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तालाब में डूबने से दो मासूमों की मौत, गांव में पसरा मातम

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मौत के बाद भी जिंदा होने की उम्मीद में तीन घंटे चला झाड़-फूंक, ग्रामीणों के समझाने पर देर रात हुआ अंतिम संस्कार

हंटरगंज (चतरा, झारखंड)। हंटरगंज प्रखंड के जबड़ा गांव में शुक्रवार देर शाम एक दर्दनाक हादसे में तालाब में डूबने से दो मासूम बच्चों की मौत हो गई। हादसे के बाद भी परिजन बच्चों की मौत मानने को तैयार नहीं थे। बच्चों के जिंदा होने की उम्मीद में करीब तीन घंटे तक झाड़-फूंक और प्रार्थना का सिलसिला चलता रहा। ग्रामीणों के समझाने के बाद देर रात दोनों बच्चों का अंतिम संस्कार किया गया।

मृतकों की पहचान

मृतकों की पहचान जबड़ा गांव निवासी बलराम भुईया के चार वर्षीय पुत्र रणु कुमार और करण सिंह उर्फ कारू सिंह के पांच वर्षीय पुत्र हैप्पी कुमार के रूप में हुई है।

खेलते-खेलते तालाब तक पहुंच गए बच्चे

बताया गया कि दोनों बच्चे घर के आसपास खेल रहे थे। इसी दौरान खेलते-खेलते दोनों घर से करीब आधा किलोमीटर दूर तरवाडीह खेत में बने तालाब के पास पहुंच गए। इसी दौरान दोनों के तालाब में डूबने की आशंका जताई जा रही है।

कुछ देर बाद आसपास के लोगों की नजर तालाब के पानी में पड़े दोनों बच्चों पर पड़ी। इसकी सूचना तत्काल परिजनों को दी गई। परिजन मौके पर पहुंचे और दोनों बच्चों को तालाब से बाहर निकाला। दोनों बच्चे मृत अवस्था में थे। इसके बाद परिजन दोनों बच्चों को घर ले गए।

तीन घंटे तक चला झाड़-फूंक

बच्चों की मौत को स्वीकार करने के बजाय उन्हें जिंदा करने की उम्मीद में झाड़-फूंक शुरू कर दी गई। करीब तीन घंटे तक घर पर झाड़-फूंक और प्रार्थना का दौर चलता रहा। इस दौरान परिजन बच्चों के शरीर में किसी तरह की हलचल होने का इंतजार करते रहे। काफी देर तक कोई हलचल नहीं हुई। इसके बाद ग्रामीणों और आसपास के लोगों ने परिजनों को समझाया और वास्तविक स्थिति स्वीकार करने की बात कही। समझाने-बुझाने के बाद परिजन अंतिम संस्कार के लिए तैयार हुए। देर रात दोनों मासूमों का अंतिम संस्कार कर दिया गया।

गांव में मातम, अंधविश्वास पर उठे सवाल

घटना के बाद जबड़ा गांव में मातम पसरा हुआ है। एक ही गांव के दो बच्चों की मौत ने ग्रामीणों को भी झकझोर कर रख दिया है। घटना के बाद ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी किसी हादसे के बाद झाड़-फूंक और अंधविश्वास के भरोसे रहने की स्थिति पर सवाल उठ रहे हैं। ऐसी स्थिति में समय पर चिकित्सकीय मदद लेना बेहद जरूरी है, ताकि किसी अनहोनी की स्थिति में जरूरी उपचार मिल सके।

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