लोहरदगा।—छात्र विकास परिषद के संयोजक एवं युवा समाजसेवी रामाधार पाठक ने बलदेव साहू महाविद्यालय, लोहरदगा में स्नातकोत्तर (पीजी) की पढ़ाई बंद किए जाने पर गहरी चिंता एवं आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि यह निर्णय लोहरदगा जैसे सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े जिले के हजारों विद्यार्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है।
उन्होंने कहा कि लोहरदगा एक दबा-कुचला एवं पिछड़ा जिला है, जहाँ आज भी कई क्षेत्रों में मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। यह आदिम जनजातीय बहुल क्षेत्र है, जहाँ बड़ी संख्या में गरीब, किसान, मजदूर, आदिवासी और वंचित परिवार निवास करते हैं। ऐसे परिवारों के छात्र-छात्राओं के लिए उच्च शिक्षा प्राप्त करने का एकमात्र सुलभ माध्यम स्थानीय महाविद्यालय हैं। पीजी की पढ़ाई बंद होने से इन विद्यार्थियों के सामने अपनी पढ़ाई बीच में छोड़ने या आर्थिक बोझ उठाकर दूसरे शहरों में जाने की विवशता उत्पन्न होगी, जो अधिकांश परिवारों के लिए संभव नहीं है।
रामाधार पाठक ने कहा कि एक ओर सरकार उच्च शिक्षा के विस्तार और समावेशी विकास की बात करती है, वहीं दूसरी ओर पिछड़े और आदिवासी क्षेत्रों से उच्च शिक्षा के अवसर समाप्त किए जा रहे हैं। यह सामाजिक न्याय और समान अवसर के सिद्धांतों के विपरीत है। किसी भी विकसित समाज की पहचान उसके शिक्षा संस्थानों से होती है, न कि उन्हें सीमित करने से।
उन्होंने कहा कि लोहरदगा के विद्यार्थियों की आर्थिक और सामाजिक परिस्थितियों को देखते हुए बलदेव साहू महाविद्यालय में पीजी की पढ़ाई बंद करना शिक्षा के अधिकार पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाला निर्णय है। यदि उच्च शिक्षा को जिले से बाहर धकेला जाएगा, तो इसका सबसे अधिक दुष्प्रभाव गरीब, आदिवासी एवं ग्रामीण पृष्ठभूमि के छात्रों पर पड़ेगा।
छात्र विकास परिषद के संयोजक रामाधार पाठक ने मांग की कि बलदेव साहू महाविद्यालय में पूर्ववत स्नातकोत्तर कक्षाओं का संचालन तत्काल बहाल किया जाए तथा जिले में उच्च शिक्षा के संसाधनों को और सशक्त बनाया जाए।
उन्होंने यह भी घोषणा की कि छात्र विकास परिषद का एक प्रतिनिधिमंडल शीघ्र ही झारखंड के माननीय राज्यपाल महोदय से मुलाकात कर इस गंभीर विषय पर ज्ञापन सौंपेगा और लोहरदगा सहित आदिम जनजातीय एवं पिछड़े क्षेत्रों के विद्यार्थियों के हित में उच्च शिक्षा की व्यवस्था बहाल करने तथा बलदेव साहू महाविद्यालय में पीजी की पढ़ाई पुनः प्रारंभ कराने हेतु हस्तक्षेप का आग्रह करेगा।
रामाधार पाठक ने कहा,
> **”लोहरदगा के छात्रों को उच्च शिक्षा से वंचित करना केवल एक शैक्षणिक निर्णय नहीं, बल्कि सामाजिक असमानता को और गहरा करने वाला कदम है। आदिम जनजातीय एवं पिछड़े क्षेत्र के विद्यार्थियों के लिए शिक्षा ही विकास का सबसे सशक्त माध्यम है। छात्र विकास परिषद शिक्षा के इस अधिकार की रक्षा के लिए लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक तरीके से संघर्ष करेगी और छात्रों की आवाज़ को सड़क से लेकर राजभवन तक बुलंद करेगी।”**




















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