झारखंड में राज्यसभा चुनाव से पहले ‘क्रॉस वोटिंग’ का खेल! झामुमो का एनडीए में बड़ी सेंधमारी का दावा, होटल में शिफ्ट किए गए विपक्ष के विधायक
न्यूज स्केल लाइव विशेष संवाददाता
रांची। झारखंड की सियासत में राज्यसभा चुनाव के ठीक पहले एक सोशल मीडिया पोस्ट ने भूचाल ला दिया है। सत्तारूढ़ झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के एक आधिकारिक ट्वीट ने राज्य के राजनीतिक हलकों में भारी सनसनी फैला दी है। झामुमो ने अपने अधिकृत एक्स (ट्विटर) हैंडल पर सिर्फ एक लाइन लिखी है— “56 नहीं 61”। इस रहस्यमयी आंकड़े का साफ-साफ इशारा आगामी राज्यसभा चुनाव के समीकरण और एनडीए (NDA) खेमे में होने वाली संभावित टूट की ओर है। इस ट्वीट के बाद से ही जोड़-तोड़ और क्रॉस वोटिंग की चर्चाएं चरम पर पहुंच गई हैं।
क्या है 56 और 61 का पूरा गणित?
झारखंड विधानसभा के मौजूदा गणित के अनुसार, झामुमो नीत सत्तारूढ़ गठबंधन के पास इस समय कुल 56 विधायक हैं। इन 56 विधायकों का दलीय वर्गीकरण इस प्रकार है:
झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM): 34 विधायक
कांग्रेस (Congress): 16 विधायक
राष्ट्रीय जनता दल (RJD): 04 विधायक
भाकपा माले (CPI-ML): 02 विधायक
इस प्रकार गठबंधन के पास अपने 56 विधायक सुरक्षित हैं, लेकिन झामुमो का दावा है कि चुनाव के दिन उनके पक्ष में 56 नहीं बल्कि 61 वोट पड़ने वाले हैं। यानी झामुमो सीधे तौर पर एनडीए खेमे के 5 विधायकों को अपने पाले में लाने का दावा कर रहा है।
त्रिकोणीय मुकाबले से बढ़ी ‘हॉर्स ट्रेडिंग’ की आशंका
झारखंड की दो राज्यसभा सीटों पर हो रहे इस चुनाव में मुकाबला बेहद दिलचस्प और पेचीदा हो गया है।
महागठबंधन के प्रत्याशी: झामुमो ने बैजनाथ राम को अपना प्रत्याशी बनाया है, वहीं गठबंधन सहयोगी कांग्रेस ने प्रणव झा को अपना उम्मीदवार घोषित किया है।
विपक्ष/एनडीए का दांव: दूसरी तरफ, एनडीए खेमा खुद का उम्मीदवार न उतारकर निर्दलीय प्रत्याशी परिमल नाथवाणी को खुला समर्थन दे रहा है। एनडीए के पास कुल 24 विधायक हैं।
नियमों के मुताबिक, झारखंड की दो सीटों पर एक प्रत्याशी को सीधे तौर पर जीतने के लिए कम से कम 28 विधायकों के प्रथम वरीयता के वोट की जरूरत है। तकनीकी रूप से झामुमो गठबंधन के पास 56 विधायक होने के कारण उनके दोनों प्रत्याशी (28 + 28 = 56) आसानी से जीत रहे हैं। परंतु, उद्योगपति व निर्दलीय प्रत्याशी परिमल नाथवाणी के मैदान में उतरने से राज्य में ‘हॉर्स ट्रेडिंग’ (विधायकों की खरीद-फरोख्त) की गंभीर आशंका जताई जा रही है।
सीएम हेमंत सोरेन की ‘शांति’ के बाद झामुमो का पलटवार
कांग्रेस ने हॉर्स ट्रेडिंग और विधायकों के टूटने की अपनी इसी आशंका को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के समक्ष प्रमुखता से रखा था। सीएम हेमंत सोरेन पिछले कुछ दिनों से इस पूरे मामले पर पूरी तरह शांत थे और रणनीतिक चुप्पी साधे हुए थे। अब झामुमो ने कांग्रेस के डर और एनडीए के दांव के जवाब में यह ट्वीट दागकर साफ कर दिया है कि वे केवल अपनी सीटें बचा नहीं रहे हैं, बल्कि विपक्ष के किले में ही सेंध लगाने की तैयारी कर चुके हैं।
विनोद पांडेय बोले— “हड़बड़ाइए मत, हमारे पास 61 का समर्थन है”
झामुमो के एक्स हैंडल पर ट्वीट के तुरंत बाद पार्टी के कद्दावर महासचिव विनोद कुमार पांडेय ने भी अपने सोशल मीडिया हैंडल पर एक डिजिटल कार्ड पोस्ट किया। इस कार्ड पर भी बड़े-बड़े अक्षरों में “56 नहीं 61” लिखा हुआ है। मीडिया द्वारा पूछे जाने पर महासचिव विनोद पांडेय ने मुस्कुराते हुए सिर्फ इतना कहा कि: “हमारे पास वर्तमान में कुल 61 विधायकों का मजबूत समर्थन है। चुनाव के दिन सब साफ हो जाएगा।”
उनका इशारा साफ-साफ एनडीए में बड़ी टूट की ओर है। हालांकि, रणनीतिक कारणों से झामुमो ने अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि एनडीए के कौन-कौन से विधायक पाला बदलकर झामुमो गठबंधन के प्रत्याशियों को वोट करने जा रहे हैं।
टूट के डर से होटल में शिफ्ट किए गए एनडीए के विधायक
झामुमो के इस बड़े सियासी दावे के बाद एनडीए खेमे में हड़कंप मच गया है। आनन-फानन में एनडीए नेतृत्व ने अपने सभी विधायकों को एकजुट रखने और किसी भी प्रकार की सेंधमारी से बचाने के लिए रांची के एक नामचीन आलीशान होटल में शिफ्ट होने का कड़ा व्हीप (आदेश) जारी कर दिया है। सूचना के अनुसार, विपक्ष के कई विधायक मंगलवार देर शाम तक होटल पहुंच भी गए हैं, जहां चुनाव संपन्न होने तक कड़ी निगरानी के बीच उनकी ‘बाड़ेबंदी’ की जा रही है।























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