चतरा। हिंसा के शिकार व मुसकील में रह रेह नाबालिगों के लिए सरकरी स्तर पर भले ही करोंड़ों रुपये खर्च कर विभिन्न प्राकर की योजनाएं जिला स्तर पर संचालीत की जा रही हैं। पर इसका लाभ चतरा जिले के पीडत किशोर-किशोरियों को नही मिल पाता है। ताजा मामला जिले में लावालौंग प्रखंड क्षेत्र के एक पंचायत का है। जहां एक पंन्द्रह वर्षीय दलित नाबालिक यौन शोषण के कारण गर्भवती हो गई है। उक्त विषय को लेकर लड़की के पिता ने लावालौंग थाना में आवेदन दिया है। मिली जानकारी के अनुसार दैनिक मजदूरी के लिए मकई कोडने के लिए नाबालिग अपनी भाभी के साथ शिवराजपुर गई थी, जहां सुनिल कुमार नामक युवक शादी करने की बात कहकर यौन शोषण किया और गर्भवती हो गई। इसके बाद लावालौंग थाने में आवेदन देकर न्याय की गुहार लगाई परंतु यहां से भी पांच दिन बितने के बाद भी कोई कारवाई नहीं की गई। इधर जिला परिषद सदस्य प्रसाद भारती ने जानकारी देते हुए कहा है कि किसी भी जाति के लड़की का इज्जत बिकाऊ नहीं है। जिसे पैसे से खरीद लिया जाए। मैं पुलिस व प्रशासन से अपील करता हूं कि इस मामले में सख्त से सख्त कारवाई की जाय। इधर सुनिल के पिता आरोपों को गलत बताया है। दुसरी ओर जिले में बाल संरक्षण योजना के तहत ऐसे किशोर व किशोरियों को चिन्हीत कर उन्हें न्याय दिलाने की जिम्मेवारी है। लेकिन लगता है जिले में उक्त विभाग के कार्य कागजों तक सिमट कर रह गया है। तभी ऐसे बच्चों को न्याय दिलाने के लिए बाल संरक्षण विभाग पहल नही करता है। साथ ही केसीएफ द्वारा पोषित स्वंयसेवी संस्था भी डक्त थाना खे में बाल हिंसा, बाल विवाह आदि के जागरुक्ता को लेकर कार्यक्रम चला रही है। लेकिन पीड़ित बच्चों से बाल संरक्षण विभाग के साथ संस्था भी अनभीग्य है। जबकी ऐसे लापरवाही के लिए किशोर न्याय अधिनियम, आर्दश नियम के साथ पोक्सो एक्ट में संबंधितों के विरुद्ध कार्रवाई का प्रावधान है। ऐसे में अब देखना है कि मीडिया में मामला आने के बाद भी विभाग की निंद खुलती है या नहीं।
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