नशे के खिलाफ 10 जून से स्कूल-कॉलेजों में चलेगा महाअभियान, नए संवेदनशील इलाकों में लगेंगे सीसीटीवी; पेंडिंग केसों को जल्द निपटाने और लापता बच्चों की बरामदगी के लिए कड़ा निर्देश
न्यूज स्केल लाइव
रांची: राजधानी रांची में सोमवार को पुलिस कार्यालय परिसर में अपर पुलिस महानिदेशक (ADG) सह-पुलिस महानिरीक्षक (रांची प्रमंडल) की अध्यक्षता में विधि-व्यवस्था, अपराध नियंत्रण और कांडों के अनुसंधान को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण व उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इस महामंथन में रांची के वरीय पुलिस अधीक्षक (SSP), नगर पुलिस अधीक्षक (City SP), ग्रामीण एसपी (Rural SP) सहित जिले के तमाम डीएसपी और थाना प्रभारी मुख्य रूप से मौजूद रहे। बैठक के दौरान एडीजी ने राजधानी की सुरक्षा व्यवस्था को अभेद्य बनाने के लिए कई कड़े और व्यावहारिक निर्देश जारी किए।
चप्पे-चप्पे पर होगी नजर: नए संवेदनशील स्थलों पर लगेंगे सीसीटीवी कैमरे
बैठक में राजधानी की विधि-व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए आधुनिक तकनीक और गश्ती के तालमेल पर जोर दिया गया। एडीजी ने सभी थाना प्रभारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि वे अपने-अपने थाना क्षेत्रों में नए संवेदनशील और रणनीतिक स्थलों को चिन्हित करें तथा वहां सीसीटीवी (CCTV) कैमरे लगाने के लिए अविलंब प्रस्ताव तैयार कर मुख्यालय को भेजें। इसके साथ ही:
जिले में सक्रिय पीसीआर (PCR), टाइगर मोबाइल, शक्ति कमांडो और हाईवे पेट्रोलिंग की गश्ती व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ व असरदार बनाया जाए।
किसी भी घटना की सूचना मिलने पर पुलिस की त्वरित प्रतिक्रिया (Quick Response Time) को न्यूनतम किया जाए ताकि अपराधियों को भागने का मौका न मिले।
नशे के सौदागरों पर टूटेगा कहर: 10 जून से शिक्षण संस्थानों में मचेगा शोर
एनडीपीएस (NDPS) एक्ट के तहत दर्ज मामलों की समीक्षा करते हुए एडीजी ने मादक पदार्थों (ड्रग्स, अफीम, ब्राउन शुगर) की अंतरराज्यीय तस्करी और स्थानीय अवैध बिक्री के खिलाफ बड़े पैमाने पर छापामारी का हुक्म दिया है।
स्कूल-कॉलेजों पर विशेष नजर: पुलिस कप्तान और थाना प्रभारियों को निर्देश दिया गया कि स्कूल-कॉलेजों और कोचिंग संस्थानों के आसपास सतत निगरानी (Surveillance) रखी जाए।
15 दिनों का महाअभियान: हमारी युवा पीढ़ी को नशे के दलदल से सुरक्षित बाहर निकालने के लिए रांची जिले के सभी शिक्षण संस्थानों में आगामी 10 जून 2026 से 25 जून 2026 तक पुलिस के नेतृत्व में एक व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाया जाएगा।
लापता बच्चों की बरामदगी और भू-माफियाओं पर कड़ा डंडा
समीक्षा बैठक के दौरान एडीजी ने पुलिसिंग के कई अन्य गंभीर और संवेदनशील एजेंडों पर अपनी बात रखी और अधिकारियों को हिदायत दी:
लापता बच्चों के लिए एसओपी: लापता बच्चों (Missing Children) की त्वरित बरामदगी के लिए तय मानक कार्यप्रणाली (SOP) के तहत सभी एजेंसियां और थाने समन्वित प्रयास करेंगे।
भू-माफियाओं का टूटेगा सिंडिकेट: राजधानी में रंगदारी मांगने वालों, सक्रिय आपराधिक गिरोहों और जमीन की अवैध खरीद-बिक्री करने वाले भू-माफियाओं के आर्थिक व आपराधिक नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त कर उनके खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई (जैसे सीसीए और गैंगस्टर एक्ट) की जाए।
त्योहारों को लेकर अलर्ट: आने वाले पर्व-त्योहारों के मद्देनजर संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल (Furious Force) की तैनाती और सामाजिक सौहार्द बनाए रखने के निर्देश दिए गए।
SC/ST मामलों में तेजी: अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम से जुड़े कांडों में तय समयसीमा के भीतर निष्पक्ष कार्रवाई की जाए और पीड़ितों को तत्काल विधिसम्मत सहायता व मुआवजा सुनिश्चित कराया जाए।
शानदार परफॉर्मेंस के लिए एसएसपी, सिटी एसपी और आईओ हुए सम्मानित
इस महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक का सबसे उत्साहवर्धक पल वह रहा, जब अपराध नियंत्रण, बेहतर अनुसंधान और संगठित अपराधियों के खिलाफ हाल के दिनों में शानदार व साहसिक कार्रवाई करने के लिए रांची के वरीय पुलिस अधीक्षक (SSP) और नगर पुलिस अधीक्षक (सिटी एसपी) को एडीजी महोदय द्वारा स्वयं प्रशस्ति-पत्र (Appreciation Letter) प्रदान कर विशेष रूप से सम्मानित किया गया।
इसके साथ ही, शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के उन जांबाज पुलिस अनुसंधानकर्ताओं (Investigating Officers) को भी मंच पर सम्मानित किया गया, जिन्होंने तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर महत्वपूर्ण केसों का सफल खुलासा करते हुए रिकॉर्ड समय पर कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की है।
आगे देखिए अपर पुलिस महानिदेशक ने क्या कहा:
बैठक के समापन सत्र में अधिकारियों को उनके कर्तव्यों का बोध कराते हुए एडीजी महोदय ने दो टूक शब्दों में कड़ा संदेश दिया:
“पुलिस का असली चेहरा जनता के प्रति उसकी संवेदनशीलता से दिखता है। वर्दी का खौफ अपराधियों के मन में होना चाहिए, आम जनता के मन में नहीं। सभी अधिकारी आम फरियादियों के प्रति पूरी तरह संवेदनशील, जवाबदेह और पेशेवर दृष्टिकोण (Professional Approach) अपनाकर काम करें। थानों में आने वाले हर पीड़ित की बात सुनी जाए और पेंडिंग केसों का बिना किसी दबाव के जल्द से जल्द गुणवत्तापूर्ण निपटारा किया जाए। कोताही बरतने वाले अधिकारियों पर विभागीय कार्रवाई तय है।”




















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