भीषण गर्मी में बिजली की अघोषित कटौती बनी उपभोक्ताओं के लिए अभिशाप; केवल बिल वसूलने में एक्टिव और सेवा देने में पैसिव है विभाग, स्थानीय जनप्रतिनिधियों की चुप्पी पर फूटा जनता का गुस्सा
हंटरगंज (चतरा) | न्यूज स्केल लाइव
चतरा जिले के हंटरगंज प्रखंड अंतर्गत पाण्डेयपुरा क्षेत्र में इन दिनों बिजली की स्थिति बद से बदतर और पूरी तरह वेंटिलेटर पर पहुंच चुकी है। जिले में पड़ रही रिकॉर्डतोड़ झुलसाने वाली भीषण गर्मी और 42 डिग्री के पार जाते पारे के बीच, बिजली विभाग द्वारा की जा रही लगातार अघोषित भारी कटौती से आम जनजीवन पूरी तरह से त्राहि-त्राहि कर रहा है।
क्षेत्र के आक्रोशित उपभोक्ताओं का साफ तौर पर कहना है कि बिजली विभाग केवल हर महीने समय पर बिल थमाने और मोटी राशि का भुगतान लेने में सुपर एक्टिव रहता है, लेकिन जब बिजली संबंधित सुचारू सेवा देने की बात आती है, तो पूरा तंत्र पूरी तरह निष्क्रिय और मूकदर्शक बन जाता है।
जनता के लिए अभिशाप बनी बिजली की आंख-मिचौली; दांव पर लगी छात्रों की पढ़ाई
स्थानीय ग्रामीणों और उपभोक्ताओं का दर्द है कि इस आग उगलती और झुलसा देने वाली गर्मी में बिजली की बेलगाम कटौती एक भयंकर अभिशाप की तरह साबित हो रही है। पाण्डेयपुरा क्षेत्र में बिजली की स्थिति वर्तमान में यह हो चुकी है कि यदि एक घंटे के लिए बिजली आती है, तो फिर पूरे दिन और रात भर के लिए गायब हो जाती है।
इस भयंकर व्यवस्था के कारण समूचे क्षेत्र का जनजीवन पूरी तरह से ठप और अस्त-व्यस्त हो गया है। इस भीषण तपिश में बिना पंखे और कूलर के रहने के कारण बीमार बुजुर्गों और बच्चों की जान आफत में फंस गई है। वहीं दूसरी ओर, प्रतियोगी परीक्षाओं और स्कूली शिक्षा की पढ़ाई करने वाले छात्र-छात्राओं का भविष्य भी पूरी तरह अंधकार में लटक गया है; रातों को लाइट न रहने से बच्चे पढ़ाई नहीं कर पा रहे हैं।
“कौन सा काम चल रहा है जो पूरा ही नहीं होता?” : तोते की तरह जवाब देते हैं कर्मी
ग्रामीणों ने बिजली विभाग के जूनियर इंजीनियर (JE) और स्थानीय सब-स्टेशन के लाइनमैनों की संवेदनहीन कार्यशैली को उजागर करते हुए तीखा आरोप लगाया। उपभोक्ताओं का कहना है कि जब भी बिजली कटौती या फॉल्ट की जानकारी लेने के लिए विभाग के किसी भी छोटे-बड़े कर्मचारी को फोन किया जाता है, तो वे हर बार किसी ट्रेंड तोते की तरह एक ही रटा-रटाया जवाब देते हैं कि— “आगे ग्रिड से ही ब्रेकडाउन है, लाइन पर काम चल रहा है।” आक्रोशित ग्रामीणों ने विभाग से तल्ख सवाल पूछा है कि आखिर पिछले कई महीनों से ऐसा कौन सा महा-प्रोजेक्ट या काम चल रहा है, जो कभी पूरा होने का नाम ही नहीं ले रहा है? विभाग के उच्च अधिकारियों की इस रहस्यमयी चुप्पी पर भी सवाल उठ रहे हैं कि आखिर चतरा के वरीय अधिकारियों का कुंभकर्णी रवैया कब खत्म होगा और पाण्डेयपुरा को कब एक सुदृढ़, सशक्त और निर्बाध बिजली सेवा बहाल हो सकेगी?
सपनों को धरातल पर उतारें, सिर्फ वोट के समय न आएं: जनप्रतिनिधियों पर सीधा निशाना
बिजली विभाग के साथ-साथ पाण्डेयपुरा की आक्रोशित जनता ने इस बार स्थानीय जनप्रतिनिधियों और नेताओं के खिलाफ भी मोर्चा खोल दिया है। क्षेत्र के प्रबुद्ध नागरिकों ने अपने चुने हुए माननीयों पर सीधा निशाना साधते हुए कहा:
“चुनाव के समय केवल विकास के बड़े-बड़े और हसीन सपने दिखाना सही नहीं होता, उन वादों और सपनों को धरातल पर फलिभूत करना भी एक सच्चे जनप्रतिनिधि का दायित्व होता है. इस भीषण संकट के दौर में हमारे स्थानीय जनप्रतिनिधियों द्वारा साधी गई यह चुप्पी हमारे अटूट विश्वास को भीतर से तोड़ने का कार्य कर रही है.”
अंततः हार मानकर क्षेत्र के प्रबुद्ध उपभोक्ताओं ने चतरा जिला प्रशासन और उपायुक्त रवि आनंद से इस महत्वपूर्ण और जीवन-मरण से जुड़े पहलू पर तुरंत संज्ञान लेते हुए एक प्रभावी और महत्वपूर्ण पहल करने की गुहार लगाई है, ताकि इस तपती धूप में तड़प रही आम जनता का सरकारी सिस्टम और प्रशासन पर भरोसा बना रहे।























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