CWC और बाल संरक्षण इकाई की कार्यशैली पर उठे सवाल, पिता की मौत के बाद भी योजनाओं से नहीं जुड़ सके दोनों बच्चे
चतरा/कान्हाचट्टी। जिले के कान्हाचट्टी प्रखंड के गड़िया गांव के दो अनाथ बच्चों को आखिरकार आवासीय विद्यालय में दाखिला मिल गया। पिता की मौत के बाद आर्थिक संकट से जूझ रहे 8 वर्षीय सुधांशु कुमार यादव और 6 वर्षीय सुमित कुमार यादव के लिए यह पहल जिला परिषद उपाध्यक्ष बृज किशोर तिवारी की पहल से संभव हुई। दोनों बच्चे स्व. विजय यादव के पुत्र हैं।
पिता के निधन के बाद परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर हो गई थी। बच्चों की पढ़ाई और रहने की व्यवस्था को लेकर परेशानी बनी हुई थी। मामले की जानकारी मिलने पर जिला परिषद उपाध्यक्ष ने जिला शिक्षा अधीक्षक को पत्र लिखकर दोनों बच्चों का सुभाष चंद्र बोस आवासीय विद्यालय, चतरा में नामांकन कराने की पहल की। विभागीय प्रक्रिया पूरी होने के बाद दोनों का दाखिला हो गया है।
सवाल यह कि अब तक बाल संरक्षण संस्थाओं ने क्यों नहीं ली सुध?
मामले का दूसरा पहलू यह है कि पिता को खो चुके दोनों बच्चों की स्थिति सामने आने के बावजूद उन्हें अब तक बाल संरक्षण से जुड़ी योजनाओं से जोड़ने की पहल नहीं हो सकी। जरूरतमंद बच्चों के संरक्षण एवं सहायता के लिए संचालित व्यवस्थाओं में बाल कल्याण समिति (CWC) और जिला बाल संरक्षण इकाई (DCPU) की महत्वपूर्ण भूमिका निर्धारित है।
ऐसे में सवाल उठ रहा है कि यदि बच्चों की स्थिति जनप्रतिनिधि की जानकारी में आने के बाद तत्काल आवासीय विद्यालय में नामांकन की पहल की जा सकती है, तो संबंधित बाल संरक्षण संस्थाएं अब तक इन बच्चों को चिह्नित कर आवश्यक सहायता और योजनाओं से क्यों नहीं जोड़ सकीं।
जनप्रतिनिधि की पहल से मिली राहत
जिला परिषद उपाध्यक्ष बृज किशोर तिवारी ने कहा कि आर्थिक अभाव के कारण किसी बच्चे की पढ़ाई बाधित नहीं होनी चाहिए। बच्चों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए उन्होंने नामांकन की पहल की थी, जो अब पूरी हो गई है। स्थानीय लोगों के अनुसार, जनप्रतिनिधि की पहल से बच्चों को तत्काल राहत मिली है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि CWC और बाल संरक्षण इकाई इन दोनों बच्चों की स्थिति का संज्ञान लेकर उन्हें बाल संरक्षण से जुड़ी अन्य पात्र योजनाओं और आवश्यक सहायता से जोड़ने के लिए क्या कदम उठाती हैं।





















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