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*आरटीआई से मालूम हुआ कि रायडीह प्रखंड कार्यालय सह अंचल परिसर में यूकोलिप्टस वृक्षों का पातन और उठाव में भारी गड़बड़ी – राजस्व की हेराफेरी आई सामने टेंडर अभिकर्ता ने भी जीएसटी की चोरी की* * गुमला डीएफओ ने कहा केवल कटे हुए 10 वृक्षों का मूल्यांकन किया गया है बाकी संबंधित विभाग के पदाधिकारियों की है यह मामला* * झारखण्ड फोरेस्ट डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड रांची ने कहा मामला जूडिशल साक्ष्य सामने आया तो करेंगे कार्रवाई*

On: February 20, 2024 7:52 AM
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झारखण्ड/गुमला -रायडीह प्रखंड सह अंचल कार्यालय परिसर में काटे गए यूकोलिप्टस वृक्षों को लेकर आर टी आई से समय सीमा पर मांगी गई जन सूचना अधिकार अधिनियम 2005 के तहत रायडीह प्रखंड विकास पदाधिकारी सह जन सूचना पदाधिकारी द्वारा जानकारी उपलब्ध नहीं कराने पर आर टी आई कार्यकर्ता अजय कुमार शर्मा ने प्रथम अपीलीय अधिकारी सह उप विकास आयुक्त से निःशुल्क मांगी गई जानकारी उपलब्ध कराने की मांग पर कार्यालय प्रखंड विकास पदाधिकारी सा जन सूचना पदाधिकारी रायडीह से ज्ञापन संख्या 81 दिनांक 10 फरवरी 2024 को कुल‌ 6 बिंदुओं पर जानकारी उपलब्ध कराने के साथ ही यह मामला और संगीन बन कर सामने आया है यहां बताते चलें कि रायडीह प्रखंड सह अंचल कार्यालय परिसर में कुल 46 यूकोलिप्टस वृक्षों को पातन करने को लेकर पूर्व अंचलाधिकारी ने दिनांक को गुमला वन प्रमंडल पदाधिकारी को पत्राचार कर वृक्षों का पातन करने की अनुमति मांगी थी इसके आलोक में गुमला वन प्रमंडल पदाधिकारी ने यूकोलिप्टस वृक्षों का पातन एवं नीलामी प्रक्रिया के लिए संबंधित विभाग झारखण्ड फोरेस्ट डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड रांची को रायडीह अंचलाधिकारी से प्राप्त आवेदन को वृक्षों का पातन करने की गाइडलाइंस की मांग रखी थी इसके आलोक में झारखण्ड फोरेस्ट डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड रांची द्वारा गुमला वन प्रमंडल पदाधिकारी एवं रायडीह प्रखंड सह अंचल कार्यालय को नियमावली एवं गाइडलाइन जारी करते हुए प्रयोक्ता एजेंसी अंचलाधिकारी रायडीह को बनाते हुए वृक्षों का पातन करने एवं लॉट लगाने के बाद नियमानुसार मूल्यांकन कर नीलामी प्रक्रिया का दिशानिर्देश जारी किया गया था वहीं झारखण्ड फॉरेस्ट डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड रांची से प्राप्त कार्य आदेश को पूरा करने के लिए रायडीह प्रखंड सह अंचल कार्यालय परिसर में यूकोलिप्टस वृक्षों का पातन करने के लिए वन प्रमंडल विभाग के वन प्रमंडल पदाधिकारी ने रायडीह अंचलाधिकारी से सम्पत्ति चिन्ह का रजिस्ट्रेशन कराने के लिए पत्राचार किया गया था पर रायडीह अंचल कार्यालय में कोई भी सम्पत्ति चिन्ह उपलब्ध नहीं होने पर गुमला अनुमंडल पदाधिकारी कार्यालय से तात्कालीन अंचलाधिकारी द्वारा पत्राचार करते हुए सम्पत्ति चिन्ह की मांग रखी गई थी इसके आलोक में गुमला अनुमंडल पदाधिकारी ने रायडीह अंचलाधिकारी को पत्राचार करते हुए सम्पत्ति चिन्ह उपलब्ध नहीं होने का हवाला देते हुए दिशानिर्देश जारी किया गया था कि वन प्रमंडल विभाग द्वारा वृक्षों का पातन करने के लिए मांगी गई सम्पत्ति चिन्ह बनवा कर रजिस्ट्रेशन करा लें।
‌रायडीह के तात्कालिक अंचलाधिकारी ने सम्पत्ति चिन्ह बनाने के लिए अजय कुमार शर्मा को विभागीय आदेश जारी किए वहीं तात्कालीन अंचलाधिकारी का तबादला हो गया और रायडीह प्रखंड सह अंचल अधिकारी के रूप में अमित कुमार मिश्रा का पदस्थापन रायडीह में हो गया जब सम्पत्ति चिन्ह उपलब्ध होने पर वर्तमान अंचलाधिकारी से सम्पत्ति चिन्ह बनवा लेने की जानकारी दी गई तो उन्होंने कहा कि इसकी कोई जरूरत नहीं है और नाजीर ने भी बनवाया गया सम्पत्ति चिन्ह के लिए भुगतान उपलब्ध नहीं होने की बात कही गई।
‌इसके बाद नवनियुक्त अंचलाधिकारी सह प्रखंड विकास पदाधिकारी अमित कुमार मिश्रा द्वारा दिनांक को यूकोलिप्टस वृक्षों का पातन करने के लिए आम नीलामी सूचना पट पर लगाम गया जो नियम को ताक पर रखकर किया गया था और इसकी जानकारी तात्कालीन वन प्रमंडल पदाधिकारी श्री कांत को दी जाने पर यह नीलामी जो वृक्षों का पातन एवं उठाव दोनों किया गया था रद्द करना पड़ा था।

