कथावाचक पंडित रामसेवक पाठक ने बताया श्रीमद्भागवत कथा का सार, कहा कलयुग में मोक्ष प्राप्ति का एकमात्र साधन है श्रीमद्भागवत कथा श्रवण
लोहरदगा। शहरी क्षेत्र के हटिया गार्डन स्थित श्री हरिबाबा काली मंदिर में 07 दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का समापन शनिवार को हो गया। महाआरती, प्रसाद वितरण के साथ कथा का विसर्जन किया गया। पिछले सात दिनों से मंदिर परिसर में पहुचकर श्रद्धालु भक्त कथा का श्रवण कर रहे थे। कथावाचक रामसेवक पाठक ने बताया कि कलयुग में भगवान का नाम की महिमा का प्रभाव ऐसा है कि बस इनके नाम लेने से ही मोक्ष की प्राप्ति सरलता से प्राप्त किया जा सकता है। उन्होंने तमाम भक्तजनों से अपील किया कि धर्म आस्था के प्रति सजग हो। भगवान हरि का ध्यान करें और श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण कर जीवन ने उतारने का प्रयास करें। मानव जीवन में भक्ति से मन की शान्ति संभव है। कथा के सातवे दिन अखरूर व उद्धव जी को ब्रह्म ज्ञान की प्राप्ति, भगवान का मथुरा गमन, कंस चाणूर दैत्यों का वध का वर्णन, अग्रसेन महाराजा समेत अन्य राजाओं की मुक्ति, भगवान का देवकी बासुदेव से मिलन, भगवान का राज्याभिषेक, भगवान का परमधाम गमन, श्रीमद्भागवत कथा का सप्ताह यज्ञ कथा का महत्व का वर्णन, कलयुग के प्रभाव का वर्णन किया गया। इसके साथ ही कथा का समापन किया गया। गौरतलब है कि कथा 12 मई से शुरू हुई थी जो 19 मई तक चली। कथा के पहले दिन श्रीमद्भागवत महात्म्य , गौकर्ण उपाख्यान, देवर्षि नारद का चरित्र, सुखदेव मुनी का चरित्र का वर्णन किया गया। दूसरे दिन अश्वत्थामा द्वारा द्रोपदी के पुत्रों का मारा जाना, अश्वत्थामा का मान मर्दन, राजा परीक्षित का गर्भ में रक्षा बताई गई। तीसरे दिन श्रीकृष्ण का द्वारिका गमन, पांडवो का परमधाम गमन, परीक्षित द्वारा कलयुग का दमन, चतुश्लोकी भागवत का उपदेश, मनु के कन्याओं का वँशो का वर्णन, दक्ष यज्ञ विध्वंस, भक्त ध्रुव चरित्र, राजा अंग का चरित्र, महाराजा पृथु का आविर्भाव, पुनर्जन्म व उपाख्यान पर कथा सुनाई गई। चौथे दिन गजेंद्र द्वारा भगवान की स्तुति, दुर्वासा ऋषि द्वारा इंद्र को श्राप, समुद्र मंथन, देवासुर संग्राम, वामन अवतार पर कथा सुनाई गई। पांचवे दिन सूर्यवंशी राजाओं के चरित्र का वर्णन, माँ गंगा का पृथ्वी पर अवतरण, वासुदेव देवकी का चरित्र , देवताओं द्वारा भगवान के गर्भ में स्तुति, भगवान का पृथ्वी पर अवतरण, बासुदेव जी के द्वारा भगवान को ब्रज में छोड़कर आना, गोकुल में भगवान का जन्मोत्सव व बाल कीड़ाये आदि का वर्णन किया। छठे दिन भगवान श्री कृष्ण की बाल क्रीड़ाएं, मुख मंडल में ब्रह्मांड का दर्शन, कालिया नाग मर्दन, अघासुर, बकासुर वध, पूतना वध, भगवान का रासलीला का वर्णन, कुब्जा का उद्धार का वर्णन किया गया। मौके पर देवेंद्र पाठक, आनन्द पाठक, जितेंद्र पाठक के अलावे बड़ी संख्या में भक्तजन मौजूद थे।




















Total Users : 786452
Total views : 2480463