मयूरहंड(चतरा)। जिले के मयूरहंड प्रखंड अंतर्गत ढोढी-मंधनिया में शारदीय नवरात्र में दुर्गा पूजा का इतिहास 45 वर्ष पुराना है। वर्ष 1980 से झोपड़ी में प्रतिमा स्थापित कर मां दुर्गे की आराधना शुरू की गई थी। गांव में दुर्गा पूजा शुरू करने का मुख्य उद्देश्य, गांव के बुजुर्ग महिला व पुरूष को यहां से दस से पंद्रह किलोमीटर दूर इटखोरी, मयूरहंड या पदमा राजा किला जाकर पूजा करना था। इस दौरान रास्ते में कई लोगों के साथ चोरी की घटना घटी और उस समय मंधनिया पंचयात के मुखिया विसंभर प्रसाद सिंह, सरपंच गोविंद प्रसाद सिंह, सारंधर प्रसाद सिंह, सरयू महतो, रामलाल महतो, फागु महतो, भिक्खो महतो, कन्नी महतो, रामजीत महतो मुख्य रूप से बैठक कर पूजा प्रारंभ करने की पहल की और चंदा इकट्ठा कर पूजा प्रारंभ किया। उस समय ग्रामीणों ने 11 रुपया चंदा सहयोग कर प्रारंभ किया था। अभी नवरात्र के छठे दिन मां दुर्गे के सजावट चढ़ाने के लिए श्रद्धालुओं द्वारा बोली लगाई जाती है। यह परंपरा शुरुआती दौर से ही जारी है। इस बार माता की प्रतिमा सजावट की बोली लगाने के 16 वर्षाे बाद मंधनिया निवासी गोपाल दांगी के पुत्र मोहित मौर्या को सजावट चढ़ाने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। वंही दस वर्ष बाद संजय ठाकुर को माता की प्रतिमा निर्माण का अवसर मिला। पूजा समिति के लगातार अध्यक्ष के रूप में पच्चीस वर्षाे से दायित्व का निर्वहन डीलर बाबूलाल दांगी द्वारा किया जा रहा है। इस सम्बन्ध में श्री दांगी ने बताया की 2040 तक माता रानी का प्रतिमा सजावट का नंबर लगा हुवा है। ग्रामीणों के सहयोग से शांति पूर्ण मेले का आयोजन किया जाता है। मेले में पदमा, मयूरहंड, इटखोरी, कटकमसांडी, चौपारण समेत अन्य प्रखण्ड से लोग पहुंचते हैं। आयोजन में युवाओं का भरपूर सहयोग रहता है।
45 वर्षाे से ढोढी-मंधनिया हो रही है शारदीय नवरात्रा, मां दुर्गे के प्रतिमा सजावट की लगती है बोली

On: September 28, 2025 8:41 PM

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