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सिस्टम की नाकामी पर जनता का करारा तमाचा: आजादी के 78 साल बाद भी नहीं बनी सड़क, तो ग्रामीणों ने खुद चंदा कर बना दी 1 किमी सड़क

On: June 10, 2026 9:09 PM
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नेताओं और अफसरों के झूठे वादों से तंग आकर ग्रामीणों ने पेश की आत्मनिर्भरता की अनूठी मिसाल; जेसीबी बुलाकर युवा, बुजुर्ग और महिलाओं ने किया महा-श्रमदान; सड़क न होने से गांव में बेटी ब्याहने से कतराते थे लोग, अब उठी पीसीसी की मांग

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हंटरगंज (चतरा): कहते हैं कि अगर मजबूत हौसला और समाज के लिए कुछ कर गुजरने का सच्चा जज्बा हो, तो बड़ी से बड़ी रुकावट को भी दूर किया जा सकता है। इस कहावत को शत-प्रतिशत सच कर दिखाया है चतरा जिले के हंटरगंज प्रखंड अंतर्गत तरवागड़ा पंचायत के शाही नौडीहवा टोला गांव के जागरूक ग्रामीणों ने।

शासन और प्रशासन के खोखले व झूठे वादों से बेहद नाराज होकर इस सुदूरवर्ती गांव के लोगों ने किसी सरकारी मदद का इंतजार किए बिना खुद ही अपने गांव की किस्मत बदलने का बीड़ा उठाया। ग्रामीणों ने आपस में चंदा इकट्ठा कर और ऐतिहासिक श्रमदान देकर खुद ही सड़क निर्माण के कार्य को पूरा कर दिखाया है। इस दौरान स्थानीय प्रशासन और क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों के प्रति लोगों का गहरा गुस्सा और नाराजगी देखने को मिली।

आजादी के 78 साल बाद भी पक्की सड़क को तरस रहा था गांव, कीचड़ और गड्ढों से नरकीय था सफर

देश की आजादी के 78 साल बीत जाने के बाद भी इस बदहाल गांव में आज तक एक अदद पक्की सड़क का निर्माण नहीं कराया जा सका है। इस घोर प्रशासनिक उपेक्षा के कारण ग्रामीणों को दशकों से कीचड़ और गहरे गड्ढों से भरे रास्ते से होकर जान जोखिम में डालकर आवागमन करना पड़ता था।

बरसात के दिनों में स्थिति और भयावह हो जाती थी, जिससे स्कूली बच्चों को स्कूल जाने, किसानों को अपने कृषि उत्पादों को खेतों से बाजार तक पहुंचाने और गंभीर मरीजों व गर्भवती महिलाओं को खाट पर लादकर अस्पताल ले जाने में भारी यातना झेलनी पड़ती थी। ग्रामीणों ने सड़क निर्माण के लिए प्रखंड कार्यालय के चक्कर काटने से लेकर जिला स्तर के अधिकारियों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों तक कई बार लिखित गुहार लगाई, लेकिन हर बार उन्हें केवल आश्वासन का झुनझुना ही थमाया गया।

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नेताओं के झूठे वादों से थके ग्रामीण, आपसी सहयोग से बुलाई जेसीबी और जुट गया पूरा गांव

नेताओं की बेरुखी से थक-हारकर आखिरकार यहाँ के ग्रामीणों ने आत्मसम्मान और स्वावलंबन का रास्ता चुना। ग्रामीणों ने तीखा तंज कसते हुए कहा कि चुनाव के समय नेता वोट बटोरने के लिए गांव आते हैं और बड़े-बड़े विकास के वादे कर चले जाते हैं, लेकिन चुनाव जीतते ही वे एसी कमरों में बंद होकर जनता को भूल जाते हैं।

प्रशासनिक विफलता को देखते हुए ग्रामीणों ने बैठक कर आपसी सहयोग से घर-घर से चंदा इकट्ठा किया। उस एकत्रित राशि से काम के लिए एक जेसीबी (JCB) मशीन मंगवाई गई। इसके बाद गांव के युवा, बुजुर्ग और महिलाएं सभी एक सुर में एकजुट हो गए और हाथों में फावड़ा, कुदाल, टोकरी और अन्य औजार लेकर सड़क के समतलीकरण में जुट गए।

पंचफेडवा मैदान से पीसीसी मुख्य मार्ग तक बनाई एक किलोमीटर लंबी कच्ची सड़क

गांव के सैकड़ों हाथों की सामूहिक मेहनत और पसीने का नतीजा यह हुआ कि महज कुछ ही दिनों के भीतर पंचफेडवा मैदान से लेकर पीसीसी मुख्य मार्ग शाही तक लगभग एक किलोमीटर लंबी और चौड़ी कच्ची सड़क बनकर पूरी तरह तैयार हो गई।

इस महा-श्रमदान अभियान में मुख्य रूप से उमेश यादव, शंभू यादव, राजदेव प्रसाद यादव, रामजी यादव, मतीया देवी, मुनिया देवी, उर्मिला देवी, मुकेश कुमार, पप्पू कुमार, सोनू कुमार, कमलेश कुमार, विकास कुमार, मनीष कुमार, टुन्नी देवी, सुनीता देवी, किरण देवी, राधिका देवी और पतवा देवी सहित सैकड़ों ग्रामीण दिन-रात डटे रहे। ग्रामीणों ने एक सुर में अपना दर्द बयां करते हुए कहा कि गांव में सड़क नहीं रहने के कारण दूसरे गांव वाले इस टोले में अपनी बेटियों की शादी (रिश्ता) करने से भी साफ डरते थे। अब कच्ची सड़क बनने से फौरी राहत मिली है, लेकिन ग्रामीणों ने अब सरकार से इस मार्ग पर अविलंब पक्की पीसीसी सड़क निर्माण की मांग की है।

तरवागड़ा पंचायतवासियों की दो टूक— ‘यह काम निकम्मे सिस्टम के मुंह पर तमाचा है’

शाही नौडीहवा टोला के ग्रामीणों द्वारा किए गए इस साहसिक और भगीरथ प्रयास की पूरे हंटरगंज प्रखंड में जमकर सराहना हो रही है। इस संबंध में तरवागड़ा पंचायत के अन्य प्रबुद्ध नागरिकों और समाजसेवियों ने दो टूक शब्दों में कहा कि गांववालों ने यह प्रशंसनीय काम कर पूरे जिले में एक मिसाल पेश की है।

यह जन-अभियान सीधे तौर पर गूंगे-बहरे सरकारी सिस्टम और निकम्मेपन की नींद सो रहे जनप्रतिनिधियों के मुंह पर एक करारा तमाचा है। नागरिकों ने कहा कि यह काम जनप्रतिनिधियों के लिए जहां एक बड़ी सीख है, वहीं दूसरी तरफ चतरा जिला प्रशासन की घोर विफलता और लापरवाही का सबसे बड़ा जीवंत सबूत भी है। अब देखना यह है कि लाज बचाने के लिए ही सही, जिला प्रशासन इस सड़क को पक्की करने की सुध कब लेता है।

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