें कार्रवाई, हमें दिलाएं पानी’
गिद्धौर प्रखंड की प्यासी और बेहाल जनता ने अब स्थानीय बीडीओ और मुखिया से उम्मीद छोड़कर सीधे चतरा उपायुक्त रवि आनंद से न्याय की गुहार लगाई है। दुवारी पंचायत और शास्त्री चौक के प्रभावित ग्रामीणों ने डीसी से मांग की है कि वादे के मुताबिक गिद्धौर में एक विशेष टीम भेजकर सभी खराब और बंद पड़े जलमीनारों व चापाकलों की अविलंब ऑन-स्पॉट तकनीकी मरम्मत कराई जाए, ताकि लोगों को इस जानलेवा गर्मी में पीने का पानी मिल सके।
साथ ही ग्रामीणों ने उन रसूखदारों के खिलाफ भी सख्त कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है, जो जनता के पीने के पानी से अपने खेतों की सिंचाई कर रहे हैं। अब देखना यह है कि जिला कप्तान के आदेश को दबाकर बैठे प्रखंड के अधिकारियों पर कब और क्या कार्रवाई होती है।






















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