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भाकपा (माले) का महा-आक्रोश मार्च: बिरसा मुंडा के शहादत दिवस पर डीएफओ दफ्तर का घेराव; कॉरपोरेट को वन भूमि देने और हाथियों के आतंक पर जताया विरोध

On: June 9, 2026 10:17 PM
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कॉलेज मैदान से निकली रैली में उमड़ा जनसैलाब, पूर्व विधायक विनोद सिंह और खुशबू कुमारी ने भरी हुंकार; पीढ़ियों से रह रहे वनवासियों पर झूठे मुकदमे बंद करने की मांग; एनओसी के फेर में बंद पावर ग्रिड चालू करने की दी चेतावनी

न्यूज स्केल लाइव ब्यूरो

चतरा: क्रांतिकारी अमर शहीद ‘धरती आबा’ भगवान बिरसा मुंडा के 126वें शहादत दिवस के ऐतिहासिक अवसर पर मंगलवार को चतरा जिला मुख्यालय में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) लिबरेशन यानी भाकपा (माले) के बैनर तले एक विशाल जन-आक्रोश मार्च और गर्जनापूर्ण प्रदर्शन का आयोजन किया गया।

चतरा कॉलेज मैदान से लेकर वन प्रमंडल पदाधिकारी (DFO) कार्यालय तक निकाले गए इस विशाल मार्च में जिले के विभिन्न सुदूरवर्ती ग्रामीण और जंगली क्षेत्रों से आए सैकड़ों की संख्या में गरीब मजदूर, किसान, महिलाएं, पारंपरिक वनवासी, आदिवासी और युवा शामिल हुए। हाथों में पार्टी के लाल झंडे और अपनी ज्वलंत मांगों से संबंधित तख्तियां लिए आंदोलनकारियों ने गगनभेदी और आक्रामक नारों के साथ पूरे चतरा शहर को गुंजायमान कर दिया।

सड़कों पर उतरा लाल झंडा, उत्तरी और दक्षिणी वन प्रमंडल पदाधिकारियों को सौंपा मांग-पत्र

यह विशाल मार्च चतरा कॉलेज मैदान से पूरी अनुशासित ताकत के साथ शुरू होकर शहर के विभिन्न मुख्य और व्यस्त मार्गों से गुजरते हुए सीधे डीएफओ कार्यालय परिसर पहुंचा। वहाँ पहुंचकर यह विशाल जनसमूह एक उग्र और अधिकार-याचिका प्रदर्शन में तब्दील हो गया।

प्रदर्शन के दौरान सुदूर वन क्षेत्रों में रहने वाले वनवासियों और ग्रामीणों की गंभीर व लंबे समय से लंबित विभिन्न समस्याओं को लेकर पार्टी के एक शीर्ष प्रतिनिधिमंडल द्वारा चतरा के उत्तरी एवं दक्षिणी वन प्रमंडल पदाधिकारियों (DFO) को एक विस्तृत स्मार-पत्र (मांग-पत्र) सौंपा गया।

जल, जंगल, जमीन की रक्षा के लिए तेज होगा संघर्ष: विनोद सिंह

डीएफओ कार्यालय के समक्ष आयोजित विशाल जनसभा को मुख्य रूप से संबोधित करते हुए भाकपा (माले) के पोलित ब्यूरो सदस्य सह बगोदर के पूर्व विधायक विनोद कुमार सिंह, पांकी मध्य की जिला परिषद सदस्य सह पार्टी राज्य कमिटी सदस्य खुशबू कुमारी, चतरा प्रभारी सह पार्टी स्थायी समिति सदस्य भुनेश्वर बेदिया और आइसा (AISA) के राज्य सचिव त्रिलोकी नाथ सहित दर्जनों वक्ताओं ने मंच से वन विभाग और सरकार की नीतियों पर तीखे बाण चलाए। जनसभा का सफल और प्रभावी संचालन जिला सचिव मनोज प्रजापति ने किया।

अपने संबोधन में पूर्व विधायक विनोद कुमार सिंह ने कहा कि धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा ने जल, जंगल और जमीन की रक्षा तथा मूलवासी-आदिवासी स्वाभिमान की रक्षा के लिए बहुत ही छोटी उम्र में अपना सर्वोच्च बलिदान दे दिया था। आज उनके शहादत दिवस पर उनके सपनों के शोषणमुक्त झारखंड को साकार करने तथा शोषित-वंचित जनता के जल-जंगल-जमीन के अधिकारों की रक्षा के लिए भाकपा (माले) चतरा की धरती से संघर्ष को और तेज करने का पक्का संकल्प लेती है।

पीढ़ियों से रहने के बाद भी नहीं मिल रहा पट्टा, वन विभाग पर उत्पीड़न का आरोप

मंच से बोलते हुए खुशबू कुमारी और भुनेश्वर बेदिया ने चतरा की प्रशासनिक स्थिति पर चोट करते हुए कहा कि चतरा आज भी एक बहुत बड़ा आदिवासी, बिरहोर और सघन वन क्षेत्र वाला जिला है। इसके बावजूद आज भी यहाँ वन अधिकार पट्टा, स्थानीय रोजगार, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, स्वास्थ्य, सिंचाई, सड़क और बिजली जैसी बुनियादी और जीवन रक्षक समस्याएं गंभीर रूप से मुंह बाएं खड़ी हैं।

