आईएफसी परियोजना से मिला सहारा, गांव की अन्य महिलाओं के लिए बनीं प्रेरणा स्रोत
कुंदा (चतरा), संवाददाता। कुंदा प्रखंड क्षेत्र के सुदूरवर्ती सरजामातु गांव की अंजू देवी महिला समूह से जुड़कर स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। आईएफसी परियोजना के माध्यम से करीब 100 मुर्गियों का पालन शुरू कर उन्होंने अंडा उत्पादन को अपनी आय का जरिया बनाया है।
आत्मनिर्भरता की बेहतरीन मिसाल बनीं अंजू देवी

ग्रामीण क्षेत्र में रहकर अंजू देवी का यह प्रयास महिला आत्मनिर्भरता की एक बेहतरीन मिसाल पेश कर रहा है। अंजू देवी ने बताया कि ग्रामीण इलाकों में रोजगार के सीमित अवसर हैं, ऐसे में मुर्गी पालन जैसे छोटे व्यवसाय से परिवार की आमदनी में काफी सहयोग मिल रहा है। वह नियमित रूप से मुर्गियों की देखभाल, खान-पान और स्वास्थ्य का ध्यान रखती हैं और अंडा उत्पादन से होने वाली आमदनी से उन्हें आर्थिक रूप से मजबूती मिल रही है।
“महिला समूह से मिला बेहतरीन अवसर” — अंजू देवी
उन्होंने कहा कि महिला समूह से जुड़ने के बाद उन्हें स्वरोजगार के क्षेत्र में आगे बढ़ने का बेहतरीन अवसर मिला। उनका यह प्रयास गांव की अन्य महिलाओं को भी अपने स्तर पर रोजगार शुरू करने के लिए प्रेरित कर रहा है।
आईएफसी परियोजना के तहत मिल रहीं कई सुविधाएं — बीपीएम सतेंद्र कुमार
वहीं बीपीएम सतेंद्र कुमार ने बताया कि आईएफसी परियोजना के माध्यम से किसानों और महिला समूहों को विभिन्न योजनाओं का लाभ दिया जा रहा है। इसके तहत लेयर बर्ड, खेती के बीज सहित अन्य संसाधन उपलब्ध कराए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि आने वाले समय में मैन्युफैक्चरिंग यूनिट, तेल मिल सहित अन्य गतिविधियों को भी बढ़ावा देने की योजना है।
दो आजीविका सेवा केंद्र संचालित
उन्होंने यह भी बताया कि फिलहाल कुंदा प्रखंड के दो संकुल संगठनों के अंतर्गत दो आजीविका सेवा केंद्र संचालित किए जा रहे हैं, जिनके माध्यम से ग्रामीणों को आवश्यक कृषि सामग्री और खेती से जुड़े टूल उपलब्ध कराने का कार्य किया जा रहा है।
ग्रामीण क्षेत्रों में महिला समूहों के माध्यम से इस तरह की आजीविका गतिविधियों को बढ़ावा मिलने से महिलाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर मिल रहे हैं। अंजू देवी का मुर्गी पालन इसी सफल प्रयास का एक जीता-जागता उदाहरण है।
न्यूज स्केल लाइव — भरोसे की पहचान















Total Users : 1231110
Total views : 3082617