इसके बाद पुनः वर्तमान अंचलाधिकारी सह रायडीह प्रखंड विकास पदाधिकारी द्वारा बिना पातन टेंडर प्रक्रिया के करीब 10 वृक्षों का पातन जिले के वरिय अधिकारियों की समन्वय समिति के आदेश पर पातन कर दिया गया लेकिन इसकी नीलामी प्रक्रिया करने के लिए वन प्रमंडल विभाग से एक मूल्यांकन किया गया।

इस मूल्यांकन की आड़ में फिर से एक टेंडर प्रक्रिया शुरू की गई जिसमें 10 वृक्षों का जो पातन कर दिया गया था वन विभाग प्रमंडल गुमला द्वारा निर्धारित दर पर आम नीलामी सूचना प्रखंड विकास पदाधिकारी सह अंचलाधिकारी रायडीह द्वारा कार्यालय के सूचना पट पर लगाया गया इसके साथ ही परिसर में अवस्थित 36 विशाल यूकोलिप्टस वृक्षों की भी पातन एवं उठाव की नीलामी न्यूनतम किलोग्राम दर से आम नीलामी में शामिल करते हुए सारे नियमों को ताक पर रखकर सरकारी सम्पत्ति का बिक्री करने में वन प्रमंडल पदाधिकारी से पत्राचार एवं झारखंड फोरेस्ट डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड रांची की गाइडलाइंस को दरकिनार करते हुए निविदा प्राप्त अभिकर्ता से मिलकर हेरा-फेरी करते हुए झारखण्ड सरकार को प्राप्त होने वाले राजस्व संग्रहण की जगह अपनी कमाई का जरिया बनाया गया।

इस हेरा-फेरी को लेकर एवं राजस्व संग्रहण की जगह अवैध तरीके से यूकोलिप्टस वृक्षों का पातन करने पर रोक लगाने की मांग को लेकर गुमला उपायुक्त को दिनांक को आदिवासी छात्र संघ जिलाध्यक्ष अशोक कुमार भगत ने आवेदन देकर मांग कर जांच करते हुए आवश्यक कार्रवाई करने की मांग रखी गई थी। लेकिन इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई और हेरा-फेरी करने वाले का हौसला बढ़ता गया।

इस मामले पर कोई कार्रवाई नहीं होने पर आरटीआई कार्यकर्ता अजय कुमार शर्मा ने जन सूचना अधिकार अधिनियम 2005 के तहत रायडीह प्रखंड पदाधिकारी सह अंचलाधिकारी से यूकोलिप्टस वृक्षों का पातन एवं नीलामी में न्यूनतम एवं निविदा प्राप्त करने वाले की दर एवं धर्मकांटा की पर्ची की छायाप्रति की मांग शुल्क जमा करते हुए आरटीआई से मिली जानकारी अनुसार सिर्फ नीलामी प्रक्रिया ही गलत नहीं पाया गया है बल्कि जिन वाहनों में यूकोलिप्टस वृक्षों के बोटे और जलावन लोड किया गया था उपलब्ध सूचना मिलने से यह गबन का मामला बन कर सामने आया है एक ही नंबर का वाहन का कांटाघर में वजन में हेरा-फेरी चरम सीमा पर पाई गई है और साथ ही सबसे बड़ी बात कि कोई भी सम्पत्ति जो सरकारी होती है उसका मूल्यांकन किसी संबंधित विभाग से मूल्यांकन किया जाता है।

इस संबंध में वर्तमान गुमला वन प्रमंडल पदाधिकारी अहमद बेलाल अनवर से हुई बातचीत में उन्होंने कहा है कि रायडीह प्रखंड कार्यालय में केवल कटे हुए 10 वृक्षों का मूल्यांकन किया गया है और उन्होंने जिला के आला अधिकारियों को भी स्पष्ट कर दिया था कि सरकारी कैंपस में लगे हुए यूकोलिप्टस वृक्षों का पातन करने और बेचने में वन प्रमंडल विभाग का कुछ भी लेना-देना नहीं है यदि कोई कानूनी कार्रवाई होगी तो संबंधित विभाग के पदाधिकारी स्वयं जिम्मेदार होंगे।
वहीं झारखण्ड फॉरेस्ट डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड रांची से निकले रायडीह प्रखंड सह अंचल कार्यालय परिसर में यूकोलिप्टस वृक्षों का पातन एवं नीलामी प्रक्रिया के लिए दिया गया मार्गदर्शन एवं गाइडलाइन में कहा गया है कि यह जूडिशल मामला बन सकता है यदि कोई इस मामले को लेकर आगे आते हैं तो।

इस मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग गुमला उपायुक्त से करने के लिए जल्द ही आवेदन देकर राजस्व की हेराफेरी करने वाले के उपर कानूनी मांग भी की जाएगी।

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