एक तरफ उपायुक्त पानी को लेकर बेहद गंभीर, दूसरी तरफ कान में तेल डालकर सोए हैं प्रखंड के लापरवाह अधिकारी; गुस्साए ग्रामीणों ने डीसी से की खराब चापाकल और जलमीनार की अविलंब मरम्मत कराने की मांग
गिद्धौर (चतरा) | न्यूज स्केल लाइव
चतरा जिले के गिद्धौर प्रखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत दुवारी में पेयजल (पीने के पानी) की विकराल समस्या आज तक दूर नहीं हो पाई है। एक ओर जहाँ चतरा जिले के संवेदनशील और मुस्तैद उपायुक्त (DC) रवि आनंद जिले भर में सुचारू पेयजल आपूर्ति और जल संकट को दूर करने को लेकर लगातार गंभीर और बेहद चिंतित दिखाई दे रहे हैं, वहीं दूसरी ओर स्थानीय प्रखंड स्तरीय अधिकारी इस भीषण चिलचिलाती गर्मी में भी पूरी तरह कान में तेल डालकर सोए हुए हैं।
प्रशासनिक लापरवाही का आलम यह है कि दुवारी पंचायत की जनता इस भीषण नौतपा और प्रचंड गर्मी के मौसम में भी पानी के लिए दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर है, लेकिन स्थानीय प्रखंड प्रशासन और पीएचईडी (PHED) विभाग के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही है।
जनता को नहीं मिल रहा पानी, जलमीनार से हो रही है ‘कमर्शियल खेती
स्थानीय ग्रामीणों और प्रत्यक्षदर्शियों से मिली जमीनी जानकारी के अनुसार, दुवारी पंचायत के विभिन्न टोलों में सरकारी राशि से लगाए गए कई महत्वपूर्ण जलमीनार (Solar Water Towers) पूरी तरह सफेद हाथी साबित हो रहे हैं। चौंकाने वाली बात यह सामने आई है कि यहाँ पीने के पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए बनी कई जलमीनारों के पानी का दुरुपयोग कर कुछ रसूखदार लोगों द्वारा व्यावसायिक खेती की जा रही है, जबकि आम जनता के कंठ सूखे पड़े हैं।
इसके अलावा, पंचायत के मुख्य रास्तों और गलियों में लगे दर्जनों चापाकल (Handpumps) महीनों से तकनीकी खराबी के कारण पूरी तरह बंद और कबाड़ में तब्दील हो चुके हैं। जलस्तर (Water Level) नीचे चले जाने और समय पर मरम्मत न होने के कारण ग्रामीण पानी के लिए सुबह से ही बाल्टी और बर्तन लेकर एक मोहल्ले से दूसरे मोहल्ले भटकने को विवश हैं।
अधिकारियों की लापरवाही पर आखिर डीसी रवि आनंद क्यों नहीं करते कड़ा एक्शन?
दुवारी पंचायत में गहराते इस जल संकट ने अब प्रशासनिक कार्यशैली पर भी बड़े सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों और प्रबुद्ध नागरिकों का सीधा सवाल है कि जब चतरा जिले के कप्तान उपायुक्त रवि आनंद लगातार बैठकों में पेयजल व्यवस्था दुरुस्त करने के कड़े निर्देश जारी कर रहे हैं, तो आखिर उनके ही मातहत प्रखंड स्तरीय अधिकारी और अंचल अधिकारी इन आदेशों को ठंडे बस्ते में क्यों डाल रहे हैं?
ऐसे लापरवाह और जनता की बुनियादी जरूरतों को अनदेखा करने वाले अधिकारियों पर जिला मुख्यालय द्वारा अब तक कोई बड़ी और दंडात्मक कानूनी कार्रवाई क्यों नहीं की गई है? अधिकारियों की इसी ढुलमुल नीति के कारण आज सुदूरवर्ती ग्रामीण क्षेत्रों की भोली-भाली जनता बूंद-बूंद शुद्ध पेयजल के लिए त्राहि-त्राहि कर रही है।
ग्रामीणों ने लगाई गुहार— अविलंब दुरुस्त हो चापाकल, नहीं तो सड़क पर उतरने को होंगे बाध्य
इस भयावह स्थिति से उद्वेलित होकर दुवारी पंचायत के समस्त ग्रामीणों ने चतरा उपायुक्त रवि आनंद से सामूहिक रूप से लिखित गुहार लगाई है। ग्रामीणों ने मांग की है कि पंचायत क्षेत्र में बंद पड़े सभी चापाकलों को मैकेनिक भेजकर तुरंत दुरुस्त कराया जाए और जिन जलमीनारों से अवैध रूप से खेती की जा रही है, उन्हें अतिक्रमण मुक्त कराकर आम जनता के लिए पानी की सप्लाई लाइन चालू की जाए।
ग्रामीणों ने दोटूक चेतावनी दी है कि यदि प्रखंड प्रशासन ने अपनी सुस्ती नहीं त्यागी और जल्द ही पानी की किल्लत दूर करने के लिए धरातल पर कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाया, तो समस्त ग्रामीण उग्र आंदोलन करने और चक्का जाम करने के लिए पूरी तरह बाध्य होंगे।




















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