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जर्जर आंगनबाड़ी में खतरे के साये में बचपन

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टपकती छत, गिरता प्लास्टर और डेढ़ साल से बंद चापाकल; 30 मासूमों की जान जोखिम में

चतरा/हंटरगंज। चतरा जिले के हंटरगंज प्रखंड अंतर्गत डुमरी पंचायत के देवरिया गांव स्थित आंगनबाड़ी केंद्र बदहाल व्यवस्था और प्रशासनिक उदासीनता की तस्वीर बन गया है। वर्ष 2007 में निर्मित यह भवन पूरी तरह जर्जर हो चुका है। छत का प्लास्टर लगातार गिर रहा है और बारिश के दौरान पूरी छत टपकती है। इसके बावजूद करीब 30 बच्चे प्रतिदिन इसी भवन में शिक्षा और पोषण सेवाएं लेने को मजबूर हैं, जिससे हर समय किसी बड़े हादसे की आशंका बनी रहती है।

ग्रामीणों ने बताया कि भवन की जर्जर स्थिति की जानकारी कई बार संबंधित विभागीय अधिकारियों को दी गई, लेकिन अब तक न तो मरम्मत कराई गई और न ही नए भवन के निर्माण की दिशा में कोई ठोस पहल की गई। विभागीय लापरवाही के कारण मासूम बच्चों की सुरक्षा खतरे में बनी हुई है।

समस्या केवल भवन तक सीमित नहीं है। केंद्र में पेयजल की भी गंभीर किल्लत है। परिसर में जलमीनार नहीं है और एकमात्र चापाकल पिछले डेढ़ वर्ष से खराब पड़ा है। ऐसे में बच्चों को पीने के पानी के लिए आसपास के घरों पर निर्भर रहना पड़ता है। वहीं मध्यान्ह भोजन तैयार करने के लिए भी रसोइया को दूसरे घरों से पानी लाना पड़ता है।

आंगनबाड़ी सेविका सबरी देवी ने बताया कि भवन की जर्जर स्थिति और पेयजल संकट की जानकारी कई बार लिखित एवं मौखिक रूप से अपने सुपरवाइजर को दी गई है, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने कहा कि भवन की हालत इतनी खराब है कि बच्चों को मजबूरी में बरामदे में बैठाकर पढ़ाना पड़ रहा है।

सहायिका फुलवा देवी ने बताया कि प्रतिदिन आसपास के घरों से पानी लाना पड़ता है, जिससे केंद्र का संचालन प्रभावित होता है और काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि जर्जर भवन को तत्काल ध्वस्त कर नए आंगनबाड़ी भवन का निर्माण कराया जाए तथा पेयजल की स्थायी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। उनका कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो किसी भी दिन बड़ा हादसा हो सकता है। उन्होंने चेतावनी दी है कि मांगें पूरी नहीं होने पर आंदोलन किया जाएगा। इस संबंध में हंटरगंज प्रखंड विकास पदाधिकारी सह सीडीपीओ निखिल गौरव कमान कच्छप से दूरभाष पर कई बार संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनका पक्ष प्राप्त नहीं हो सका।

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