झारखण्ड/गुमला- घाघरा प्रखंड के सुदूरवर्ती नक्सल प्रभावित इलाके के आठ ग्रामीणों को कल्याण विभाग के पशुधन बढ़ोतरी और आय में सुधार के लिए बकरी देने के नाम पर प्रखंड कार्यालय परिसर बुलाया गया था। जहां पर सप्लायर के द्वारा बीमार कमजोर व बकरी के बच्चे को बकरी के नाम पर सप्लाई दिया जा रहा था। जिसका लाभुको सहित प्रखंड कार्यालय परिसर में उपस्थित ग्रामीणों ने पुरजोर विरोध किया। बकरी सप्लाई का काम कल्याण विभाग से मिलकर प्रज्वलित बिहार नाम की संस्थान जो कि रांची में कार्यरत है, उसके द्वारा किया जा रहा था। जैसे ही ग्रामीण इस बात का विरोध करने लगे आनन फानन में सप्लाई करने के लिए आए संस्थान के कर्मचारी फटाफट बकरी को अपने पिकअप वाहन में डाल कर फरार हो गए। सप्लायरों के द्वारा मानक को दरकिनार कर बीमार कमजोर व छोटे बकरी के बच्चे को लाकर सप्लाई किया जा रहा था। सप्लायर के द्वारा वेट मशीन भी नहीं लाया गया था ताकि बकरी का वजन करके अच्छे कैटेगरी की बकरी की आपूर्ति की जा सके। सप्लायर के कर्मचारियों ने अपना नाम नहीं बताया कहा कि हम लोगों को जैसा आदेश मिलता है हम लोग वैसा करते हैं। अगर ग्रामीण का विरोध है तो हम इसे वापस लेकर जा रहे हैं। सवाल है कि इस तरह के बकरी के बच्चे का सप्लाई जिले के कई प्रखंडों में कर दी गई है, लेकिन ग्रामीण को जागरूक नहीं किए जाने के कारण छोटे बकरी के बच्चे को ही लाभुकों के द्वारा ले जाकर पालन पोषण किया जा रहा है। सवाल है कि प्रखंड कार्यालय परिसर में किस तरह का घोटाला अगर किया जाता है तो सप्लायर जब गांव में जाकर बकरी की सप्लाई करेंगे तो क्या कर रहे होंगे या अनुमान लगा पाना कोई कठिन बात नहीं है।
*वेट मशीन नहीं रहने, कमजोर बकरी रहने के कारण वितरण करने से रोका गया है:-पशुपालन अधिकारी*
पशुपालन पदाधिकारी आभा एक्का ने कहा कि सप्लायर के द्वारा वजन करने के लिए मशीन नहीं लाया गया था और सारे बकरियां कमजोर वह मानक से छोटा था जिसके कारण वितरण करने से मना किया गया है सप्लायर को निर्देश दिया गया है कि स्वास्थ्य और पूस्ट बकरी लाकर ही सप्लाई करेंगे।


















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