मोटर दुर्घटना मामलों में पीड़ितों को समय पर मिले मुआवजा : राजकमल मिश्रा
एमएसीटी मामलों को लेकर व्यवहार न्यायालय परिसर में कार्यशाला, अधिकारियों को दी गई आवश्यक जानकारी
लोहरदगा। झालसा, रांची एवं प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह अध्यक्ष डालसा राजकमल मिश्रा के आदेशानुसार शनिवार को व्यवहार न्यायालय परिसर लोहरदगा स्थित सभाकक्ष में मोटर एक्सीडेंट क्लेम केस (एमएसीटी) को लेकर कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्घाटन प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह अध्यक्ष डालसा राजकमल मिश्रा, डीजे प्रथम स्वयंभू, डीजे द्वितीय नीरजा असरी, एसडीओ अमित कुमार, डीएसपी दिवाकर कुमार सिंह एवं जिला अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष हेमंत कुमार सिन्हा ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया।

मौके पर प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह अध्यक्ष डालसा राजकमल मिश्रा ने कहा कि सड़क दुर्घटना में किसी परिवार का सदस्य खो जाना अपूरणीय क्षति है। इसकी भरपाई संभव नहीं है, लेकिन पीड़ित परिवार के आश्रितों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराकर उन्हें कठिन समय में सहारा दिया जा सकता है। उन्होंने कहा कि यह केवल कानूनी प्रक्रिया नहीं, बल्कि जरूरतमंद परिवार की मदद, परोपकार और मानवीय दायित्व से जुड़ा विषय है।
उन्होंने कहा कि दुर्घटना से जुड़े मामले अन्य मामलों से अलग होते हैं। ऐसे मामलों में अनुसंधान के दौरान मानवीय पहलू को ध्यान में रखते हुए संवेदनशीलता के साथ कार्य करने की आवश्यकता है। जांच अधिकारी की भूमिका महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि सही और समयबद्ध जांच एवं आवश्यक दस्तावेजों की उपलब्धता से पीड़ित परिवार को समय पर मुआवजा दिलाने में मदद मिलती है।
उन्होंने पुलिस अधिकारियों से वाहन जांच अभियान के दौरान वाहनों के इंश्योरेंस की भी जांच करने तथा लोगों को यातायात नियमों एवं वाहन बीमा के महत्व के प्रति जागरूक करने की अपील की। उन्होंने एफएआर (फर्स्ट एक्सीडेंट रिपोर्ट) के संबंध में भी पुलिस अधिकारियों को आवश्यक जानकारी दी।

डीएसपी दिवाकर कुमार सिंह ने कहा कि सड़क सुरक्षा को लेकर आम लोगों के बीच जागरूकता बढ़ाने की जरूरत है। इस विषय को प्राथमिकता के आधार पर लेकर कार्य किया जाना चाहिए। दुर्घटना से संबंधित रिपोर्ट समय पर जमा होने से पीड़ित परिवार को सहायता एवं मुआवजा दिलाने की प्रक्रिया में तेजी आती है।
एसडीओ अमित कुमार ने कहा कि जिन परिवारों का दुर्घटना के कारण सहारा छिन गया है, उन्हें सरकारी प्रावधानों के तहत सहायता दिलाने का प्रयास किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि हिट एंड रन तथा एमएसीटी मामलों को लेकर अभी भी बड़ी संख्या में लोगों को जानकारी नहीं है। जागरूकता के अभाव में कई लोग उपलब्ध प्रावधानों का लाभ नहीं ले पाते हैं। उन्होंने एमएसीटी मामलों में वाहन के इंश्योरेंस को महत्वपूर्ण बताते हुए लोगों को इसके प्रति जागरूक करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने हिट एंड रन मामलों में निर्धारित मुआवजा तथा एमएसीटी मामलों में उपलब्ध मुआवजा प्रावधानों की जानकारी भी दी।
अधिवक्ता राकेश अखौरी ने यातायात नियमों का पालन करने पर जोर देते हुए कहा कि विद्यालय स्तर से ही बच्चों को सड़क सुरक्षा एवं यातायात नियमों के प्रति जागरूक किया जाना चाहिए, ताकि बच्चे स्वयं भी नियमों का पालन करें और अपने अभिभावकों को भी जागरूक कर सकें। उन्होंने अनुसंधानकर्ताओं से आवश्यक दस्तावेज समय पर जमा करने की अपील करते हुए कहा कि पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने में सभी संबंधित लोगों को अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए।

कार्यशाला का संचालन डालसा सचिव मनोरंजन कुमार ने किया। उन्होंने कहा कि कार्यशाला का वास्तविक उद्देश्य तभी पूरा होगा, जब दुर्घटना से पीड़ित किसी परिवार को इसका प्रत्यक्ष लाभ मिल सके। दुर्घटनाओं को पूरी तरह समाप्त नहीं किया जा सकता, लेकिन जागरूकता एवं सावधानी से इन्हें काफी हद तक कम किया जा सकता है।
उन्होंने सड़क दुर्घटना के बाद गोल्डन आवर्स के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि घायल व्यक्ति की समय पर मदद करना प्रत्येक व्यक्ति का दायित्व है। उन्होंने कहा कि हमारा प्रयास ऐसा होना चाहिए जिससे जरूरतमंद व्यक्ति की मदद हो और कार्य से आत्मसंतुष्टि भी मिले। उन्होंने बताया कि डालसा के अंतर्गत कार्यरत पीएलवी अपने-अपने कार्यक्षेत्र में लगातार लोगों को सड़क सुरक्षा, कानूनी सहायता एवं अधिकारों के प्रति जागरूक कर रहे हैं।
कार्यशाला में लोक अभियोजक, जिला अधिवक्ता संघ के सचिव, सदर अस्पताल के चिकित्सक, जिला परिवहन विभाग के अधिकारी, एलएडीसीएस के अधिवक्ता, पैनल अधिवक्ता, विभिन्न थानों के पुलिस पदाधिकारी एवं डालसा के पीएलवी सहित अन्य लोग उपस्थित थे।



















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