नियमित नियुक्ति की आस में वर्षों तक पढ़ाते रहे दंपती, अब डीसी और डीएसई से लगाई न्याय की गुहार
गुमला (झारखंड)। अल्बर्ट एक्का जारी प्रखंड के मेराल स्थित अल्पसंख्यक श्रेणी के आरसी प्राथमिक विद्यालय में वर्षों तक अवैतनिक सेवा देने वाले शिक्षक दंपती को विद्यालय से हटाए जाने का मामला सामने आया है। पीड़ित जेफेरियुस केरकेट्टा और उनकी पत्नी उरलिया केरकेट्टा ने जिला प्रशासन से न्याय की गुहार लगाई है। उनका आरोप है कि नियमित वेतन पर नियुक्ति की उम्मीद में लंबे समय तक सेवा देने के बावजूद विद्यालय प्रबंध समिति ने उन्हें हटाकर दो नए वेतनभोगी शिक्षकों को नियुक्त कर लिया।
पति ने प्रभारी प्रधानाध्यापक के रूप में भी दी सेवा
जेफेरियुस केरकेट्टा के अनुसार, उन्होंने जून 2017 से जुलाई 2026 तक करीब नौ वर्षों तक विद्यालय में शिक्षक के रूप में काम किया। इस दौरान उन्होंने प्रभारी प्रधानाध्यापक की जिम्मेदारी भी संभाली। उनकी पत्नी उरलिया केरकेट्टा ने जून 2019 से जुलाई 2026 तक शिक्षिका के रूप में अपनी सेवाएं दीं।
दंपती का कहना है कि उन्होंने इस उम्मीद में वर्षों तक बिना वेतन के बच्चों को पढ़ाया कि भविष्य में उनकी नियमित और वेतनभोगी नियुक्ति होगी। लेकिन जब विद्यालय में नियमित वेतन पर शिक्षकों की बहाली की प्रक्रिया आई, तो उन्हें दरकिनार कर दो अन्य शिक्षकों को नियुक्त कर लिया गया।
हाजिरी रजिस्टर और विद्यालय संचालन के रिकॉर्ड का दिया हवाला
दंपती का दावा है कि लंबे समय तक विद्यालय में उनकी उपस्थिति दर्ज होती रही। उनके अनुसार, समग्र शिक्षा अभियान के संकुल समन्वयक ने भी नियमित निरीक्षण के दौरान उपस्थिति रजिस्टर पर हस्ताक्षर किए। विद्यालय में बच्चों के बीच पाठ्यपुस्तकों का वितरण और मध्याह्न भोजन योजना के तहत खाद्य सामग्री की आपूर्ति भी होती रही।
उनका आरोप है कि उन्हें बिना किसी पूर्व नोटिस या कारण बताओ सूचना के विद्यालय से हटा दिया गया। इससे परिवार के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है।
जांच नहीं हुई तो उच्च न्यायालय जाने की चेतावनी

जेफेरियुस केरकेट्टा और उरलिया केरकेट्टा ने उपायुक्त एवं जिला शिक्षा अधीक्षक से पूरे मामले की प्रशासनिक जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि जांच के बाद उन्हें न्याय नहीं मिलता और उनकी नियुक्ति से संबंधित मामले का समाधान नहीं होता, तो वे झारखंड उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाने को मजबूर होंगे।
फिलहाल, विद्यालय प्रबंध समिति का पक्ष और जिला प्रशासन की ओर से इस मामले में की गई कार्रवाई की जानकारी उपलब्ध नहीं है। नियुक्ति, सेवा अवधि और निष्कासन से जुड़े दावों की पुष्टि संबंधित अभिलेखों एवं प्रशासनिक जांच से होनी बाकी है।



















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