बाल श्रम के खिलाफ कार्रवाई: होटल-ढाबे और ट्रैक्टर से 7 बाल मजदूर मुक्त; सीबीडब्ल्यूसी के समक्ष किया गया पेश
न्यूज स्केल लाइव
चतरा। बाल श्रम उन्मूलन एवं बच्चों के मौलिक अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से जिला प्रशासन के सख्त निर्देश पर गुरुवार को चतरा प्रखंड के ऊंटा एवं रमटुंडा क्षेत्र में एक विशेष बाल श्रम उन्मूलन अभियान चलाया गया। श्रम विभाग द्वारा गठित विशेष धावा दल (रेस्क्यू टीम) ने विभिन्न होटलों, ढाबों, गैराजों, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों एवं अन्य संवेदनशील कार्यस्थलों पर अचानक सघन जांच अभियान संचालित किया, जिससे नियोजकों में हड़कंप मच गया।
ट्रैक्टर से 6 और ढाबे से 1 बाल श्रमिक को कराया गया मुक्त
प्रशासनिक अधिकारियों के नेतृत्व में चलाए गए इस रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान धावा दल ने बाल श्रम में धकेले गए मासूमों को रेस्क्यू किया:
रमटुंडा क्षेत्र: यहाँ स्थित एक स्थानीय ढाबे में कड़े सुरक्षा मानकों की अनदेखी कर कार्य कर रहे एक बाल श्रमिक की पहचान की गई और उसे तत्काल बाल श्रम के चंगुल से मुक्त कराया गया।
ऊंटा रोड क्षेत्र: इस मार्ग पर व्यावसायिक कार्य में प्रयुक्त एक ट्रैक्टर पर जोखिमपूर्ण स्थिति में कार्य कर रहे छह बाल मजदूरों को भी टीम ने तत्परता दिखाते हुए मुक्त कराया।
इस प्रकार, इस पूरे अभियान के दौरान कुल सात (7) बच्चों को बाल श्रम से सफलतापूर्वक मुक्त कराकर सुरक्षित प्रशासनिक संरक्षण में ले लिया गया है।
पुनर्वास के लिए बाल कल्याण समिति (CWC) के समक्ष किया गया प्रस्तुत
मुक्त कराए गए सभी सात बच्चों को आवश्यक देखभाल, मनोवैज्ञानिक परामर्श, उचित संरक्षण एवं भविष्य में बेहतर पुनर्वास की कानूनी प्रक्रिया सुनिश्चित करने के लिए बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) के समक्ष ससम्मान प्रस्तुत किया गया।
समिति के नियमों और किशोर न्याय अधिनियम की मूल भावनाओं के तहत इन बच्चों को उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए सरकारी योजनाओं और शिक्षा से जोड़ने की पहल की जा रही है। वहीं दूसरी ओर, मासूम बच्चों से अवैध रूप से काम कराने वाले संबंधित नियोजकों (मालिकों) के विरुद्ध बाल एवं किशोर श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम, 2016 के तहत कड़े कानूनी प्रावधानों के अंतर्गत विधिसम्मत कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है।
बाल श्रम दंडनीय अपराध, दोषियों को नहीं बख्शेगा प्रशासन
जिला प्रशासन ने इस कार्रवाई के बाद कड़ा रुख अख्तियार करते हुए स्पष्ट किया कि बाल श्रम एक गंभीर सामाजिक बुराई होने के साथ-साथ कानूनन एक संज्ञेय और दंडनीय अपराध भी है। देश के प्रत्येक बच्चे को अनिवार्य शिक्षा, सुरक्षा और सम्मानजनक बचपन का संवैधानिक अधिकार प्राप्त है तथा किसी भी परिस्थिति में उनसे मजदूरी या श्रम कराना कानूनन पूरी तरह प्रतिबंधित है।
प्रशासन ने चेतावनी दी है कि जिले में बाल श्रम के विरुद्ध आगे भी लगातार ऐसे औचक अभियान चलाए जाएंगे और मासूमों का शोषण करने वाले दोषियों के खिलाफ जेल भेजने की सख्त कार्रवाई की जाएगी।
अभियान में इन विभागों की रही सक्रिय सहभागिता
इस रेस्क्यू अभियान को सफल बनाने में श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी, जिला बाल संरक्षण इकाई, चाइल्ड हेल्पलाइन 1098, बाल कल्याण समिति, नीति आयोग के जिला परियोजना सहायक, एलजीएसएस के समर्पित सामाजिक कार्यकर्ता तथा स्थानीय पुलिस विभाग के अधिकारी एवं सशस्त्र बल के जवान मुख्य रूप से शामिल रहे।
























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