सिंचाई और आटा चक्की के लिए ईंधन न मिलने से खेती-किसानी ठप। पेट्रोल पंप संचालकों की मनमानी के खिलाफ भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने खोला मोर्चा; अनुमंडल प्रशासन से तत्काल विधिक हस्तक्षेप की मांग
सिमरिया (चतरा) | न्यूज स्केल लाइव
चतरा जिले के सिमरिया अनुमंडल क्षेत्र में भीषण गर्मी और चिलचिलाती धूप के बीच खेतों की सिंचाई करने वाले अन्नदाताओं के सामने अब एक नया और गंभीर संकट गहरा गया है। क्षेत्र के पेट्रोल पंपों पर किसानों को कृषि एवं सिंचाई कार्य के लिए डीजल-पेट्रोल उपलब्ध नहीं होने से हाहाकार मचा हुआ है। इस गंभीर जन-सरोकार के मामले को लेकर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) अंचल परिषद सिमरिया ने कड़ा रुख अख्तियार करते हुए सिमरिया अनुमंडल पदाधिकारी (SDO) को एक विस्तृत विधिक ज्ञापन सौंपा है और इस मामले में तत्काल प्रशासनिक हस्तक्षेप की मांग की है।
पार्टी ने दोटूक कहा है कि अगर अन्नदाताओं को उनकी फसलों को बचाने के लिए समय पर ईंधन नहीं मिला, तो क्षेत्र के किसान सड़कों पर उतरकर उग्र विधिक आंदोलन के लिए पूरी तरह बाध्य होंगे।
पंप संचालकों की मनमानी; डब्बे में तेल देने से साफ इनकार, छोटे व्यवसाय ठप
भाकपा अंचल परिषद सिमरिया द्वारा अनुमंडल प्रशासन को सौंपे गए आधिकारिक आवेदन में सीधे तौर पर पेट्रोल पंप मालिकों के सिंडिकेट और उनकी मनमानी पर तीखा विधिक आरोप मढ़ा गया है। आवेदन के अनुसार:
किसानों की बेबसी: अनुमंडल क्षेत्र के सुदूरवर्ती गांवों से आने वाले गरीब किसानों को खेतों में सिंचाई करने, पंपिंग सेट चलाने, ग्रामीण क्षेत्रों में आटा चक्की का सफल संचालन करने तथा अन्य जरूरी कृषि-आधारित कार्यों के लिए डीजल एवं पेट्रोल लेने में भारी किल्लत और परेशानी हो रही है।
कंटेनर पर कड़ा प्रतिबंध: आरोप है कि सिमरिया के कई पेट्रोल पंप संचालकों द्वारा ट्रैक्टर या अन्य वाहनों के बिना, सीधे डब्बे (प्लास्टिक कंटेनर/गैलन) में तेल देने से साफ इनकार किया जा रहा है। अब किसान अपनी सिंचाई मोटर या आटा चक्की को उखाड़कर तो पेट्रोल पंप ला नहीं सकता; तेल न मिलने से किसानों और छोटे कुटीर व्यवसाय संचालकों को भीषण आर्थिक नुकसान और अनावश्यक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
भीषण गर्मी में सूख रही हैं फसलें; ईंधन नहीं मिलना एक गंभीर प्रशासनिक विफलता
भाकपा के प्रबुद्ध नेताओं ने अनुमंडल प्रशासन से कड़क मांग की है कि वर्तमान खरीफ-पूर्व और गर्मी के मौसम की फसलों की जरूरतों को सर्वोच्च प्राथमिकता पर देखा जाए। गर्मी के इस झुलसाने वाले मौसम में भूमिगत जल स्तर नीचे चले जाने के कारण खेतों में सिंचाई की आवश्यकता कई गुना बढ़ जाती है। ऐसे नाजुक समय में अन्नदाताओं को ईंधन (डीजल) न मिलना एक गंभीर सामाजिक और प्रशासनिक संकट बनता जा रहा है।
पार्टी ने SDO से मांग की है कि सभी पेट्रोल पंपों को विधिक सर्कुलर जारी कर किसानों को उनके किसान क्रेडिट कार्ड (KCC), आधार या वैध पहचान पत्र के आधार पर डब्बों में विधिक रूप से डीजल-पेट्रोल उपलब्ध कराने की पारदर्शी व्यवस्था तुरंत सुनिश्चित की जाए, ताकि चतरा की खेती-किसानी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पूरी तरह प्रभावित होने से बच सके।
प्रशासनिक पहल पर टिकी चतरा के अन्नदाताओं की नजरें
भाकपा अंचल परिषद के नेताओं ने साफ किया है कि पेट्रोल पंपों की इस मनमानी से पूरे सिमरिया प्रखंड के दर्जनों गांवों के किसान बेहद आक्रोशित हैं। ज्ञापन सौंपे जाने के बाद अब इस पूरे संवेदनशील मामले में सिमरिया अनुमंडल प्रशासन और स्थानीय अधिकारियों की त्वरित विधिक पहल पर क्षेत्र के हजारों लोगों की नजरें टिकी हुई हैं। जनता सीधे तौर पर पंप संचालकों के खिलाफ कड़े विधिक दिशा-निर्देश जारी करने की मांग कर रही है।




















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