मिट्टी को तराश कर कुम्हारों के हाथों से बनें दीपक की जगमगाहट के सामने फीकी पड़ जाती है चाइना इलेक्ट्रॉनिक दीप- करंज तेल से जलते दिये के अनेकों हैं लाभ*
झारखण्ड/गुमला– कुम्हार की मिट्टी से बने दिये की जगमगाहट के सामने फीकी है चीन से बनी इलेक्ट्रॉनिक दीपक और लाइट बत्ती जी हां आज के आधुनिक युग में लोग भले ही इलेक्ट्रॉनिक दीपक और जगमघाट के लिए रोशनी की झालरों का इस्तेमाल करने से पीछे नहीं है लेकिन यहां बताते चलें कि कुम्हारों के द्वारा मिट्टी को तराश कर बनने वाले दीपक आज की नहीं बल्कि पौराणिक समय से ही अपनी एक अलग पहचान बनाई है और यह भी की इस दियों पर करंज का तेल और सरसों का तेल एवं पूजा धी के दियों की रोशनी का महत्व ही कुछ और है इसकी टमटमाहट और जगमगाहट लोगों को जहां अपनी ओर आकर्षित करती है वहीं मिट्टी के दियों पर जब लोग दीपावली में दीपक जलते हैं और उसकी लौ में कार्तिक मास में धान की फसल लगभग कटाई के लिए तैयार हो जाती है और इस मौसम में काफी कीड़े जो भरे होते हैं वे दिपावली पर्व पर जलते दीपकों की ओर अपना रूख कर लेते हैं परिणामस्वरूप मौसमी कीड़े और फतंगे गायब हो जाते हैं यह सबसे बड़ा लाभ पहला लोगों को होता है कुम्हार के द्वारा बनाए गए मिट्टी के दियों को पर करंज तेल डालकर जलाने से वहीं दूसरा लाभ होता है कि मिट्टी की शुद्धता और तीसरा लाभ इस दीपावली पर दीए बनाने वाले कड़ी मेहनत कर दियों को तैयार करने वाले कुम्हार के मिट्टी के दियों को जब हम सब मिलकर चाइना दीप को छोड़कर आत्मनिर्भर भारत का सपना देखते उन कुम्हारों से जब हम खरीददारी कर ले तो देश के मेहनतकश कुम्हार लोगों को फायदा होगा। इसलिए यह दिपावली पर्व पर क्यों ना हम सभी आत्मनिर्भर भारत का सपना साकार करने के लिए कुम्हार से बने दिये ही खरीदें और इन्हें आत्मनिर्भर बनाने का काम करें तो चलिए बाजार और सड़क किनारे मिट्टी के खुबसूरत दियों के अलावा बच्चों के लिए मिट्टी के खिलौने रंग-बिरंगे हाथी, घोड़े बाध आदि खरीदने चलते हैं। यहां बताते चलें कि गुमला लोहरदगा रोड़ निवासी कालीचरण कुम्हार पिछले 60 साल पहले से ही मिट्टी के खुबसूरत दियों को पूरा परिवार मिलजुल कर बनाते हैं उनसे रूबरू होने पर उन्होंने कहा कि काफी मेहनत करनी पड़ती है और उसके एवज में उतनी कमाई भी नहीं हो पाती है






















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