पंचायत के फरमान से मचा हड़कंप, एसपी कार्यालय पहुंचकर पीड़ितों ने लगाई न्याय की गुहार
छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले के काचरी गांव में चोरी की एक पुरानी घटना के बाद चार परिवारों के कथित सामाजिक बहिष्कार का मामला सामने आया है। पीड़ित परिवारों का आरोप है कि ग्रामीण बैठक में शामिल नहीं होने को आधार बनाकर उनके खिलाफ सामाजिक पाबंदियां लगा दी गईं। मामले को लेकर चारों परिवारों ने बेमेतरा पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचकर शिकायत दर्ज कराते हुए कार्रवाई की मांग की है।
सात लाख की चोरी से शुरू हुआ विवाद

पीड़ित परिवारों के अनुसार, विवाद करीब एक वर्ष पुरानी चोरी की घटना से जुड़ा है। बताया गया कि रेखा साहू के घर से करीब सात लाख रुपये के सोने-चांदी के आभूषण और नकदी चोरी हुई थी। परिवार का दावा है कि मामले में गांव के ही एक व्यक्ति पर आरोप लगा और उसने कथित तौर पर चोरी की बात स्वीकार की। इसके बाद ग्रामीणों की ओर से मामले को लेकर एक सामाजिक बैठक बुलाए जाने की बात सामने आई। पीड़ित परिवारों के अनुसार, किसी कारणवश चारों परिवार बैठक में शामिल नहीं हो सके।
बैठक में नहीं पहुंचने पर बहिष्कार का आरोप
पीड़ितों का आरोप है कि बैठक में अनुपस्थित रहने को आधार बनाकर उनके परिवारों का सामाजिक बहिष्कार कर दिया गया। शिकायतकर्ताओं रेखा साहू, रमेश कुमार, अर्जुन दास और कलाराम बाई ने एसपी कार्यालय में ज्ञापन देकर पूरे मामले की जांच कराने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। परिवारों का कहना है कि बहिष्कार के बाद ग्रामीणों ने उनके साथ सामाजिक संपर्क और सामान्य व्यवहार बंद कर दिया है, जिससे उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

संबंध रखने वालों पर भी जुर्माने का आरोप
पीड़ित परिवारों ने पंचायत की ओर से कथित तौर पर लगाए गए आर्थिक दंड को लेकर भी शिकायत की है। उनके अनुसार, बहिष्कृत परिवारों से संबंध रखने वाले लोगों पर 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाने तथा इसकी जानकारी देने वाले व्यक्ति पर 2,500 रुपये का दंड लगाने की बात कही गई। पीड़ितों ने इन कथित पाबंदियों को लेकर प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।
एसपी कार्यालय से जांच के निर्देश

मामले की शिकायत मिलने के बाद पुलिस अधीक्षक कार्यालय ने इसे गंभीरता से लेते हुए जांच के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों के अनुसार, साजा थाना प्रभारी को मामले की जांच के लिए निर्देशित किया गया है। पुलिस अब शिकायत में लगाए गए आरोपों, कथित पंचायत के निर्णय और आर्थिक दंड से संबंधित तथ्यों की जांच करेगी। जांच में आरोप सही पाए जाने पर संबंधित लोगों के खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल पुलिस जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि सामाजिक बहिष्कार और कथित आर्थिक दंड का निर्णय किन लोगों ने लिया और इसकी वास्तविक परिस्थितियां क्या थीं।













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