वर्षों के त्याग और समर्पण से दुर्गोत्सव की परंपरा हुई सुदृढ़
लोहरदगा। लोहरदगा में दुर्गोत्सव की गौरवशाली परंपरा को वर्षों से सुदृढ़ एवं जीवंत बनाए रखने में केंद्रीय दुर्गा पूजा समिति के आदरणीय संरक्षकगण का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। समिति के महामंत्री कुणाल वर्मा ने कहा कि आज लोहरदगा में दुर्गा पूजा जिस भव्यता, गरिमा, अनुशासन और सामाजिक सहभागिता के साथ आयोजित होती है, उसके पीछे वरिष्ठ संरक्षकगण का वर्षों का त्याग, संघर्ष, अथक परिश्रम और दूरदर्शी सोच महत्वपूर्ण आधार रहा है।
उन्होंने कहा कि पूर्व के दौर में पूजा आयोजन के लिए आज जैसी आधुनिक सुविधाएं और संसाधन उपलब्ध नहीं थे। इसके बावजूद समिति के वरिष्ठजनों ने सीमित साधनों में समाज के लोगों को साथ लेकर दुर्गोत्सव की परंपरा को निरंतर आगे बढ़ाया। उन्होंने कठिन परिस्थितियों में भी अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हुए पूजा आयोजन को व्यवस्थित स्वरूप देने के साथ समाज के विभिन्न वर्गों को एक मंच पर लाने का कार्य किया।
कुणाल वर्मा ने कहा कि संरक्षकगण ने दुर्गोत्सव को केवल धार्मिक आयोजन के रूप में नहीं देखा, बल्कि इसे सामाजिक एकता, सांस्कृतिक चेतना और आपसी भाईचारे का माध्यम बनाया। उनकी दूरदर्शी सोच और सामूहिक भावना के कारण समिति की परंपराएं समय के साथ और मजबूत होती गईं।
उन्होंने कहा कि वरिष्ठ संरक्षकगण का अनुभव आज भी समिति के लिए मार्गदर्शक है। उनके द्वारा स्थापित अनुशासन, सेवा भावना, सामाजिक समरसता और जिम्मेदारी की परंपरा नई पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत है। वर्तमान पीढ़ी को उनके संघर्ष और समर्पण से सीख लेकर इस विरासत को आगे बढ़ाने की आवश्यकता है।
कुणाल वर्मा ने कहा कि संरक्षकगण के वर्षों के त्याग और समर्पण को सम्मान देना केवल उनका अभिनंदन करना नहीं, बल्कि उनके द्वारा स्थापित गौरवशाली परंपरा को सुरक्षित रखना भी है। आने वाली पीढ़ियां उनके योगदान को स्मरण करते हुए दुर्गोत्सव की इस सुदृढ़ परंपरा को और समृद्ध करें, यही समिति की प्राथमिकता होनी चाहिए।














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