वक्ताओं ने आरोप लगाया कि वनवासी और गरीब परिवार पीढ़ियों से जंगलों में रहकर जमीन पर आश्रित हैं, लेकिन उन्हें आज तक ‘वन अधिकार अधिनियम, 2006’ के तहत उनका वैधानिक अधिकार (पट्टा) जिला प्रशासन और वन विभाग की सुस्ती के कारण नहीं मिल पा रहा है। इसके विपरीत, वन विभाग के कुछ अधिकारियों द्वारा गरीबों का मानसिक व शारीरिक उत्पीड़न किया जा रहा है, उन्हें पुस्तैनी जमीनों से बेदखल करने की दुर्भावनापूर्ण कार्रवाई की जा रही है और आवाज उठाने पर उन पर झूठे व मनगढ़ंत मुकदमे दर्ज कर परेशान किया जा रहा है, जिसे अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

भाकपा (माले) की मुख्य और प्रमुख मांगें:

जनसभा के माध्यम से पार्टी ने वन प्रमंडल पदाधिकारियों और जिला प्रशासन के समक्ष निम्नलिखित मुख्य मांगें मजबूती से रखीं:

  • वन अधिकार पट्टा: सभी पात्र आदिवासी, बिरहोर और पारंपरिक वनवासी परिवारों को अविलंब जांच कर वन अधिकार पट्टा निर्गत किया जाए।

  • बेदखली पर पूर्ण रोक: ग्राम सभा की लिखित अनुमति और विधिवत जांच के बिना किसी भी गरीब परिवार को वन भूमि से जबरन बेदखल करने की कार्रवाई पर तुरंत रोक लगाई जाए।

  • ग्राम सभा को जिम्मेदारी: पर्यावरण के नाम पर स्थानीय जरूरतों के अनुरूप ही वृक्षारोपण कराया जाए और उसकी पूरी जिम्मेदारी व सुरक्षा ग्राम सभाओं को सौंपी जाए।

  • कॉरपोरेट पर रोक: जल, जंगल और वन भूमि को कौड़ियों के भाव कॉरपोरेट कंपनियों और निजी घरानों के हवाले करने की जनविरोधी नीतियों पर तत्काल पूर्ण विराम लगाया जाए।

  • हाथियों के आतंक से सुरक्षा और मुआवजा: चतरा जिले के विभिन्न प्रखंडों में जंगली हाथियों के बढ़ते खूनी आतंक से ग्रामीणों की मुकम्मल सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। वर्ष 2025-26 के दौरान हाथियों द्वारा नष्ट की गई फसलों, ध्वस्त मकानों एवं अन्य संपत्तियों का सरकारी प्रावधानों के तहत अविलंब और सम्मानजनक मुआवजा वितरित किया जाए।

  • झूठे मुकदमे वापस हों: वनवासियों और हक मांगने वाले ग्रामीणों पर वन विभाग द्वारा दर्ज किए गए सभी झूठे और मनगढ़ंत मुकदमों को अविलंब वापस लिया जाए।

बिजली विभाग का पावर कट टॉर्चर: भीषण गर्मी के बीच मात्र 10 मिनट दर्शन देकर घंटों गुल रहती है बिजली; त्रस्त हुए उपभोक्ता

वन विभाग की एनओसी के फेर में बंद है डाढ़ा पावर ग्रिड, जनता त्रस्त

नेताओं ने क्षेत्र के सबसे बड़े बिजली संकट का मुद्दा उठाते हुए कहा कि करोड़ों रुपये की भारी सरकारी लागत से निर्मित डाढ़ा पावर ग्रिड आज पूरी तरह तैयार होने के बावजूद केवल वन विभाग की अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) न मिलने के अभाव में बंद पड़ा है। वन विभाग के इस अड़ंगे के कारण पूरे चतरा क्षेत्र के लाखों उपभोक्ताओं और ग्रामीणों को इस भीषण गर्मी में गंभीर बिजली संकट और नारकीय स्थिति का सामना करना पड़ रहा है।

नेताओं ने सर्वोच्च न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट) के ऐतिहासिक फैसलों का हवाला देते हुए वन विभाग को याद दिलाया कि शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया है कि वन भूमि से अतिक्रमण हटाने के नाम पर बिना समुचित जांच, बिना वैकल्पिक व्यवस्था और बिना उचित कानूनी प्रक्रिया के किसी भी व्यक्ति को बेदखल नहीं किया जा सकता। इसलिए वन विभाग और जिला प्रशासन को अपनी हठधर्मिता छोड़कर संवैधानिक व कानूनी प्रावधानों का अक्षरशः पालन सुनिश्चित करना चाहिए।

शीघ्र समाधान नहीं हुआ तो ठप होगा चतरा: भाकपा (माले)

भाकपा (माले) के जिला सचिव मनोज प्रजापति ने अंत में वन विभाग और जिला प्रशासन को कड़े लहजे में चेतावनी दी कि यदि वनवासियों एवं ग्रामीणों की इन जायज और वैधानिक समस्याओं का समाधान शीघ्र धरातल पर नहीं किया गया, तो आने वाले दिनों में चतरा की सड़कों पर चक्का जाम कर इस आंदोलन को और अधिक व्यापक व उग्र रूप दिया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।

इस ऐतिहासिक महा-आक्रोश मार्च और घेराव कार्यक्रम में मुख्य रूप से शंकर कुमार, आशीष कुमार प्रजापति, संतोष प्रजापति, मंजू देवी, संजय भारती, जितेंद्र यादव, महेशी भारती, कपिल बिरहोर, शिवरतन दास, प्रकाश भोक्ता, रामदास भोक्ता, भगत भोक्ता, नंदलाल भोक्ता, पूनम देवी, ललिता देवी, सरिता देवी और जमना देवी समेत जिले के कोने-कोने से आए हजारों की संख्या में महिला-पुरुष और पार्टी कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

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